रामचरितमानस मोतीः वन मे राम-भरतकेँ वशिष्ठजी द्वारा सम्बोधन
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री वशिष्ठजीक सम्बोधन १. भरतजी गुरुक चरणकमल मे प्रणाम कय आज्ञा पाबि बैसि रहलाह। ताहि समय ब्राह्मण, महाजन, मंत्री आदि समस्त सभासद सेहो ओतहि जुटि गेलाह। श्रेष्ठ मुनि वशिष्ठजी समयोचित वचन बजलाह – “हे सभासद लोकनि! हे सुजान भरत! सुनू। सूर्यकुल के सूर्य महाराज श्री रामचन्द्र धर्मधुरंधर और … रामचरितमानस मोतीः वन मे राम-भरतकेँ वशिष्ठजी द्वारा सम्बोधन


