लेखः शास्त्रीय भाषाक दर्जा सं कियै चूकि गेल मैथिली
– रमण कुमार सिंह
हालहि में केंद्र सरकार मराठी, पाली, प्राकृत, असमिया आ बंगाली कें ‘शास्त्रीय भाषा’ केर दर्जा देलकै, जाहि सं भारत मे शास्त्रीय भाषाक संख्या बढ़िकें 11 भ गेल अछि । शास्त्रीय भाषाक दर्जा पाबै के दौड़ मे मैथिली सेहो छल, जेकरा तकनीकी कारणवश शास्त्रीय भाषाक दर्जा नहि भेट सकल, जाहि सं स्वाभाविक रूप सं मैथिली भाषा प्रेमी सब मे नाराजगी अछि । मैथिली कियै चूकि गेल एहि पर विचार करय सं पहिने हम सब ई जनि ली जे कोनो भाषा कें शास्त्रीय भाषा के दर्जा देबा लेल चारि टा मानदंड निर्धारित अछि – एकर अवलोकन करब सर्वप्रथम आवश्यक अछि ।
असल मे शास्त्रीय भाषाक पहिचाने आ ओकर घोषणाक शुरुआत वर्ष 2004 में भेल छल । नवंबर 2004 मे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा गृह मंत्रालय के दिस सं शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबय खातिर प्रस्तावित भाषाक पात्रताक जांच करय लेल एकटा भाषा विशेषज्ञ समिति (Language Expert Committee) केर गठन कैल गेल छल । गृह मंत्रालय एहि काजक जिम्मेदारी संस्कृति मंत्रालय कें सौंपलक आ संस्कृति मंत्रालय साहित्य अकादेमीक माध्यमे एहि काज कें आगू बढ़ौलक ।
ई सब बात बहुत रास लोक कें बूझल नहि छनि । तें शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबाक घोषणा केंद्रीय मंत्रिमंत्रल द्वारा होइत छैक । साहित्य अकादेमी के पदेन अध्यक्ष एहि भाषा विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष होइत छैक, चाहे ओ साहित्यकार होथि अथवा भाषाविद् । संयोग सं ताहि समय मे गोपीचंद नारंग साहित्य अकादेमीक अध्यक्ष छलाह, जे संयोग सं भाषाविद सेहो छलाह । एहि समिति मे साहित्य अकादेमी के तत्कालीन अध्यक्ष प्रोफेसर गोपीचंद नारंग, हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी.एच. कृष्णमूर्ति, प्रख्यात भाषाविद् आ मैथिलीक कवि-नाटककार उदय नारायण सिंह नचिकेता शामिल छलाह । बाद मे एहि समितिक कैल गेल आ एहि में आरो अनेक प्रतिष्ठित भाषाविद् आ शिक्षाविद् कें शामिल कैल गेल । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित ई शास्त्रीय विद्वान लोकनि वर्ष 2004 मे बहुत विचार-विमर्श केलाक बाद एहि लेल मानदंडक निर्धारण केलनि, जाहि में चारिटा बिंदु प्रमुख छल –
1 – उच्च पुरातनता: भाषा मे प्राचीन ग्रंथ या दर्ज इतिहास हेबाक चाही, जे 1,500-2000 साल सं बेसी पुरान हो ।
2 – मूल्यवान विरासत: प्राचीन साहित्य या ग्रंथ सभक एकटा महत्वपूर्ण संग्रह हेबाक चाही, जेकरा ओहि भाषाकें बोलय बलाक पीढ़ी द्वारा संरक्षित आ मूल्यवान मानल गेल अछि ।
3 – मौलिकता: भाषा मे एकटा अलग आ मूल साहित्यिक परंपरा हेबाक चाही, जे कोनो आन भाषा समुदाय सं उधार नहि लेल गेल हुअय ।
