रामचरितमानस मोतीः दुष्टक वन्दना
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती ३. दुष्ट लोकक वन्दना महाकवि तुलसीदास जखन रामचरितमानस जेहेन महाकाव्यक रचना करब आरम्भ कयलनि त ओ सर्वप्रथम देवता लोकनि केँ निहोरा-पाती करैत गुरु केँ निहोरा कयलनि, पुनः ब्राह्मण आ संत सब केँ निहोरा कयलनि आ आब नम्बर अछि शत्रु प्रवृत्तिक दुष्ट सभक। आउ देखी महाकविक भाव … रामचरितमानस मोतीः दुष्टक वन्दना







