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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः वन मे राम-भरतकेँ वशिष्ठजी द्वारा सम्बोधन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री वशिष्ठजीक सम्बोधन १. भरतजी गुरुक चरणकमल मे प्रणाम कय आज्ञा पाबि बैसि रहलाह। ताहि समय ब्राह्मण, महाजन, मंत्री आदि समस्त सभासद सेहो ओतहि जुटि गेलाह। श्रेष्ठ मुनि वशिष्ठजी समयोचित वचन बजलाह – “हे सभासद लोकनि! हे सुजान भरत! सुनू। सूर्यकुल के सूर्य महाराज श्री रामचन्द्र धर्मधुरंधर और रामचरितमानस मोतीः वन मे राम-भरतकेँ वशिष्ठजी द्वारा सम्बोधन

मशाल लेने चलैत अग्रदूतः मैथिली साहित्यकार रामलोचन ठाकुर पर प्रदीप बिहारी

लेख – प्रदीप बिहारी मशाल लेने चलैत अग्रदूत राम लोचन ठाकुर माटिपानिक एकटा एहन कवि, कथाकार, अनुवादक, सम्पादक आ रंगकर्मी छथि, जिनक रचनाक कण-कणसं मातृभूमि आ मातृभाषाक प्रति अनुराग छिटकैत अछि। जें मिथिला आ मैथिलीक सर्वांगीण विकास हेतु आग्रह छनि, तें मिथिला, मैथिल आ मैथिलीक प्रति सरकारी उपेक्षाक विरोध सेहो हिनक रचनामे पाओल जाइत अछि। मशाल लेने चलैत अग्रदूतः मैथिली साहित्यकार रामलोचन ठाकुर पर प्रदीप बिहारी

रामचरितमानस मोतीः वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप १. भरि पोखरि कमल फुलायल अछि। जलपक्षी सब कूजि रहल अछि। भमरा सब गुंजार कय रहल अछि। रंग-बिरंगक चिड़ैयाँ आ जंगली जानवर सब वैररहित भ’ विहार कय रहल अछि। २. कोल, किरात आर भील आदि वन मे रहयवला लोक रामचरितमानस मोतीः वनवासी द्वारा भरतजीक मंडली केर सत्कार, कैकेइ केर पश्चाताप

रामचरितमानस मोतीः भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध १. लक्ष्मणजी, श्री रामचंद्रजी और सीताजी देवता लोकनिक वाणी सुनि बहुते सुख पओलनि जेकर वर्णन नहि कयल जा सकैत अछि। एम्हर भरतजी समूचा समाजक संग पवित्र मंदाकिनी मे स्नान कयलनि। पुनः सब लोक केँ नदीक रामचरितमानस मोतीः भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध

केना जियत कलाकर्मः सन्दर्भ लोककला आ रंगकर्म

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी केना जियत कलाकर्म जनकपुर के सन्तोष, प्रीतिक नेतृत्व मे चलि रहल अछि एक रंगकर्मी समूह। ई समूह द्वारा निरन्तर अपन मौलिक संस्कृति केँ बचेबाक अभियान संचालित भ’ रहल अछि। ओना त जनकपुर के जमीन रंगकर्म आ कलाकर्म लेल एतबा हरियर अछि जे मिथिला नाट्यकला परिषद् सन् प्रतिष्ठित समूह विश्व भरि केना जियत कलाकर्मः सन्दर्भ लोककला आ रंगकर्म

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय १. देववाणी सुनिकय लक्ष्मणजी सकुचा गेलाह। श्री रामचंद्रजी आर सीताजी हुनकर आदर सँ सम्मान कयलनि आर कहलनि – “हे तात! अहाँ बहुत सुन्दर नीति कहलहुँ। हे भाइ! राज्यक मद सब सँ कठिन मद थिक। जे साधु लोकनिक सभाक सेवन रामचरितमानस मोतीः श्री रामजीक लक्ष्मणजी केँ बुझेनाय आ भरतजीक महिमा कहनाय

रामचरितमानस मोतीः श्री सीताजीक स्वप्न, श्री रामजी केँ कोल-किरात द्वारा भरतजीक आगमनक सूचना, रामजीक शोक, लक्ष्मणजीक क्रोध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री सीताजीक स्वप्न, श्री रामजी केँ कोल-किरात द्वारा भरतजीक आगमनक सूचना, रामजीक शोक, लक्ष्मणजीक क्रोध १. एम्हर श्री रामचंद्रजी राति शेष रहिते जागि गेलाह। राति केँ सीताजी एहेन सपना देखलीह जे ओ श्री रामचंद्रजी केँ सुनाबय लगलीह, मानू समाज सहित भरतजी एतय आयल छथि। प्रभुक वियोग केर अग्नि रामचरितमानस मोतीः श्री सीताजीक स्वप्न, श्री रामजी केँ कोल-किरात द्वारा भरतजीक आगमनक सूचना, रामजीक शोक, लक्ष्मणजीक क्रोध

रामचरितमानस मोतीः भरतजी चित्रकुटक मार्ग मे

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजी चित्रकूटक मार्ग मे १. एहि प्रकारे भरतजी मार्ग मे चलल जा रहल छथि। हुनकर हालत देखि मुनि ओ सिद्धगण लोकनि सिहरि रहल छथि। भरतजी जखनहि ‘राम’ कहिकय लम्बा साँस लैत छथि, तखनहि मानू चारू दिश प्रेम उमड़ि पड़ैत अछि। प्रेम और दीनता सँ पूर्ण हुनकर वचन सुनि रामचरितमानस मोतीः भरतजी चित्रकुटक मार्ग मे

रामचरितमानस मोतीः इन्द्र आ वृहस्पति संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती इंद्र-बृहस्पति संवाद १. भरतजीक प्रेमक प्रभाव देखि देवराज इन्द्र केँ सोच भ’ गेलनि जे कहीं हिनक प्रेमवश श्री रामजी वापस न आबि जाइथ आ हमरा सभक बनल-बनायल कार्य बिगड़ि नहि जाय। संसार भला लेल भला आ ब’द लेल ब’द (खराब लेल खराब) होइछ। मनुष्य जेहेन अपने होइत अछि रामचरितमानस मोतीः इन्द्र आ वृहस्पति संवाद

रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज द्वारा भरत केर सत्कार

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरद्वाज द्वारा भरत केर सत्कार १. एहि प्रकारे मुनिश्रेष्ठ भरद्वाजजी भरतजीक समाधान कयकेँ आगू कहलनि – आब अपने लोकनि हमर प्रेम प्रिय अतिथि बनू आ कृपा कय केँ कन्द-मूल, फल-फूल जे किछु हम दी से स्वीकार करू।  २. मुनिक वचन सुनिकय भरतक हृदय मे सोच भेलनि जे बेमौका रामचरितमानस मोतीः भरद्वाज द्वारा भरत केर सत्कार