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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः कवि वंदना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ७. कवि वंदना   तुलसीकृत रामचरितमानस सँ मोती चुनबाक क्रम मे आइ सातम पायदान पर आबि गेल छी। देवता लोकनि केँ प्रणाम करबाक प्रथम पायदान केर गिनती हम एहि मे नहि समेटलहुँ कारण ओ परम अनिवार्य रहितो केवल आस्थावान् लेल होइत अछि। जेना तुलसीदासजी सरस्वती, गणेशजी आ स्वयं रामचरितमानस मोतीः कवि वंदना

६ सँ ८ अप्रैल जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन

जनकपुरधाम, २८ मार्च २०२२। मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली विकास कोष जनकपुर द्वारा आगामी ६ सँ ८ अप्रैल २०२२ (२३ सँ २५ गते २०७८) तीन दिवसीय जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन कयल जायत। ई जानकारी मैथिली विकास कोष केर अध्यक्ष जीवनाथ चौधरी करौलनि अछि। ओ कहलनि जे राजा जनकक विमर्श स्थल प्राचीन मिथिलाक ६ सँ ८ अप्रैल जनकपुरधाम साहित्य, कला तथा नाट्य महोत्सव २०७८ केर आयोजन

मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे

सहरसा, २८ मार्च २०२२ । सुभाषचंद्र झा, सहरसा। मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे मैथिली आ हिन्दी साहित्यक ओजस्वी प्रखर वक्ता जनकवि छलाह डाॅ मनोरंजन झा, हुनक नाम सँ विश्वविद्यालय मे चेयर केर स्थापना कयल जायः प्रो. केष्कर ठाकुर   सहरसाक पीजी सेंटर पश्चिम परिसर मे रवि दिन मैथिली सहित अन्यान्य भाषाक प्रकांड मनायल गेल मनोरंजन झा स्मृति दिवस सहरसा मे

हाइ के जवाब बाइ?

‘हाइ’ के जवाब ‘बाइ’ (निजी विचार) – प्रवीण नारायण चौधरी सच बात ई छैक जे हमरो कियो ‘हाइ’ कहिते ओकरा तुरन्त हम ‘बाइ’ कहि देल करी, आइयो कहि दैत छी। कियैक? कारण पता अछि? ‘हाइ’ शब्द आधुनिक युग मे वार्तारम्भक अभिवादन थिकैक, लेकिन एहि शब्दक छाप हमर मन-मस्तिष्क मे फिल्मी अभिवादन जेकाँ पड़ि गेल। एहेन हाइ के जवाब बाइ?

रामचरितमानस मोतीः तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ६. तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा   एहि सँ पूर्व केर कुल ५ अलग-अलग शीर्षक अन्तर्गत आ प्रथम दिवसक ईश-वन्दना करैत महाकवि तुलसीदास स्वयं केँ सभक दास होयबाक भाव सँ हुनका सब केँ कृपाक खान अपने सब कियो मिलिकय छल छोड़िकय हमरा पर कृपा करू, रामचरितमानस मोतीः तुलसीदासजी केर दीनता और राम भक्तिमयी कविताक महिमा

स्वार्थक खेल सँ सफलता दूर-दूर धरि संभव नहि

स्वार्थी मनुष्यक बदलैत रूप-रंगः आजीवन असफल रहबाक कठोर सत्य ‘हम’ सफल होइ, ‘हम’ हर क्षेत्र मे नीक करी, ‘हम’ केकरो सँ आगू रही…. ई तीनू अवस्था जनसामान्य केर मनक भीतर होइते टा छैक। हँ, तेहने भुश्कोल छात्र रहत जे पहिने सँ हाथ-पैर चियारि देत, मुंह बाबि देत आ बकार हरण भ’ जेतैक तखन ओ ई स्वार्थक खेल सँ सफलता दूर-दूर धरि संभव नहि

रामचरितमानस मोतीः राममय जगत केर वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ५. रामरूप सँ जीवमात्र केर वंदना   रामचरितमानस मोती अन्तर्गत मंगल आचरण माने कोनो कार्यारम्भ पूर्व विनीत स्वर (वचन) सँ अपन इष्टदेव, गुरुदेव, श्रेष्ठजन आदि केँ प्रणाम करबाक क्रम मे छी। तुलसीदासजी सर्वप्रथम परमपिता परमात्मा केँ विनय करैत गुरुजन, ब्राह्मण, संत, असंत आदि केँ प्रणाम कयलनि अछि। आर रामचरितमानस मोतीः राममय जगत केर वन्दना

रामचरितमानस मोतीः संत-असंत वंदना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती   ४. संत-असंत वंदना   एहि सँ पहिने ब्राह्मण आ संत केँ सेहो प्रणाम अर्पित करबाक विलक्षण मोती सब अध्याय २ मे प्राप्त कय चुकल छलहुँ। पुनः दुष्ट-दुर्जन केँ प्रणाम अर्पित करबाक मोती सेहो भेटल। आर, मंगल आचरण अन्तर्गत आइ प्रस्तुत अछि दोसर अति विलक्षण मोतीक भंडार, संत रामचरितमानस मोतीः संत-असंत वंदना

असल परिवर्तन के स्वागत होः प्रेरणास्पद कथा ‘हरियाक मोजा’

कथा – ज्योति झा, जनकपुरधाम हरियाक गन्दा मोजा परिवर्तन अन्तःमन सँ होयब जरूरी! मानव मे कोनो परिवर्तन अन्तःमन सँ होयबाक जरूरत होइत छैक। नाटकीय परिवर्तन असलियत केँ एक न एक दिन देखार कय दैत छैक। एहि बातक एकटा छोटछिन उदाहरण कथाशैली मे प्रस्तुत करय चाहबः एक विद्यालय के एक मास्टरजी बच्चा सबकेँ पढबैत छलाह। कक्षामे असल परिवर्तन के स्वागत होः प्रेरणास्पद कथा ‘हरियाक मोजा’

रामचरितमानस मोतीः दुष्टक वन्दना

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती   ३. दुष्ट लोकक वन्दना   महाकवि तुलसीदास जखन रामचरितमानस जेहेन महाकाव्यक रचना करब आरम्भ कयलनि त ओ सर्वप्रथम देवता लोकनि केँ निहोरा-पाती करैत गुरु केँ निहोरा कयलनि, पुनः ब्राह्मण आ संत सब केँ निहोरा कयलनि आ आब नम्बर अछि शत्रु प्रवृत्तिक दुष्ट सभक। आउ देखी महाकविक भाव रामचरितमानस मोतीः दुष्टक वन्दना