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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा १. छोट भाइ लक्ष्मणजी और सीताजी समेत प्रभु श्री रामचंद्रजी पर्णकुटी मे एना सुशोभित भ’ रहला अछि मानू वैराग्य, भक्ति और ज्ञान शरीर धारण कएने शोभित भ’ रहल होइथ। २. मुनि, रामचरितमानस मोतीः भरतजीक अयोध्या लौटब, भरतजी द्वारा पादुकाक स्थापना, नन्दिग्राम मे निवास आर श्री भरतजीक चरित्र श्रवण केर महिमा

हम आबि रहल छीः मैथिली धारावाहिक भाग ७ व ८

श्री रबीन्द्र नारायण मिश्र केर लिखल उपन्यास “हम आबि रहल छी” पर आधारति मैथिली धारावाहिक भाग – ७ आ ८ 7 रातिमे भुखले सुति रहलहुँ । टेबुलपर निशा हमर भोजन राखि देने रहथि । हम ओमहर तकबो नहि केलहुँ । असलमे खेबाक मोनो नहि होइत छल । ओ दुनूगोटे भोजन केलाह आ अपन कोठरीमे चलि हम आबि रहल छीः मैथिली धारावाहिक भाग ७ व ८

#लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख #लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के – किरण झा बाबा धाम – बाबा धाम हम अपन बड़का बौआ के मुंडन कर’ गेल रही। ओकर मानल रहय। ट्रेन स यात्रा केलौं। दिन मे विश्राम केला के #लेखनी के धार: यात्रा मिथिला के धर्म स्थान के

यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – अहिल्यास्थान

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – मधू मिश्रा आइ हम अपन घर लग के प्रसिद्ध और पवित्र स्थान अहिल्यास्थान के बारे मे लिखि रहल छी । हमर सबके स्टेशन अछि कमतौल स्टेशन जतय स हम सब यात्रा: मिथलाक पवित्र और प्रसिद्ध स्थान के – अहिल्यास्थान

स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम: मिथिला यात्रा

दहेज मुक्त मिथिलाक साहित्यिक अभियानः लेखनीक धार अन्तर्गत २० अप्रैल २०२३ ‘मिथिला यात्रा संस्मरण’ पर संकलित आलेख “स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम” – कीर्ति नारायण झा मिथिला के स्वर्ग सँ सुंदर धाम कहल गेलैक अछि आ एहि स्वर्ग में देवी देवता के सभ ठाम बास छैन्ह। मिथिलाक सभ आंगन स्वर्ग सँ सुंदर मिथिला धाम, मंडन अयाची राजा जनक के गाम: मिथिला यात्रा

#जानकीनवमीविशेष – सीताजी संग हनुमानजीक प्रथम भेंट आ श्रीरामक सन्देश

जानकी नवमी विशेष स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी #जानकीनवमीविशेष   अपन समूह ‘दहेज मुक्त मिथिला’क कमान्डर इन चीफ पराम्बा जानकीजी छथि। हम सब हुनक दूत सब थिकहुँ। जानकीदूत होयबाक सौभाग्य कम भारी बात नहि! रामजीक दूत बजरंगबली भ’ कय जानकीजी सँ भेटय गेल रहथिन। फेर जानकीजीक दूत बनिकय रामजी लग घुमि अयलथि बजरंगबली। एखन अपन #जानकीनवमीविशेष – सीताजी संग हनुमानजीक प्रथम भेंट आ श्रीरामक सन्देश

#जानकीनवमीविशेष – हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी

हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी – प्रवीण नारायण चौधरी   देखू भाइ-बहिन-मित्र लोकनि!! हम सब मिथिलावासी जानकीक नैहरा सँ छी। श्री रामजी जखन वनवास गेल रहथि त हमरा लोकनिक धिया जानकीजी सेहो हुनका संग ओहिना साधूक वेश बनाकय गेलथि जेना रामजी केँ जेबाक लेल कैकेइ माँ पिता दशरथ सँ वचनानुसार आज्ञा करबौलीह। रघुकुल के #जानकीनवमीविशेष – हमर जानकी आ पाहुन श्री रामजी

उर्विजा द्वारा जानकी साहित्य कला महोत्सव दिल्ली मे सम्पन्न भेल

२५ अप्रैल २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मैथिली भाषा-साहित्यक क्षेत्र मे उन्नति-प्रगतिक नित्य नव आयाम बनेबाक विभिन्न कार्यक्रम केँ निरन्तरता दैत काल्हि सोम दिन दिल्ली मे सम्पन्न एक अति महत्वपूर्ण कार्यक्रम पर श्री अरुण कुमार मिश्र द्वारा फेसबुक मे पोस्ट कयल गेल अछि जेकर सम्पादित रूप प्रस्तुत अछि। रिपोर्टः साभार अरुण कुमार मिश्र, दिल्ली विगत किछु उर्विजा द्वारा जानकी साहित्य कला महोत्सव दिल्ली मे सम्पन्न भेल

अर्थशास्त्र – कौटिल्य चाणक्यक ओ महान नीतिशास्त्र जे राजधर्म सिखबैत अछि

प्राचीन साहित्यः अर्थशास्त्र – अनुवादित लेख (अनुवादकः प्रवीण नारायण चौधरी) अर्थशास्त्र (सामग्री विज्ञान) कौटिल्य, या सामान्यतया विष्णुगुप्त चाणक्य के नाम सँ जानल गेनिहार, भारतक प्रथम प्रधानमंत्रीक रूप मे जानल जाइत छथि। ईसा पूर्व ४था शताब्दी मे भारतक सब सँ पैघ सम्राज्यक संस्थापक सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य केर मुख्य सलाहकार कौटिल्य मौर्य सम्राज्यक अत्यन्त महत्वपूर्ण हस्ती छलाह अर्थशास्त्र – कौटिल्य चाणक्यक ओ महान नीतिशास्त्र जे राजधर्म सिखबैत अछि

ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत

एक मनोनुभूति अपना सब बेसीकाल कोनो कर्म करय सँ पहिने पाप आ पुण्य केर पक्ष पर ध्यान दैत छियैक, किंवा दैत हेबय। हमर हाल एहि मादे बच्चे सँ द्वंद्वबन्धन मे फँसयवला होइत आयल अछि। ई शायद माँ-पिता आ परिजनक बेर-बेर टोकबाक कारण भेल, बच्चा मे बड बदमाशी करियैक…. आ बेर-बेर बात-कथा सुनैत-सुनैत ई हाल भ’ ई पाप छियैक या पुण्य – दुविधा सँ ऊबार केना भेटत