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प्रवीण नारायण चौधरी

भगवानक दर्शन (मननीय लेख – हिन्दी-अंग्रेजी अनुवाद सहित)

लेख-विचार – प्रवीण नारायण चौधरी भगवान् धरि पहुँचब सहज अछि हम सब भगवान् मे विश्वास करैत छी । ई हमरा सभक बौद्धिक कल्पना थिक । जखन हमरा सब केँ एतेक अनुभव भेटैत अछि जे हम सब अपना केँ आ अपन परिवेश केँ नीक जेकाँ बुझय लगैत छी, तखनहि हमरा सब केँ स्वतः भगवान् धरि पहुँच भगवानक दर्शन (मननीय लेख – हिन्दी-अंग्रेजी अनुवाद सहित)

गाजापट्टी मे मानव समुदायक त्रासदीपूर्ण अवस्था

गाजापट्टीक त्रासदीपूर्ण दृश्य काल्हि BBC News वा एकर अनुसांगिक अन्य पेज सब पर कतहु गाजा सिटीक आम लोकक त्रस्त जीवनक दुखद वृत्तान्त सब पढ़िकय हमर मन अत्यन्त व्याकुल भ’ गेल । हम सोच मे पड़ि गेलहुँ जे हम मानव अपन ईगो आ वर्चस्व लेल आमलोकक जीवन मे कतेक पैघ त्रासक प्रसार करैत छी जे आइ गाजापट्टी मे मानव समुदायक त्रासदीपूर्ण अवस्था

अहुँ सभक गाम-ठाम मे एहिना होइत अछि की ?

छगुनता ई पोस्ट लिखैत दुःख सेहो होइत अछि, लाजो लगैत अछि आ चुप रहला सँ दोषक भाव सेहो अबैत अछि । दुःख आ लाज केँ पचाकय दोष नहि लागय तेँ लिखि रहल छी । हमर मिथिला समाजक बहुत पैघ आबादी मे ‘धी-बेटी’ सब केँ देखैत छी ‘डीजे गाड़ी’ के पाछू ठाढ़ भ’ अपन भाइ-बहिनक विवाह अहुँ सभक गाम-ठाम मे एहिना होइत अछि की ?

वैदिक धर्म ओ प्रामाणिक ग्रंथ

‘द वेदाज’ नामक पोथी सँ एक गोट महत्वपूर्ण लेख – मैथिली जिन्दाबाद केर पाठक लेल  मूल लेखकः श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती (काञ्चीपीठक ५९वाँ शंकराचार्य) – भावानुवादः प्रवीण नारायण चौधरी वैदिक धर्म पर प्रामाणिक ग्रंथ आइ विभिन्न विषय सब पर अनेकों पुस्तक सब उपलब्ध अछि । प्रत्येक धर्म पर अनेकों पुस्तक सब अछि । हालांकि, प्रत्येक धर्म वैदिक धर्म ओ प्रामाणिक ग्रंथ

बुद्ध धर्म आ हिन्दू समाज – श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती (शंकराचार्य) केर एक बेहतरीन लेख

Buddhism and Hindu Society To me it is clear that at no time in India did people practice Buddhism in toto though they respected Gautam Buddha as a great personage. Today, there are many who have joined a movement called the “Theosophical Movement”. Nevertheless, many of them continue to celebrate the festivals just like Hindus. बुद्ध धर्म आ हिन्दू समाज – श्री चन्द्रशेखरेन्द्र सरस्वती (शंकराचार्य) केर एक बेहतरीन लेख

बुद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा

Buddhism And Other Schools of Thought – Shri Chandrashekharendra Saraswati (in his book ‘The Vedas’) बौद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा शंकराचार्य एवं बौद्ध धर्म बहुतो लोक एहेन छथि जे कहैत छथि कि एहि देश सँ बुद्ध धर्म केँ भगेबाक काज आदि शंकराचार्य द्वारा कयल गेल छल – कारण ओहि आस्थाक निन्दा छल । ई गलत बुद्ध धर्म एवं अन्य विचारधारा

महाकवि विद्यापतिक भावपूर्ण रचना – नखशिख मे श्रीकृष्णक नायिका राधाक यौवन वर्णन

नखशिख महाकवि विद्यापतिक एकटा आर भावपूर्ण रचना ‘नखशिख’ – नायिका (राधाक) सुन्दरताक वर्णन करैत प्राप्त भेल अछि । हम कमजोर छात्र छी, परञ्च पढ़बाक जिद्द अछि । रामवृक्ष बेनीपुरी जेहेन महान् रचनाकार केर सम्पादित ‘पदावली’ सँ मदति लैत ई सुन्दर सन रचना अपन पाठक सब लग परोसैत छी । पढ़ब आ भावविह्वल बनब तेकर गारन्टी महाकवि विद्यापतिक भावपूर्ण रचना – नखशिख मे श्रीकृष्णक नायिका राधाक यौवन वर्णन

अनुगूंज के पाँचम आ अन्तिम प्रस्तुति रिलीज भेल

“अनुगूँज” शृंखलाक पाँचम और अंतिम प्रस्तुति! भोजपुरी पारंपरिक लोकगीत “मोरा जोगिया” औघरदानी, देवक देव महादेव कें समर्पित एक भावपूर्ण भजन अछि । ई सिर्फ एक गीत नहि, बल्कि अपन पारिवारिक विरासतक अभिन्न अंग अछि । एक परंपरा जे पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रवाहित होइत रहल अछि आ आइयो अपन हृदय में गुंजि रहल अछि । अंजनी कुमार चौधरी अनुगूंज के पाँचम आ अन्तिम प्रस्तुति रिलीज भेल

साहित्यकार तथा पत्रकार अर्चना झा ‘सीता’क उपाधिसँ सम्मानित

अप्रैल ४, २०२५ । मैथिली जिन्दाबाद!! ललितपुर, २० वैशाख २०८१ । ‘सीता जन्ती’क अवसरमे मैथिली ‘अर्चनाकृत रामायण’क लेखिका एवं पत्रकार अर्चना झाकेँ मन्त्रीद्वारा ‘सीता’ उपाधि सहित सम्मान कयल गेलनि अछि । मिथिला संस्कृति समाजद्वारा एहि वर्ष मैथिली ‘अर्चनाकृत रामायण’ केर लेखिका साहित्यकार एवं राष्ट्रिय समाचार समितिक पत्रकार अर्चना झा तथा काठमांडू जिल्ला अदालतकेर न्यायाधीश मोना साहित्यकार तथा पत्रकार अर्चना झा ‘सीता’क उपाधिसँ सम्मानित

नेपाली छन्दकविक मैथिली लेल शुभकामनाः ‘प्रिय बनोस्’

छन्दकवि रोहिणी रसिकजीक एकटा नेपाली कविता नेपालक राष्ट्रभाषा नेपाली भाषाक बाद मैथिली सर्वाधिक प्रयोग कयल जायवला भाषा थिक । मैथिलीभाषी समुदाय व नेपालीभाषी समुदाय सैकड़ों वर्ष सँ एक संग – एक संयुक्त समाज व राष्ट्र निर्माण कय केँ आपस मे मैत्रीभाव संग रहैत आबि रहल अछि । साविक मे मिथिला सँ तिब्बत केर बाट मे नेपाली छन्दकविक मैथिली लेल शुभकामनाः ‘प्रिय बनोस्’