गाम घुरि आउ – मैथिली कविता
कविता – पंकज चौधरी, बलिया, मधुबनी गाम घुरि आउ बहुते दिन केलौं मेहनत मजूरी खूब कमेलैव देश-विदेश नै किछु हाथ लागल गामक सनेश हयौ, सुनु, गाम घुरि आउ! धिया पुता खूब पढेलहुँ, माय-बाबू के जगह मॉम-डैड सिखेलहुँ मातृभाषा छोड़ि अंग्रेजी सिखेलहुँ सोहारी छोड़ि पिज़्ज़ा खुएलहुँ हयौ, सुनु, गाम घुरि आउ! जे बाट छल कच्ची ओ … गाम घुरि आउ – मैथिली कविता