4 – आधुनिक रूप सं अलग : शास्त्रीय भाषा आ ओकर आधुनिक रूप केर बीच स्पष्ट अंतर हेबाक चाही । प्राचीन आ बादक भाषा रूप के बीच स्पष्ट असंतुलनक संग यानी शास्त्रीय भाषा आ ओकर बादक रूप या ओकर शाखाक बीच एकटा सातत्य-विच्छेद भ सकैत अछि ।
एकर अलावे कोनो भाषा कें शास्त्रीय भाषक दर्जा दियाबै लेल संबंधित भाषा वाला राज्य सरकार दिस सं केंद्र सरकारक गृह मंत्रालय कें अपन अनुशंसाक संग प्रस्ताव भेजय पड़ैत छैक । केंद्रीय गृह मंत्रालय ओहि प्रस्ताव कें साहित्य अकादेमी के तहत भाषा विशेषज्ञ समिति कें प्रस्ताव पर विचार करय लेल पठबैत छैक । भाषा विशेषज्ञ समिति विचार कयलाक बाद उक्त मानदंड पर भाषा कें परखै छै, आ तकर बादे भाषा कें शास्त्रीय भाषाक मान्यता देबाक अनुशंसा करैत छैक, जेकरा केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी देल जाइ के बाद शास्त्रीय भाषाक मान्यताक प्रक्रिया पूरा होइत छैक ।
आब सवाल उठैत अछि जे मैथिली कतय चूकि गेल कियैक तं हरेक दृष्टि सं ई शास्त्रीय भाषाक दर्जा पाबै के पात्रता रखैत अछि।
मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा दियाबै लेल मैथिली साहित्य संस्थान, पटना केर सचिव भैरव लाल दास करीब 300 पृष्ठक एकटा प्रस्ताव तैयार केलनि, जाहि मे ऐतिहासिक, पुरातात्विक, शिलालेख, पांडुलिपि आदि अनेक साक्ष्यक उल्लेख कैल गेल अछि । निश्चित रूप सं एहि लेल भैरव लाल दास धन्यवादक पात्र छथि, जे ओ पहल केलनि । मुदा जाहि तरह सं असमिया आ बांग्ला भाषा लेल महत्वपूर्ण साक्ष्यक संग अपन दावेदारी में मजगूत आ नवीन तर्कक संग साक्ष्य प्रस्तुत कैल गेल, ओहन तर्क आ साक्ष्यक एहि में कमी देखल गेल । एहन हैब स्वाभाविको छल, कियैकि मैथिली लेल प्रस्ताव एक एसगर व्यक्ति तैयार कयने छल, जखन कि असमिया आ बांग्ला भाषा लेल प्रस्ताव तैयार करै खातिर दुनू राज्य सरकार द्वारा एकटा समितिक गठन कैल गेल छल, जे दू सं ढाई हजार पृष्ठक प्रस्ताव तैयार केलक ।
एहि प्रसंग मे एकटा गलत तथ्य प्रचारित कैल जा रहल अछि, जे बिहार सरकार मैथिली भाषा कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबा लेल केंद्र सरकार सं अनुशंसा कयने छल । एकर साक्ष्य ई अछि, जे बिहार विधान परिषदक 207म् सत्र मे डॉ. मदन मोहन झा केर तारांकित पश्न संख्या – 135 के 26 जुलाई, 2024 कें जवाब दैत शिक्षा मंत्री श्री सुनील कुमार कहलनि जे, “शिक्षा विभाग मैथिली भाषा को क्लासिकल लैंग्वेज के रूप में अधिसूचित करने के निमित्त केंद्र सरकार से अनुरोध करने की नियमसंगत कार्रवाई पर विचार करेगी ।”
स्पष्ट अछि, जे कोनो सरकारी कामकाज के एकटा विहित प्रक्रिया होइत छैक, ओकर बिनु आगूक काज पूरा नहि होइत छैक । मैथिलीक संदर्भ मे बिहार सरकार दिस सं कोनो अनुशंसा नहि कैल गेल छलै आ नहि मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा देबाक अनुरोध कैल गेलै । एहना मे मैथिलक संदर्भ मे बिहार सरकार सं कोनो अनुशंसा नहि भेटबाक कारण मैथिली पर विचार करय खातिर केंद्रीय गृह मंत्रालय भाषा विशेषज्ञ समिति कें मैथिलीक प्रस्ताव नहीं पठौलक । यैह कारण भेल, जे भैरव लाल दास द्वारा भेजल गेल प्रस्ताव पर चर्चा तं भेल, मुदा ओकरा निर्धारित प्रक्रिया पूरा नहि हेबाक कारण खारिज क देल गेल आ मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा नहि भेट सकल ।
