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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिली भाषा केँ खंडित करबाक विरोध

अवैध मधेशी भाषासम्बन्धी प्रेस विज्ञप्ति काइल्ह २०७९ पूस ७ गते वृहस्पतिदिन नव निर्वाचित (प्रत्यक्ष – समानुपातिक) प्रतिनिधि सभा सदस्यगणके केन्द्रीय राजधानीक संसद भवनमे शपथ ग्रहण कराओल गेल तथ्यदिस मैथिली साहित्यकार सभाक ध्यानाकर्षण भेल अछि। मातृभाषामे शपथ ग्रहण करबाक प्रावधानअनुसार बहुतो सांसद मातृभाषामे शपथ लेलनि। एहि क्रममे किछुगोटे मातृभाषा मैथिलियोमे सप्पत लेलनि अछि। मौलिक मातृभाषामे सप्पत मैथिली भाषा केँ खंडित करबाक विरोध

रामचरितमानस मोतीः केवटक प्रेम आ गंगा पार उतरबाक रोचक-प्रेरक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती केवटक प्रेम आर गंगा पार जायब १. जिनक वियोग मे पशु एहि तरहें व्याकुल अछि, हुनक वियोग मे प्रजा, माता आर पिता केना जियैत रहता? श्री रामचन्द्रजी जबर्दस्ती सुमंत्र केँ लौटेलनि आ तदोपरान्त ओ गंगाजीक तीर पर अयलाह। ओतय ओ केवट सँ नाव मंगबौलनि, मुदा ओ नाव लय रामचरितमानस मोतीः केवटक प्रेम आ गंगा पार उतरबाक रोचक-प्रेरक प्रसंग

मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश – मैथिली अखबार पूरा कयलक १ वर्षक यात्रा

विशेष सम्पादकीय मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश केर १ वर्ष अत्यन्त दुर्लभ आ लगभग असम्भव काज केँ सम्भव कयल गेल अछि ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’ केर प्रकाशन प्रारम्भ सँ। प्रारम्भहि टा नहि अपितु निरन्तरता दैत १ वर्षक कार्यकाल पूरा करब सेहो लगभग असम्भवे मानल जाइत छल मैथिली लेल। कारण मैथिलीभाषी लेल वर्तमान दुर्दिनता स्पष्टे अछि। विरले केकरो अपन मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश – मैथिली अखबार पूरा कयलक १ वर्षक यात्रा

मैथिल, मैथिली आ जुगाड़ टेक्नोलॉजी

विचार – रमन सिंह आजुक समय मे जुगाड़ बहुत काज आबै छै। दुनिया मे जुगाड़ू लोकक कोनो कमी नहि छैक। विशेष रूप सं मिथिला मे एहन लोक अहां कें डेगे-डेग पर भेटि जायत। ओना मैथिल लोकक मूल पहिचान ई नहि थिक। मैथिल लोक अपन मधुर वाणी, मृदु व्यवहार, कठोर श्रम आ तपस्या के संग विरल मैथिल, मैथिली आ जुगाड़ टेक्नोलॉजी

अन्तर्मनक ओ बातः आत्मसंस्मरण

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी आत्मसंस्मरण अन्तर्मनक ओ बात   हम यदा-कदा बड भावुक भ’ गेल करैत छी… कियैक? कियैक त’ हमरा जखन विवाह करबाक लेल आत्मा मानि लेलक त हम अपन पूज्य पिता सँ कहलियनि जे आब अहाँ जरूर कतहु नीक परिवार देखू आ हमर जीवनसंगिनी तय करू। लेकिन जीवनसंगिनी तकबाक (निर्णय करबाक) बदले अन्तर्मनक ओ बातः आत्मसंस्मरण

साहित्य अकादमी मे अगिला मैथिली प्रतिनिधिक ताजपोशी हेतु तिकड़मबाजी फेर अछि आरम्भ

समाचार-साभारः मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश साहित्य अकादमी मे अगिला मैथिली प्रतिनिधिक ताजपोशी हेतु तिकड़मबाजी फेर अछि आरम्भ ( पूर्व संयोजक रहल डॉ. वीणा ठाकुर केँ एहि बेर फेर सँ कुर्सी थम्हेबाक भ’ रहल प्रयास ) नव दिल्ली | कार्यालय समदिया पूस मास आरम्भ अछि आ मिथिला मे एकरा खरमास कहल जाइत अछि । कोनो शुभ काज साहित्य अकादमी मे अगिला मैथिली प्रतिनिधिक ताजपोशी हेतु तिकड़मबाजी फेर अछि आरम्भ

गीता-दर्पणः गीता सँ जुड़ल महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी गीता सँ जुड़ल महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी गीताभ्यासेन ये जाताः साधकेष्वपि संशयाः। अत्र तेषां समाधानं क्रियते हि समासतः॥ गीताक अभ्यास सँ साधकक मोनक संशय केँ समाधान हेतु ई अध्याय स्वामी रामसुखदासजी महाराज अपन प्रसिद्ध पोथी ‘गीता-दर्पण’ मे रखलनि अछि। गीता-सम्बन्धी प्रश्नोत्तर प्रश्न ‒ कौरव-सेनाक त शंख, भेरी, ढोल आदि कतेको तरहक बाजा गीता-दर्पणः गीता सँ जुड़ल महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी

समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

सामाजिक संजाल आ गतिविधि – कीर्तिनारायण झा दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह जाहि पर अनेकानेक सामाजिक अभियन्ता संग साहित्यसेवी विद्वान्-विदुषी सामान्यजन अपन कलम स्वतंत्रता सँ चलबैत छथि, ताहि समूह केर सारगर्भित समीक्षा लेखन जारी अछि। ई समीक्षा काल्हि १७ दिसम्बर २०२२ केँ पोस्ट कयल गेल अछि। दिसम्बर १७, २०२२ । दहेज मुक्त मिथिला “हम अजब समूह एक गतिविधि अनेकः दहेज मुक्त मिथिला समूहक साप्ताहिक समीक्षा

रामचरितमानस मोतीः श्री लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता सँ सुमंत्रक संवाद….

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता सँ सुमन्त्र केर संवाद, सुमंत्रक लौटब निषादराज द्वारा श्री रामजी व श्री सीताजी केँ जमीन पर सुतल देखि निषादराज गुह अत्यन्त भाव-विह्वल होइत लक्ष्मणजी सँ अपन मोनक व्यथा साझा कयल गेल आ तखन – १. लक्ष्मणजी ज्ञान, वैराग्य और भक्तिक रस सँ सानल मीठ रामचरितमानस मोतीः श्री लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता सँ सुमंत्रक संवाद….

रामचरितमानस मोतीः श्री राम केर श्रृंगवेरपुर प्रवेश आ निषाद द्वारा सेवाक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम केर श्रृंगवेरपुर पहुँचब, निषाद द्वारा सेवा १. शुद्ध (प्रकृतिजन्य त्रिगुण सँ रहित, मायातीत दिव्य मंगलविग्रह) सच्चिदानंद-कन्द स्वरूप सूर्य कुल के ध्वजा रूप भगवान श्री रामचन्द्रजी मनुष्यक सदृश एना चरित्र करैत छथि जे संसाररूपी समुद्र के पार उतरबाक लेल पुल समान अछि। २. जखन निषादराज गुह ई रामचरितमानस मोतीः श्री राम केर श्रृंगवेरपुर प्रवेश आ निषाद द्वारा सेवाक प्रसंग