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प्रवीण नारायण चौधरी

भाषिक शुद्धतावादी आ मानकतावादीक नाम एगो चिट्ठी

भाषा-साहित्य – किसलय कृष्ण मिथिलावासीक एकमात्र अप्पन भाषिक दैनिक ‘ मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’क पहिल मास पूर्ण हेबा पर बधाई!! भाषिक शुद्धतावादी आ मानकतावादीक नाम एगो चिट्ठी आइ मैथिली दैनिक मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’क प्रकाशन यात्राक तीस दिन अछि मने एकमासक भ’ गेलै ई नवजात । अखबार प्रकाशनक एकटा सुखद सपनाक संगहि एकटा संघर्ष यात्रा हैइ ई भाषिक शुद्धतावादी आ मानकतावादीक नाम एगो चिट्ठी

मिथिला लेल राजनीति विषय पर हमर विचारः प्रेम विदेह ‘ललन’

विचार – प्रेम विदेह ‘ललन’ काइल्ह श्री प्रवीण नारायण चौधरीजीक जूम मिटिङमे मिथिला पार्टी गठन सम्बन्धी रखने अपन विचार संक्षेपमे राखि रहल छी : नेपालमे मिथिलाक राजनीतिक दल निर्माणसँ पूर्व मैथिली भाषाके लोक मुद्दा बनाएब आवश्यक अछि। मैथिली भाषाके एकल जातिवाद आ एकल सम्प्रदायवादसँ मुक्ति जरूरी अछि। मिथिलाक मुस्लिम, बौद्ध, कबीरपन्थी सहित सभ धर्म, जाति, मिथिला लेल राजनीति विषय पर हमर विचारः प्रेम विदेह ‘ललन’

शुरू भ गेल सर्वथा कठिन माघी कामर यात्रा

23 जनवरी 2022 । मैथिली जिन्दाबाद!! मधुबनी जिला के धकजरी नवटोल गांव सँ माघी कामर यात्रा आरम्भ हेबाक सूचना मैथिली कवि प्रभाकर झा फेसबुक अपडेट मार्फ़त देलनि अछि। ओ लिखलन्हि अछि, आइ हम्मर गाम नवटोली, धकजरी राज पंचायतक ४१ गो बम बाबाधाम लेल गाम सँ पैदल चललाह । बाबा बैद्यनाथ बमसबकें रक्षा करथि आ सकुशल शुरू भ गेल सर्वथा कठिन माघी कामर यात्रा

पलायनक दंश झेलि रहल मिथिला लेल ई पुण्यक काज मिलिजुलि करब आवश्यक

हाथ मे भेटल अवसर केँ रिक्त नहि जाय दियौक   अहाँक एक उपकार उपकृत लेल आजीवन अविस्मरणीय होइछ, संगहि अहाँक जीवन मे एहि सँ पैघ आन कोनो उपलब्धि नहि होइछ। कहबाक तात्पर्य, आजुक व्यस्त संसार मे सब कियो अपन-अपन रोजी-रोजगार मे व्यस्त छी, बड मुश्किल सऽ केकरो किछु पल (समय) अपना सँ अतिरिक्त दोसरहु के पलायनक दंश झेलि रहल मिथिला लेल ई पुण्यक काज मिलिजुलि करब आवश्यक

जुड़ि रहल अछि हजारों सदस्यः मिथिला राज्य निर्माण सेना

२१ जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला राज्य निर्माण सेना द्वारा तिला संक्रान्तिक दिन सँ नव वर्ष मे सदस्यता अभियान आरम्भ कयल गेल अछि। नव सदस्य सँ निर्धारित मोबाइल नम्बर +918797670999 पर अपन नाम, पता आदि विवरण पठेबाक अनुरोध कयल गेल अछि। एहि विवरणक आधार पर सदस्य सब केँ सम्बन्धित प्रखण्ड (क्षेत्र, ब्लौक) केर व्हाट्सअप जुड़ि रहल अछि हजारों सदस्यः मिथिला राज्य निर्माण सेना

