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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः अंगद-राम संवाद, युद्ध केर तैयारी

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अंगद-राम संवाद, युद्ध केर तैयारी १. एम्हर सुबेल पर्वत पर श्री रामजी अंगद केँ बजौलनि। ओ आबिकय चरणकमल मे सिर नमौलनि। बहुत आदर सँ ओ लग मे बैसिकय खर (राक्षस) केर शत्रु कृपालु श्री रामजी हँसिकय बजलाह – हे बालि केर पुत्र! हम बहुत उत्सुक भ’ रहल छी। रामचरितमानस मोतीः अंगद-राम संवाद, युद्ध केर तैयारी

बस अपन कर्म मे लागल रहू

सार्थक काज के कमी नहि छैक मिथिला मे अपने सब देखैत होयब जे बिना बातक बात मे लोक कतेक फँसबैत छैक। अहाँ चाहबो नहि करब तैयो लोक अहाँक नाम लय-लय कय कतेको रंग के अन्दाज आ कल्पना सब करैत रहत। कियैक? कियैक त आजुक दुनिया मे व्यावसायिकता आ सामाजिकता सँ बहुतो लोक केँ कोनो मतलब बस अपन कर्म मे लागल रहू

सहरसा मे आयोजित एक दिवसीय परिसंवादः मैथिली सिनेमा आ साहित्य

४ अक्टुबर, २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! सहरसा सँ आबिकय…. हम प्रवीण नारायण चौधरी, एक सहभागी विमर्शी ई संस्मरण लिखि रहल छी। पहिने संछिप्त समाचारः ३० सितम्बर २०२३ केँ साहित्य अकादमी, नई दिल्ली संग स्थानीय आयोजक ईस्ट एन वेस्ट टीचर्स ट्रेनिंग कालेज, पटुआहा, सहरसा द्वारा एक दिवसीय परिसंवाद – मैथिली सिनेमा आ साहित्य विषय पर आयोजित सहरसा मे आयोजित एक दिवसीय परिसंवादः मैथिली सिनेमा आ साहित्य

रामचरितमानस मोतीः रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय १. अंगद श्री रामजीक दूत बनि आयल छलाह, रावण केँ खूब नीक सँ ओकर असल ओकादि देखाकय निडर-निःशंक भ’ रणभूमि मे रावण केँ देखि लेबाक चुनौती दैत वापस गेलाह। एम्हर रावण अपन सभा सँ सन्ध्या भेल बुझैत काफी उदास भ’ महल मे रामचरितमानस मोतीः रावण केँ फेरो मन्दोदरी द्वारा बुझेनाय

अहुँ केँ एना समस्या होइत अछि की?

आत्ममंथन – आत्मसमीक्षा सब दिन पढ़लियैक हिन्दी। अखबार, पत्रिका, उपन्यास, कथा, कविता आदि विभिन्न बात विद्यालय सँ आम जनजीवन धरि हिन्दी के भरमार रहलैक। मैथिली सेहो पढ़लियैक लेकिन मात्र परीक्षा मे नीक मार्क्स सँ पास हेबाक लेल आ अत्यधिक सहज विषय बोध करैत बहुत कम समय खर्च करबाक कय टा बात पहिनहि सँ मोन मे अहुँ केँ एना समस्या होइत अछि की?

मैथिली फिल्म – विशेष रूप सँ लघु फिल्म पर प्रवीण दृष्टि

मैथिली लघुफिल्म मानवीय स्वभाव मे मनोरंजन के बड पैघ महत्व सर्वविदिते अछि। अदौकाल सँ रंगकर्म आ विभिन्न लोकनाच लोकरंजना लेल प्रयोग मे रहल अछि। आइ मानवीय समाज लेल मनोरंजनक संग-संग जीवन लेल सर्वाधिक जरूरी पक्ष जीवनोपयोगी शिक्षा लेल फिल्म बड पैघ भूमिका निभा रहल अछि। मानव सभ्यता सँ जुड़ल विभिन्न कथानक पर आधारित फिल्म वास्तव मैथिली फिल्म – विशेष रूप सँ लघु फिल्म पर प्रवीण दृष्टि

मैथिली लेखन क्रान्ति – नवप्रवेशी लेखक-लेखिका लेल विशेष

तेना लिखू जे लोक के कल्याण हो   लेख लिखनाय एकटा कला होइत छैक। बच्चे सँ लेख (१०० शब्द, २०० शब्द, ५०० शब्द, १००० शब्द) लिखबाक अभ्यास करायल जाइत अछि। लेखनी लोक तखनहि उत्कृष्ट स्तर के कय सकैत अछि जखन लेखकक दिमाग तेजी सँ लेख के सब ओर-छोर पकड़ैत छैक आ दिमागी आँखि सँ पाठकक मैथिली लेखन क्रान्ति – नवप्रवेशी लेखक-लेखिका लेल विशेष

प्रवीण दृष्टिः ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व

ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व   (निजी अनुभव पर आधारित किछु विचार)   ब्राह्मणक परिवार मे जन्म भेलाक बाद हमरा ई बुझय मे आयल जे हमर कर्म-कर्तव्य ब्राह्मण संस्कार मुताबिक होयब आवश्यक अछि। हालांकि सच कहय मे कोनो हर्ज नहि जे ई सब ज्ञान हमरा सही समय पर एकदम नहि भ’ सकल छल।   बच्चा सँ सब प्रवीण दृष्टिः ब्राह्मण आ ब्रह्मणत्व

रामचरितमानस मोतीः अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद १. एम्हर सुबेल पर्वत पर प्रातःकाल श्री रघुनाथजी जगलाह आर ओ सब मंत्री लोकनि केँ बजाकय सलाह पुछलनि जे आब जल्दी कहय जाउ कि कोन उपाय करबाक चाही? जाम्बवान्‌ श्री रामजीक चरण मे सिर नमवैत कहलखिन – हे सर्वज्ञ रामचरितमानस मोतीः अंगदजीक लंका गेनाय आर रावणक सभा मे अंगद-रावण संवाद

दरभंगाक लदारी गाम आ दुर्गा पूजाक इतिहास

माँ भगवती स्थान लदारी (दरभंगा) दरभंगा जिला मुख्यालय सँ केवटी – विस्फी होइत जनकपुर आ सीतामढ़ी केँ जोड़यवला मार्ग पर स्थित अछि लदारी गाम। एहि गाम मे आइ कतेको दशक सँ जगज्जननी दुर्गा माताक पूजा-पाठ बड़ा भव्यता सँ ग्रामीण आ आसपासक लाखों श्रद्धालु लोकनि द्वारा मनायल जाइत अछि। माँ दुर्गाक महिमा अपरंपार मानल जाइत छन्हि दरभंगाक लदारी गाम आ दुर्गा पूजाक इतिहास