कथा
– गोपाल मोहन मिश्र
एक गलती ( कहानी )
एक बेर किछु विद्यार्थी रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में किछु प्रयोग कs रहल छलाह । सभ विद्यार्थी अपन-अपन प्रयोग में व्यस्त छलाह कि अचानक एक लड़का के परखनली सं तेज बुलबुला उठs लागल आ ओकर छिटका सामने प्रयोग कs रहल लड़की के आँंखि में चलि गेल ।
पूरा प्रयोगशाला में हाहाकार मचि गेल, सभ खूब परेशान छलाह । आनन फानन में ओहि लड़की के अस्पताल पहुँचायल गेल, ज़हाँ डाक्टर बतयलनि कि ओ अपन आँंखि गंवा चुकल अछि । ई सुनि कs ओहि लड़की के घर वाला सभ ओहि लड़का के कोसनाई शुरू कs देलनि । स्कूल प्रबंधन ओहि लड़का के स्कूल सं निकालि देलक ।
आब ओ आन्हर लड़की अपन नीरस ज़िन्दगी बिता रहल छल, जे शायद ककरो लापरवाही के वजह सं वीरान भs गेल छल । आब ओहि लड़की के ज़िन्दगी में कोई रंग कोई माने नहि रखैत छल । घर वाला सभ सेहो वक़्त-बेवक्त ओहि लड़का के कोसैत रहैत छलाह, जे हुनक लड़की के ज़िन्दगी खराब कs देलक । आइ-काल्हि के ज़माना में तs ककरो सामने हूर-परी सेहो बैसल होअय, तैयो लड़का वाला के ओहि सं बेसी खूबसूरत लड़की चाही । फेर तs ओहि बेचारी लड़की के वीरान ज़िन्दगी में रंग भरबाक बात सोचनाइ एकदम असंभव छल । खैर वक़्त बीतैत गेल आ ओहि लड़की के ओहि वीरानी के आदत भs गेलै, कारण कि आब ओकर ज़िन्दगी में कतौ सं उजाला के कोई गुंजाइश नहि छल ।
अचानक एक दिन एक पैघ इंजीनियरक रिश्ता ओहि आन्हर लड़की के घर आयल । एतबे नहि लड़का स्वयं ओकर घरवाला सं ओकर हाथ मांगs, अपन माँ-बाप के संग आयल छल । घरवाला मने-मन बहुत खुश भs रहल छलाह किे बैसले-बैसल हुनका अपन आन्हर लड़की के लेल लड़का भेट गेलनि, लेकिन लड़की एहि बात सं काफी दुःखी छल । शायद एहि लेल कि ओ ककरो ज़िन्दगी खराब नहि करs चाहैत छल । एहि लेल ओ लड़का के अन्दर बजौलक आ कहलक कि हम आन्हर छी । अहाँ के घरक कोई काज हम नहि कs पायब, अहाँ के हमरा सं कोई सुख नहि भेंटत । अहाँ एक इंजीनियर छी, एहि लेल अहाँ के तs एक सं बढ़ि कs एक लड़की भेटि जायत । अहाँ प्लीज़ अपन ज़िन्दगी खराब नहि करु । एहि पर ओ लड़का आगू बढ़ल आ घुटना के बल बैसि कs लड़की के हाथ पकड़ि कs बाजल :
प्लीज़, अहाँ एहि विवाह के लेल ” हाँ ” कहि कs हमरा हमर प्रायश्चित कs लेेबs दियs । हम वैह छी जे अहाँ के ज़िन्दगी वीरान कैलौं आ आइ हम प्रायश्चित करs चाहैत छी । प्लीज, मना नहि करब । ई सुनि कs ओ लड़की कानs लागल, ई सोचि कs नहि कि ओकर ज़िन्दगी खराब करs वाला ओकरे सं विवाह करs चाहैत छल, बल्कि ई सोचि कs कि एहि दुनिया में एहनो लोक अखनो छैथ, जे अपन गलती के स्वीकार करs जानैत छैथ।