सपना: मिथिला राज्य बनेबय कोहुना (काव्य)

कविता – शिशिर कुमार झा सपना ***** प्रवासी मैथिल के एकहि सपना, मिथिला राज्य बनेबैय कोहुना. पलायन के शिकार भेलहुं हम, बेरोजगारी सं तबाह भेलहुं हम, बाढि रौदी सं लाचार भेलहुं हम, शिक्षा-स्वास्थ्य सं तारतार भेलहुं हम, घर-परिवार छोड़ि भगलहुं कोहुना, दिल्ली, मुम्बई, सूरत आ’ बसलहुं पटना. मिथिला राज्य बनेबैय कोहुना, मिथिला राज्य बनेबैय कोहुना. सपना: मिथिला राज्य बनेबय कोहुना (काव्य)

मिथिलाक नाम मधेश – आगू की?

नेपाल मे मिथिलाक नया नाम पड़ल ‘मधेश’   नेपालक नव संविधान (२०७२ विक्रम संवत साल) के मुताबिक कुल क्षेत्रफल १,४७,१८१ वर्ग किलोमीटर केँ विभिन्न दृष्टिकोण (राजनीतिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक आ तत्कालीन संविधान सभाक बहुमत सदस्यक सहमतिक आधार, सम्बन्धित विषय पर गठित आयोग सभक सुझाव, आदि) केर आधार पर नेपालक शासकीय संरचना मे नेपाल केँ ७५३ स्थानीय मिथिलाक नाम मधेश – आगू की?

एक गलती (मैथिली कथा)

कथा – गोपाल मोहन मिश्र एक गलती ( कहानी ) एक बेर किछु विद्यार्थी रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में किछु प्रयोग कs रहल छलाह । सभ विद्यार्थी अपन-अपन प्रयोग में व्यस्त छलाह कि अचानक एक लड़का के परखनली सं तेज बुलबुला उठs लागल आ ओकर छिटका सामने प्रयोग कs रहल लड़की के आँंखि में चलि गेल एक गलती (मैथिली कथा)

महापुरुष लोकनिक महिमा आ हुनक सङ्ग केर फल

स्वाध्याय लेख – अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी सत्सङ्ग और कुसङ्ग महापुरुष लोकनिक महिमा आ हुनक सङ्ग केर फल – जयदयाल जी गोयन्दका (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) जाहि तरहें भगवानक महान आदर्श चरित्र आ गुण सभक महिमा अनिवर्वचनीय अछि, तहिना भगवत्प्राप्त संत महापुरुष लोकनिक पवित्रतम चरित्र और गुण सभक महिमाक कियो वर्णन नहि कय सकैत अछि। महापुरुष लोकनिक महिमा आ हुनक सङ्ग केर फल

२०२२ केर तिला संक्रान्तिक पुण्यकालक गणना पर आचार्य धर्मेन्द्रनाथक सन्देश

१३ जनवरी २०२२ । मैथिली जिन्दाबाद!! ज्योतिषी शास्त्रक ग्रन्थ ‘व्यवहाररत्न’ मुताबिक सूर्य केर संक्रान्ति काल सँ पूर्व १६ घड़ी तथा पश्चात (बाद) १६ घड़ी पुण्यकाल कहल गेल अछि। रात्रिकालक पूर्वार्ध मे संक्रान्ति पड़य आ पूर्व दिनक उत्तरार्ध मे और रात्रि केर उत्तरार्ध मे संक्रान्ति पड़य तऽ ऐगला दिनक पूर्वार्ध मे पुण्यकाल पड़ैत छैक। ठीक निशीथ २०२२ केर तिला संक्रान्तिक पुण्यकालक गणना पर आचार्य धर्मेन्द्रनाथक सन्देश