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वैदिक पद्धतिक ज्ञाता भ’ रिति पुर्वक संस्कार कें निर्वहन करब ब्रह्माणक संस्कार थिक

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लेख विचार
प्रेषित: कीर्ति नारायण झा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- ब्राह्मण एवं हुनक संस्कार

मिथिलाक ब्राह्मण आ हुनक संस्कार
​मिथिलाक संस्कृति आ सभ्यता पूरा विश्व मे अपन एकटा विशिष्ट स्थान रखैत अछि। एहि संस्कृति केँ जीवंत आ अक्षुण्ण रखबा मे मिथिलाक ब्राह्मण आ हुनकर संस्कारक पैघ योगदान अछि। मैथिल ब्राह्मणक जीवन जनम सँ लय क’ मरण धरि वेदोक्त रीति-रिवाज आ संस्कार सँ बनल अछि।
​शास्त्र के अनुसार मानव जीवन मे १६ टा मुख्य संस्कार होइत छैक , मुदा मैथिल ब्राह्मणक जीवन मे किछु संस्कारक विशेष आ भव्य आयोजन कएल जाइत अछि: जेना
​मुंडन संस्कार, एहि मे बच्चाक पहिल बेर केस छिलाओल जाइत छैक। मिथिला मे एहि अवसर पर भगवतीक स्थान वा कुलदेवीक स्थान पर जा क’ पूजा आ सोहर गाबय क’ परम्परा अछि।
​उपनयन संस्कार: मैथिल ब्राह्मणक लेल ई सब सँ महत्वपूर्ण संस्कार अछि। एहि दिन सँ बालक के उप नयन अर्थात दोसर आँखि खुजि जाइत छैन्ह संगहि हुनका गायत्री मंत्रक दीक्षा देल जाइत अछि। उपनयन मे ‘मटकोर’, ‘भिक्षाटन’ आ ‘भोज भात ‘ के’ बड़ सुंदर विधान अछि।
​विवाह संस्कार: मिथिलाक विवाह अपन अनुपम परम्पराक लेल प्रसिद्ध अछि। एहि मे ‘सिद्धांत’ जाहि मे पंजीकार द्वारा कुल गोत्र मिलाओल जाइत छैक एकर अतिरिक्त ‘मातृका पूजा, ‘कन्यादान’, ‘सोहाग ‘, आ ‘चतुर्थी’ क’ विधि होइत छैक ।
​श्राद्ध संस्कार: पितर लोकनिक प्रति श्रद्धा निवेदित करबाक लेल आ हुनका मोक्षक लेल ई संस्कार पूर्ण वैदिक विधि सँ कएल जाइत अछि।
​मैथिल ब्राह्मणक दैनिक जीवन आ संस्कार हुनकर पाबनि-तिहार सँ गहीर रूप सँ जुड़ल अछि। ‘मधुश्रावणी’ (नवविवाहिता सभक लेल नाग-नागिनक पूजा), ‘कोजागरा’ (मखान बतासा आ पान वितरण), ‘चौरचन’ (चन्द्रमाक पूजा), आ ‘साम-चकेवा’ जकाँ पाबनि तिहार मिथिलाक संस्कारक सुंदरता केँ दर्शाबैत अछि।

​मैथिल ब्राह्मणक संस्कार मात्र कर्मकांड नै अछि, बल्कि ई जीवन जीबाक एकटा उत्कृष्ट पद्धति अछि। ई संस्कार मनुष्य केँ अनुशासन, समाज केँ प्रति उत्तरदायित्व आ प्रकृतिक संग सामंजस्य बना क’ रहब सिखबैत अछि। आधुनिक समय मे सेहो मैथिल ब्राह्मण अपन एहि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आ संस्कार केँ गर्व सँ बचएबाक लेल प्रयासरत छैथि।

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