रामचरितमानस मोतीः भरतजीक प्रयाग जायब आर भरत-भरद्वाज संवाद
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक प्रयाग जायब आर भरत-भरद्वाज संवाद १. प्रेम मे उमकि-उमकि “सीताराम-सीताराम” कहैत भरतजी तेसर पहर प्रयाग मे प्रवेश कयलनि। हुनकर पैर मे पड़ल छाला (फोका) एना चमकैत अछि जेना कमल फुलक कोंढ़ी (कली) पर ओसक बूँद चमकैत अछि। भरतजी आइ पैदले चलिकय आयल छथि, ई समाचार सुनिकय सारा … रामचरितमानस मोतीः भरतजीक प्रयाग जायब आर भरत-भरद्वाज संवाद

