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अहुँ सभक गाम-ठाम मे एहिना होइत अछि की ?

421 भ्यूज

छगुनता

ई पोस्ट लिखैत दुःख सेहो होइत अछि, लाजो लगैत अछि आ चुप रहला सँ दोषक भाव सेहो अबैत अछि । दुःख आ लाज केँ पचाकय दोष नहि लागय तेँ लिखि रहल छी ।

हमर मिथिला समाजक बहुत पैघ आबादी मे ‘धी-बेटी’ सब केँ देखैत छी ‘डीजे गाड़ी’ के पाछू ठाढ़ भ’ अपन भाइ-बहिनक विवाह मे नाचैत । गीतक बोल रहैत अछि “ले चली घुमाबऽ बुलेट पऽ जीजा’, आर एहि पर बेतरतीब ढंग सँ अभद्र-अश्लील शारीरिक अंग-प्रत्यंग केँ हिलबैत, मुंहकान मटकबैत, मुंह-ठोर पटपटबैत अजीब तरीका सँ नचैत देखैत छी । सारा समाज मूकदर्शक बनिकय चेहरा पर अजीबोगरीब मुस्कान आ हृदय मे अलगे भाव जे देखू फलम्माक बेटी केना नाचि रहल अछि… छौंड़ा माँरड़ि सब पिहकारी मारि रहल रहैत अछि, कतहु-कतहु त ओहो सब छौंड़ी-मौगीक नाच मे ओतबे सहभागी बनल रहैत अछि…. ।

उपरका गीत सऽ आर बेतरतीब भाषा-भाव आ सन्देश दयवला खतरनाक भोजपुरी गीत सब खुलेआम प्रयोग कयल जा रहल अछि । पहिने लोक बेटी-बेटाक विवाह या आने कोनो शुभ प्रयोजन मे ‘एलय शुभे के लगनमा शुभे हे शुभे’ या बाबा-पुरखाक नाम लय-लयकय गीत गाबय, भगवान्-भगवतीक गीत गाबय, अवसरक विशेष भाव प्रकट करैत गीत गाबय जेना विवाहक महत्व, विदागरीक महत्व, सासुर-नैहरक महत्व, मनुष्य जीवनक महत्व – ई सब मिथिलाक लोक परम्परा मे छल । लेकिन एकर जगह आइ ध्वनि प्रदूषण आ अत्यन्त अश्लील शब्द-भाव जेकरा खुलिकय बाजलो तक नहि जाइछ से गीत गायल जा रहल अछि ।

कियो केकरो हंटि-दबाड़ि नहि सकैत अछि । गार्जियनशिप नहि रहि गेल । माय-बाप सब अपन सन्तानक उग्रता आ उताहुलताक आगाँ बेवश भ’ गेल देखाइछ । आब कहू जे गन्तव्य कि प्राप्त होयत एहि तरहक स्थिति-परिस्थिति सँ ?

हरिः हरः!!

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