घनश्यामक प्रेम गीत
।। प्रेम गीत ।। – घनश्याम झा, राघोपुर, मनीगाछी, दरभंगा प्रेमक डोरि सँ बान्हि गैलौक, कि कहु हमहु किछु पावि गेलौक । प्रिय केर मधुर मुस्कान मोहि लेलक , ह्रदय केर विभोर कय झुमा देलक । गुलाबक पंखुरि सनक ठोर आहाँ केर , शावक मृग सनऽक नयन अछि । कोयलि सनक मिठगर बोली , बजतैह … घनश्यामक प्रेम गीत