आब मैथिली मे एकटा खास गिरोह अछि, जे साहित्य अकादेमी मे मैथिलीक वर्तमान संयोजक उदय नारायण सिंह नचिकेता कें बदनाम करबाक षड्यंत्र चला रहल अछि, कियैकि ओहि गिरोह के दलाली पर अंकुश लागि गेल अछि । ओ सब ई झूठ प्रचारित क रहल अछि, जे ओ भाषा विशेषज्ञ समितिक बैठक मे बांग्ला के पैरवी केलनि, मैथिली के नहि । जखन कि हुनक मैथिली प्रेम आ मैथिली खातिर हुनक परिवार के योगदान किन्नहु बिसरल नहि जा सकैत अछि ।
अगर मैथिलीक प्रस्ताव लेल बिहार सरकार दिस सं अनुशंसा गेल रहितय, तं निश्चित रूप सं मैथिली कें आइ शास्त्रीय भाषा के दर्जा भेटल रहितय । विशेषज्ञ समिति लग बांग्ला या मैथिली मे सं कोनो एक भाषाक चयन करबाक बाध्यता नहि छल । ओ लोकनि एहि दुनू भाषाक चयन क सकैत छलाह । भाषा विशेषज्ञ समिति के सदस्य हेबाक मतलब ई नहि होइत छैक, जे अहां निर्धारित प्रक्रिया के बाइपास क दी । एहन तरहक फालतू गप केला सं कोनो फायदा नहि आ अपन भाषाक विशिष्ट विद्वानक धैर्य आ सहनशीलताक परीक्षा लेब आ हुनका बदनाम करब उचित नहि अछि ।
तें हमर मानब अछि जे आब परस्पर दोषारोपण करब ठीक ओहिना अछि, जेना सांप के बिल मे घुसि गेला पर डंडा पटकब । मैथिली कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा भेटब कोनो पैघ गप नहि अछि, बस एहि लेल जरूरी अछि, जे भाषा विशेषज्ञक एकटा टीम मिलिकें ओहि लेल तथ्य, साक्ष्य आ नव तर्कक संग फेर सं एकटा विस्तृत आ दमदार प्रस्ताव तैयार करय । एहि लेल समय, श्रम, समांग आ वित्तीय संसाधनक जरूरत होयत, जाहि मे मैथिली सेवी संस्थान सब आगां आबि सकैत अछि । ई उकटा-पैंची करबाक नहि, अपितु एहि दिशा मे संकल्पित भ कें काज करबाक क्षण अछि । किछुए मास बाद बिहार मे विधानसभाक चुनाव होबय बला अछि आ ई एकटा पैघ चुनावी मुद्दा बनि सकै अछि । एहि खातिर मैथिली भाषी लोक कें राज्य सरकार पर दबाव बनेबाक चाही, जे ओ जल्दी सं जल्दी केंद्र सरकार कें मैथिली भाषा कें शास्त्रीय भाषाक दर्जा दियाबै खातिर अनुशंसा आ अनुरोध करय ।
एखन केंद्र आ राज्य मे समान विचारधारा वाला पार्टीक सरकार अछि, तें समय अनुकूल अछि । भाषा विशेषज्ञ समिति मे शामिल मैथिली भाषी विद्वान कें बदनाम करय आ हुनका शास्त्रीय भाषक दर्जा नहि दियाबै खातिर जिम्मेदार ठहरायब एकटा कुत्सित षड्यंत्र अछि, जाहि सं कोनो फायदा नहि होइ बला अछि । एकरा खातिर सही दिशा मे संगठित प्रयास करबाक जरूरत अछि ।
(लेखक साहित्य अकादेमी नई दिल्लीक परामर्शदाता समितिक सदस्य छथि आ आधिकारिक जानकारीक संग मैथिली जिन्दाबाद पर प्रकाशनार्थ ई लेख पठौलनि अछि ।)
