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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोतीः विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध देवता, इन्द्र, ब्रह्मा आ शिवजी द्वारा श्री रामजीक स्तुति उपरान्त – १. जखन शिवजी विनती कयकेँ चलि गेलाह, तखन विभीषणजी प्रभु लग अयलाह आ चरण मे मस्तक नमाकय कोमल स्वर मे बजलाह – हे शार्गं धनुष रामचरितमानस मोतीः विभीषणजीक प्रार्थना, श्री रामजी द्वारा भरतजीक प्रेमदशाक वर्णन, शीघ्र अयोध्या पहुँचबाक अनुरोध

रामचरितमानस मोतीः देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा पराम्बा जानकीक अग्नि परीक्षा उपरान्त…. १. देवता सब हर्षित भ’ कय फूल बरसाबय लगलाह। आकाश मे डंका बाजय लागल। किन्नर सब गीत गाबय लागल। विमान सब पर चढ़ल अप्सरा लोकनि नाचय लगलीह। जनकसुता समेत प्रभु सोभा अमित अपार। देखि भालु कपि रामचरितमानस मोतीः देवता लोकनिक स्तुति, इंद्र केर अमृत वर्षा

गम्भीरता सँ काज करैत रहू

हिसाब सँ देखल जाय त मैथिली आ मिथिलाक स्थिति मे क्रान्तिकारी परिवर्तन आबि चुकल छैक। सामाजिक संजाल केर अद्भुत सहयोग सँ विकासक परिदृश्य स्पष्ट देखि सकैत अछि सब कियो। एहि जागरणक सुखद परिणाम ई छैक जे अधिकाधिक लोक अपन मौलिक सन्दर्भ लेल मुखर भ’ काज कय रहल अछि। लोकक टिका-टिप्पणी सब दिनके बात थिकैक, प्रोत्साहित गम्भीरता सँ काज करैत रहू

रामचरितमानस मोतीः हनुमान्‌जीक सीताजी केँ कुशल सुनेनाय, सीताजीक आगमन आर अग्नि परीक्षा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती हनुमान्‌जीक सीताजी केँ कुशल सुनेनाय, सीताजीक आगमन आर अग्नि परीक्षा विभीषणक राज्याभिषेक उपरान्त…. १. प्रभु हनुमान्‌जी केँ बजौलनि। भगवान्‌ कहलखिन – अहाँ लंका जाउ। जानकी केँ सब समाचार सुनाउ आर हुनकर कुशल समाचार लय कय अहाँ चलि आउ। हनुमान्‌जी नगर मे गेलाह। ई सुनि राक्षस-राक्षसी हुनकर सत्कार वास्ते रामचरितमानस मोतीः हनुमान्‌जीक सीताजी केँ कुशल सुनेनाय, सीताजीक आगमन आर अग्नि परीक्षा

कुर्सों मे होयत रुद्र चण्डी महायज्ञ

रुद्र चण्डी महायज्ञ – कुर्सों (मार्च २०२४, बड़की पोखरि पुबरिया महार, कुर्सों) हमर आदरणीय ग्रामीण लोकनि निर्णय कयलनि अछि जे अपन गाम मे ‘रुद्र चण्डी महायज्ञ’ केर आयोजन कय हमरा लोकनि अपन जीवनकाल मे एकटा इतिहास बनाबी। एखन धरि एकहु बेर एहि स्तर के यज्ञ नहि कयल जा सकल अछि, जखन कि आसपासक गाम यथा कुर्सों मे होयत रुद्र चण्डी महायज्ञ

रामचरितमानस मोतीः विभीषणक राज्याभिषेक

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विभीषणक राज्याभिषेक रावणक अन्त्येष्टि सम्पन्न कयलाक बाद…. १. सब क्रिया-कर्म कयलाक बाद विभीषण श्री रामजी लग आबि हुनका प्रणाम कयलनि। कृपाक समुद्र श्री रामजी छोट भाइ लक्ष्मणजी केँ बजौलनि। श्री रघुनाथजी कहलखिन – अहाँ, बानरराज सुग्रीव, अंगद, नल, नील आ जाम्बवान् संग मारुति सब नीतिनिपुण लोक मिलिकय विभीषण रामचरितमानस मोतीः विभीषणक राज्याभिषेक

रामचरितमानस मोतीः मन्दोदरी-विलाप, रावणक अन्त्येष्टि क्रिया

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती मन्दोदरी-विलाप, रावणक अन्त्येष्टि क्रिया राम-रावण युद्ध आ रावणक मृत्युक पश्चात् – १. पतिक काटल मुन्ड देखिते मंदोदरी व्याकुल आर मूर्च्छित भ’ कय धरती पर खसि पड़लीह। स्त्रीगण सब कनिते दौड़लीह आ मंदोदरी केँ उठाकय रावण लग लय गेलीह। पतिक दशा देखि ओ आरो नाम लय-लयकय भोकासी पाड़िकय कानय रामचरितमानस मोतीः मन्दोदरी-विलाप, रावणक अन्त्येष्टि क्रिया

रामचरितमानस मोतीः रावणक मूर्च्छा टूटब, राम-रावण युद्ध, रावण वध, सर्वत्र जयध्वनि

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावणक मूर्च्छा टूटब, राम-रावण युद्ध, रावण वध, सर्वत्र जयध्वनि प्रसंग राम-रावण युद्ध मे सीता लग त्रिजटा द्वारा युद्ध वर्णन तथा सीता केँ शुभ शकुन बाम अंग फरकय लागब – प्रसंग निरन्तरता मे…. १. एम्हर आधा राति रावण मूर्च्छा सँ जागल आर अपन सारथी पर रुष्ट होइत बाजय लागल रामचरितमानस मोतीः रावणक मूर्च्छा टूटब, राम-रावण युद्ध, रावण वध, सर्वत्र जयध्वनि

रामचरितमानस मोतीः त्रिजटा-सीता संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती त्रिजटा-सीता संवाद राम-रावण युद्ध निरन्तरता मे, रावणक मूर्च्छा आ तेकर बाद…. १. ओहि राति त्रिजटा सीताजी लग जा कय हुनका सब कथा कहि सुनेलक। शत्रुक माथ आ हाथ बढ़ैत रहबाक बात सुनि सीताजी केँ बहुत भय भेलन्हि। हुनकर मुँह उदास भ’ गेलनि। मोन मे चिन्ता उत्पन्न भ’ गेलनि। रामचरितमानस मोतीः त्रिजटा-सीता संवाद

रामचरितमानस मोतीः घोर युद्ध आ रावणक मुर्च्छा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती घोरयुद्ध आ रावणक मूर्च्छा प्रसंग रावणक माया सँ प्रकट अनेकों रावण केँ देखि देवता सभक डरेनाय आ श्री राम द्वारा एक्कहि बाण सँ ओहि माया केँ खंडित कयनाय, ताहि समय देवता सब श्री रामजीक स्तुति कय रहल छलथि – ताहि पर ओ एक्के गोट रावण देवता लेल बड रामचरितमानस मोतीः घोर युद्ध आ रावणक मुर्च्छा