रामचरितमानस मोतीः भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध १. लक्ष्मणजी, श्री रामचंद्रजी और सीताजी देवता लोकनिक वाणी सुनि बहुते सुख पओलनि जेकर वर्णन नहि कयल जा सकैत अछि। एम्हर भरतजी समूचा समाजक संग पवित्र मंदाकिनी मे स्नान कयलनि। पुनः सब लोक केँ नदीक … रामचरितमानस मोतीः भरतजीक मन्दाकिनी स्नान, चित्रकूट पहुँचनाय, भरतादि सभक परस्पर मिलाप, पिताक शोक आर श्राद्ध


