पलायनक दंश झेलि रहल मिथिला लेल ई पुण्यक काज मिलिजुलि करब आवश्यक
हाथ मे भेटल अवसर केँ रिक्त नहि जाय दियौक अहाँक एक उपकार उपकृत लेल आजीवन अविस्मरणीय होइछ, संगहि अहाँक जीवन मे एहि सँ पैघ आन कोनो उपलब्धि नहि होइछ। कहबाक तात्पर्य, आजुक व्यस्त संसार मे सब कियो अपन-अपन रोजी-रोजगार मे व्यस्त छी, बड मुश्किल सऽ केकरो किछु पल (समय) अपना सँ अतिरिक्त दोसरहु के … पलायनक दंश झेलि रहल मिथिला लेल ई पुण्यक काज मिलिजुलि करब आवश्यक








