रामचरितमानस मोतीः पतिक अपमान सँ क्षुब्ध सती द्वारा स्वयं शरीर केर परित्याग
स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती १८. पतिक अपमान सँ दुःखी भ’ सती के योगाग्नि सँ जरि गेनाय, दक्ष यज्ञ विध्वंस हमरा लोकनि विगत अध्याय मे सतीजीक अपन पिता दक्ष ओतय यज्ञ मे हुनक पति देवाधिदेव महादेव केर रोकलो उपरान्त जायब आ ओहि ठाम माता छोड़ि बाकी सभक द्वारा उपहास करबाक स्थिति देखि चुकल … रामचरितमानस मोतीः पतिक अपमान सँ क्षुब्ध सती द्वारा स्वयं शरीर केर परित्याग



