लेख विचार
प्रेषित: प्रियंका कर्ण
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय :- “मिथिलाक व्यंजन एवं ओकर महत्व”
- मिथिलाक हरेक व्यंजन स्वादिष्ट, अनमोल होइत अइछ।तेल,मसाला सब एक मूदा मिथिलानीक हाथक स्वाद अलग।
हरेक पावैन-तिहार मे ओई अनुसार के व्यञ्जन, पाहुन-परख एला पर ओइ अनुसारक व्यञ्जन बनेनाइ मिथिलाक बिशेषता अछि।
#दही, चुरा,चीनी,आमक अचार या पाकल आम पेट मे ठंडक, स्वाद अउर भरपुर नास्ता अछि जे मिथिलाक पारम्परिक नास्ता बुझल जाइत अछि। जे पाहुन-परख होइत या घरक व्यक्ति घर सँ बाहर जाय काल मे खाय क जाइत छलैथ।
#पावैन बिशेष:-# जुड़शीतल मे बरी, पुरी, सोहिजन के तरकारी, आमक चटनी,नियम स बनायल जाइत अइछ जेकर स्वास्थ्य स सेहो जोरल गेल अइछ।
#छैठ पावैन मे ठकुआ, भुसवा जे चढैत ठंडी के साथ गुँड़(मिठ्ठा)स शरीर मे गरमपना आबैत अइछ।
#माघक संक्रांति मे लाई,चुरलाई, तीलक लड्डु जे कि ठंडा महिना मे शरीर के लेल गरमाहट लाबैछै।
#होली मे पुआ पुरी मिठास संग खुशी के महत्व बतायल गेल अइछ।
#माछ जे कि मिथिला सबस बिशेष प्रकारक अउर शुभ के प्रतिक मानल गेल अछि। मिथिलाक कोबर होय या कोनो विध-व्यवहार सबकिछु मे माछक महत्व अछि।
भगवती के पातैर मे अपन संस्कार परक प्रकार सब मिथिला के विशेषता बताबैत अछि तँ विभिन्न तरहक तरुआ, तरकारी सब मिथिलाक बिशेष व्यञ्जन अछि।
