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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्यायः रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्याय रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न ।चौपाइ। रावण मन मन मानल हारि । महि नहि रहल शूर शक्रारि ॥१॥ मारुत-सुत-बल हृदय विचारि । जनिक मुष्टि शत-अशनि प्रहारि ॥२॥ शुक्रक निकट गेला अति दीन । बद्धाञ्जलि राजस-रस-हीन ॥३॥ शुक्र पुछल मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड दसम अध्यायः रावणक शुक्राचार्य सँ मंत्र लय साधना करब तथा राम द्वारा विघ्न

विराटनगर मे काली पूजनोत्सवक सफलतम् ६ वर्ष पूर्ण

विराटनगर मे काली पूजाक छठम् वर्ष अप्पन ब्राह्मण समाज विराटनगर अपन स्थापना वर्ष २०१९ ई. सँ निरन्तर विराटनगर मे काली पूजा मनेबाक पुनीत काज करैत आबि रहल अछि । सर्वसमाज आ सर्वहित-सर्वमानव कल्याण निमित्त सुन्दर संकल्प संग ई आयोजन कयल जाइछ । एहि वर्ष २०२४ मे आचार्य धर्मेन्द्रनाथ मिश्र द्वारा एहि भावक संकल्प पूजा संकल्पकर्त्ता विराटनगर मे काली पूजनोत्सवक सफलतम् ६ वर्ष पूर्ण

विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ

१. ३१ अक्टूबर २०२४, विराटनगर (दीपावली पाबनि दिन सँ शुभारम्भ) वन्दना – महाकवि विद्यापति नन्दक नन्दन कदम्बक तरु-तर धिरे धिरे मुरलि बजाव ।१। समय सँकेत-निकेतन बइसल बेरि बेरि बोलि पठाव ॥२॥ सामरि, तोरा लागि अनुखन विकल मुरारि ।३। जमुनाक तिर उपवन उदबेगल फिरि फिरि ततहि निहारि ॥४॥ गोरस बेचए अबइत जाइत जनि जनि पुछ बनमारि विद्यापतिक पदावली आ ओकर सहज भावार्थ

मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय: मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध ।जयकरी छन्द। कहल विभीषण समय-विचार । प्रभु सर्व्वज्ञ कयल स्वीकार ॥१॥ लक्ष्मण काँ कहलनि अहँ जाउ । खल बधि समर अमर बनि आउ ॥२॥ हनुमदादि यूथप सङ्ग रहथि । सन्मुख तनिक प्रहार जे मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – नवम अध्याय: मेघनादक तान्त्रिक साधना मे बाधा तथा ओकर वध

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड आठम अध्यायः कुम्भकर्णक वध

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – आठम अध्याय कुम्भकर्णक वध ।सोरठा। शुनल वचन लङ्केश, कुम्भकर्ण समुचित कहल ॥१॥ मानल हृदय कलेश, क्रोधातुर चहलनि उठय ॥२॥ शिखइक नहि अछि ज्ञान, बजबाओल से काज करु ॥३॥ जाउ जौँ मन किछु आन, करु सुषुप्ति निद्रा-विकल ॥४॥ भावार्थः कुम्भकर्णक कहल उचित वचन रावण सुनलक मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड आठम अध्यायः कुम्भकर्णक वध

मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड सातम अध्यायः रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिलाभाषा रामायण लङ्काकाण्ड – सातम अध्याय रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार ।चौपाइ। ललकि उठल रावण खिसिआय । कालनेमि-मुह गेल सुखाय ॥१॥ रामचन्द्र मे तोहरा प्रीति । के न कहत थिक बहुत अनीति ॥२॥ अभिप्राय हमरा किछु आन । ई शिखबय लगला अछि ज्ञान ॥३॥ करह करह गय मिथिलाभाषा रामायण – लङ्काकाण्ड सातम अध्यायः रूपमालीक कथा, हनुमानद्वारा कालनेमि राक्षसक संहार

हिन्दीक महत्व आ मैथिलीक कमजोरी

आदरणीय श्रेष्ठजन दिलीप भाइसाहब ! अपनेक चिन्तनयुक्त पोस्ट जाहि मे मैथिली लेल चिन्ता छल आ हिन्दी प्रयोगक आधिक्यक प्रतिकार, हमर ध्यानाकर्षण कयलक । किछु लिखबाक इच्छा जागि गेल जे निम्न अछि । संसार मे सभक अपन गति छैक । सब अपना हिसाब सँ एकटा मार्ग सुनिश्चित करैत अछि आ तदनुसार जीवन मे अग्रसर भेल करैत हिन्दीक महत्व आ मैथिलीक कमजोरी

मान इन्टरनेशनल अवार्ड लेल नोमिनेशन कार्य शुरू

विज्ञापन किछु अलग आ नव प्रयास   बन्धुगण!   मैथिली एसोसिएशन नेपाल विराटनगर द्वारा आगामी ३० नवम्बर २०२४ एकटा महत्वपूर्ण आयोजन राखल गेल अछि । प्रयास ई अछि जे मैथिलीभाषी संग सहयात्रा मे रहल अन्य भाषाभाषी केँ अवार्ड प्रदान करैत मैथिली संग जोड़ल जाय । संलग्न पोस्टर मे विस्तृत जानकारी देल गेल अछि । अहाँ मान इन्टरनेशनल अवार्ड लेल नोमिनेशन कार्य शुरू

शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली

लेखः शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली – रमण कुमार सिंह हालहि में केंद्र सरकार मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया आ बंगाली कें ‘शास्त्रीय भाषा’ केर दर्जा देलकै, जाहि सं भारत मे शास्त्रीय भाषाक संख्या बढ़िकें 11 भ गेल अछि । शास्त्रीय भाषाक दर्जा पाबै के दौड़ मे मैथिली सेहो छल, जेकरा तकनीकी कारणवश शास्त्रीय शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली

प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वस्थ आ सार्थक होयबाक जरूरत

ई बात एना बुझियौक प्रतिस्पर्धा स्वस्थ आ सार्थक होयब परम जरूरी होइत छैक । याद करू त ! बच्चा उम्र सँ विद्यालय-महाविद्यालय धरिक पढ़ाइ व खेल मे कि सिखायल गेल अहाँ केँ ? ध्यान देबय त देखबय जे मात्र प्रतिस्पर्धा करब सिखायल जाइछ हमरा – अहाँ केँ । जी, प्रतिस्पर्धाक अर्थ भेल जे केकर माथ-मन-बुद्धि-ज्ञान-कर्म-प्राण प्रतिस्पर्धा हमेशा स्वस्थ आ सार्थक होयबाक जरूरत