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प्रवीण नारायण चौधरी

प्रोफेसर धीरेन्द्र नारायण धीर नहि रहलाह

सुभाषचन्द्र झा, सहरसा। २९ अप्रैल २०२२, मैथिली जिन्दाबाद!! प्रो धीरेंद्र नारायण झा धीर केर निधन मैथिली साहित्यक अपूरणीय क्षति डॉ कुलानंद झा सहरसा बीएसएस कॉलेज, सुपौल केर सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं मैथिली साहित्य केर ख्यातिलब्ध साहित्यकार प्रो. धीरेंद्र नारायण झा “धीर” के निधन केर दुखद सूचना सँ मैथिली साहित्यिक जगत मे शोकक लहरि व्याप्त अछि। हुनकर प्रोफेसर धीरेन्द्र नारायण धीर नहि रहलाह

मैथिली मे बनय कार्टून फिल्म

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी बहुत जरूरी काज – मैथिली मे कार्टून कैरेक्टर आधारित फिल्म धारावाहिक के निर्माण आ प्रदर्शन   मिथिला ब्वाइज द्वारा मैथिली मे नीक-नीक कार्टून फिल्म सब बनायल जाइत अछि, लेकिन हिनका सभक काज बेसी रास एकरंगा आ एक्के आयुवर्ग (एडल्ट) लेल बेसी भेल करैत अछि।   आइ जरूरत अछि जे बालोपयोगी, मैथिली मे बनय कार्टून फिल्म

स्त्री हृदय आ पुरुष संकल्पः सुखी गृहस्थ परिवार लेल अनिवार्य कार्य

स्त्री हृदय आ पुरुष संकल्प   स्त्री हृदय सुकोमल आ शरीरक बनावट सेहो पुरुषक अपेक्षा कमजोर भेल करैछ। आत्मशक्ति, संकल्पशक्ति आ दृढ़तापूर्वक अपन बात पर कायम रहबाक क्षमता सेहो कमजोर भेल करैत अछि। – ई बात कोनो पुरुषवादी मानसिकता सँ नहि बल्कि बहुतो रास आध्यात्मिक-पौराणिक कथा-गाथाक अध्ययन सँ हम लिखि रहल छी। स्त्री हृदय सही स्त्री हृदय आ पुरुष संकल्पः सुखी गृहस्थ परिवार लेल अनिवार्य कार्य

रामचरितमानस मोतीः पतिक अपमान सँ क्षुब्ध सती द्वारा स्वयं शरीर केर परित्याग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १८. पतिक अपमान सँ दुःखी भ’ सती के योगाग्नि सँ जरि गेनाय, दक्ष यज्ञ विध्वंस हमरा लोकनि विगत अध्याय मे सतीजीक अपन पिता दक्ष ओतय यज्ञ मे हुनक पति देवाधिदेव महादेव केर रोकलो उपरान्त जायब आ ओहि ठाम माता छोड़ि बाकी सभक द्वारा उपहास करबाक स्थिति देखि चुकल रामचरितमानस मोतीः पतिक अपमान सँ क्षुब्ध सती द्वारा स्वयं शरीर केर परित्याग

रामचरितमानस मोतीः सतीक अपन पिता दक्ष ओतय यज्ञ देखय लेल गेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १७. सती केर दक्ष यज्ञ मे गेनाय   पूर्वक अध्याय मे पढ़लहुँ जे ब्रह्माजी द्वारा सतीक पिता दक्ष केँ प्रजापति बनायल गेल, प्रभुता पाबि दक्ष प्रजापति मद मे चूर कि करैत छथि ताहि पर आइ गौर करू। ओम्हर पति द्वारा पत्नीक रूप मे मौन परित्याग आ सतासी हजार रामचरितमानस मोतीः सतीक अपन पिता दक्ष ओतय यज्ञ देखय लेल गेनाय

रामचरितमानस मोतीः शिवजी द्वारा सतीक त्याग आ समाधि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १६. शिवजी द्वारा सतीक त्याग, शिवजीक समाधि   रामायणक आरम्भ याज्ञवल्क्यजी द्वारा भरद्वाजजीक प्रश्न आ ताहि मे रहल किछु आशंका केँ सती माताक सन्देह आ भगवानक परीक्षा लेबाक प्रकरण सँ आरम्भ भेल अछि। सती माता द्वारा परीक्षाक स्वरूप एहेन भेल जे आब शिवजी बड़ा घोर दुविधा मे पड़ि रामचरितमानस मोतीः शिवजी द्वारा सतीक त्याग आ समाधि

मैथिली कथा “मड़ौसी”

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मड़ौसी   गामपर भैर गामक लोक जुटि गेल छल। कारण छलैक जे धर्बेन्द्रा ११ वर्षक अवस्था सँ जे गाम छोड़ि भागि गेल छल से केना न केना आइ गाम घुरि आयल छल। बीच अंगना मे खटिया पर ओ बैसल आ दियाद-बाद सँ लैत टोल-पड़ोसक सब लोक ओतय जमा। कियो कहय, मैथिली कथा “मड़ौसी”

रामचरितमानस मोतीः सतीक भ्रम, रामक ऐश्वर्य तथा सतीक पछताबा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १५. सतीक भ्रम, श्री रामजीक ऐश्वर्य और सतीक पछताबा आब मुनि याज्ञवल्क्य जी द्वारा भरद्वाज जी केँ हुनक प्रश्न (जिज्ञासा) जे कि श्री रामचन्द्र जी के सम्बन्ध मे सब बात फरिछाकय कहबाक लेल छल तेकर जवाब देल जा रहल अछि।   रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं रामचरितमानस मोतीः सतीक भ्रम, रामक ऐश्वर्य तथा सतीक पछताबा

अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

गणितमे भारतीय गणितज्ञक योगदान अद्भुत आ अविस्मरणीय अछि। प्राचीनकालसँ संख्या पद्धति, शून्य आ दशमलव आदि महत्वपूर्ण खोज यैहसब कयलथि। एक महान भारतीय गणितज्ञ भेलाह रामानुजन। ‘गणितज्ञहुके गणितज्ञ’ तथा ‘संख्याके जादूगर’ आदि कतेको लोकचर्चित उपाधि हिनका भेटलन्हि। ३३ वर्षक जीवनकालमे हिनकाद्वारा लगभग ५००० प्रमेयक सूत्रपात भेल अछि। हिनक शोधकाजकेँ पूर्ण व्याख्यामे पैघ-पैघ गणितज्ञ लोकनि एखनधरि जुटल अद्भुत गणितज्ञ रामानुजन

रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १४. याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद आ प्रयाग माहात्म्य   तुलसीकृत् रामचरितमानस मे रामायणक परिचय आ महत्व केर शुरुआती भाग पूरा कयलाक बाद आब श्री रामचन्द्र जीक लीला स्वरूप रामायण कथाक अवतरण दुइ महान ऋषिक आपसी संवाद सँ उतारबाक कार्य आरम्भ कयल जा रहल अछि।   १. भरद्वाज मुनि प्रयाग मे रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज-याज्ञवल्क्य संवाद एवं प्रयाग माहात्म्य