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प्रवीण नारायण चौधरी

ब्रह्म सूत्र

ब्रह्म सूत्र हम पहिने कहने रही जे हरेक दर्शन सिद्धांत मे तीन गोट संयुक्त तत्त्व (विश्लेषण) होइत छैक, अर्थात् सूत्र, भाष्य आ वार्तिक । अपन देश मे शंकर, रामानुज, माधव, श्रीकांत (शैव सिद्धांत आचार्य) आर अन्य द्वारा प्रतिपादित विभिन्न सिद्धांत सब केँ वेदांत मत या वेदांतिक धर्म केर सामान्य नाम सँ जानल जाइत अछि । ब्रह्म सूत्र

उपनिषद – वेदक अन्तिम फल – सुयोग्य लेल मात्र रहस्योद्घाटन करैछ – वेदान्त बनबैछ

उपनिषद उपनिषद आरण्यक केर अन्त मे अबैत अछि । यदि संहिता केँ एकटा वृक्षक समान मानल जाय, तँ ब्राह्मण ओकर फूल थिक तथा आरण्यक ओकर फल थिक जे अपरिपक्व (बिनु पाकल) अबस्था मे अछि, जखन कि उपनिषद पाकल फल थिक । ज्ञानमार्ग द्वारा परमात्मा आ आत्मा केर अद्वैत (अभेद) केँ प्राप्त करबाक प्रत्यक्ष विधि उपनिषद उपनिषद – वेदक अन्तिम फल – सुयोग्य लेल मात्र रहस्योद्घाटन करैछ – वेदान्त बनबैछ

चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण

चारि वेद “अनन्तावै वेदाः” – “वेद अनन्त अछि”, लेकिन ऋषिगण हमरा सभक लेल एहि असीम वेद मे सँ मात्र किछुए मंत्र सब संकलन कय (पकड़ि) सकल छथि । ई मंत्र हमरा सब लेल एहि लोक मे सुख आ परलोक मे मोक्षक संग-संग सर्वजन (सम्पूर्ण ब्रह्माण्डक) कल्याण लेल पर्याप्त अछि । यद्यपि हम सब वेद केँ चारि वेद – अनन्त वेदक मुख्य शाखा एवं उपशाखा पर संछिप्त विश्लेषण

यज्ञ – परमात्मा धरि पहुँचबाक समुचित रीति – यज्ञक अनिवार्यता आ औचित्य पर प्रकाश

यज्ञ वेदक अनेकों गुण मध्य सँ ‘यज्ञ’ या वैदिक अनुष्ठान एकर एकटा महत्वपूर्ण पक्ष थिक । यज्ञ मे वेद मंत्र सभक संग अग्निक सहायता सँ निर्धारित अनुष्ठान करब शामिल अछि । यज्ञ मूल शब्द ‘यज’ सँ बनल अछि, जेकर अर्थ अछि पूजा कयनाय – बलिदान कयनाय । परमात्मा आ देवता सभक प्रति समर्पण केर भावना यज्ञ – परमात्मा धरि पहुँचबाक समुचित रीति – यज्ञक अनिवार्यता आ औचित्य पर प्रकाश

वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

वेद अनन्त अछि यदि सम्पूर्ण सृष्टि आ सृष्टि सँ पहिने या बाद के जेहो किछु अछि, से सबटा स्पन्दनक जगत मे समाहित अछि, त एकर परिणाम अवश्ये विशाल होयत । अतः, सवाल उठैत अछि जे कि वेद मंत्र सब मे समस्त विविध सार्वभौमिक क्रिया केना समाहित अछि । ई बुझय पड़त जे वेद विशाल अछि वेद अनन्त अछि – ज्ञानक अन्त नहि (अत्यन्त मननीय पाठ)

जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

जप केर त्रुटिरहित विधि  अपन पूर्वज लोकनि वेद मे छोटो टाक त्रुटि सँ परहेज लेल लेखनक सहारा लेनहिये बिना अनेकों उपाय निकालि लेने छलथि । वैदिक मंत्र केर पूर्ण लाभ तखनहि प्राप्त भ’ सकैछ जखन कोनो शब्द मे कोनो तरहक परिवर्तन (हेरफेर) नहि कयल जाय; पाठक समय स्वर (आवाज) मे कोनो प्रकारक अनाधिकृत तर-उपर बहकाव जप केर त्रुटिरहित विधि – शुद्ध उच्चारण एवं आवाजक सुन्दर महिमाक वर्णन

वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)

वेद पर शोध ई खेदक विषय थिक जे भारत मे हमरा सब मे सँ बेसीतर लोकक लेल वेदक ज्ञान केर मुख्य स्रोत प्राच्यविद् कहेनिहार विदेशी लोक आर ओकर पदचिन्ह सब पर चलिकय शोध करयवला हमरा लोकनिक विद्वान् सब द्वारा कयल गेल शोध अछि । हम एहि बात सँ सहमत छी जे वेदक ज्ञान केर सम्बन्ध वेद पर शोध – विडम्बना ई जे अधिकतर पश्चिमी देशक विद्वान् वेद पर शोध कयलनि (रोचक तथ्य)

ध्वनि आ सृजन – सृष्टि एवं वेद केर वैज्ञानिक प्रमाण

ध्वनि आ सृजन ध्वनि कि अछि ? आधुनिक विज्ञान एकरा कम्पन रूप मे परिभाषित करैत छथि । परमाणु विज्ञान आर आइंस्टीनक सिद्धान्त यैह निष्कर्ष प्रस्तुत कयलनि अछि जे परमाणुक स्तर पर सब पदार्थ एक्कहि होइछ – (वेदांतक अद्वैत सिद्धान्त) । लेकिन वस्तु सब आँखि केँ अलग-अलग देखाय दैत अछि कियैक तँ ऊर्जा विभिन्न बिन्दु पर ध्वनि आ सृजन – सृष्टि एवं वेद केर वैज्ञानिक प्रमाण

वेद – भूमिका

वेद वेदक कोनो आदि नहि छैक । ई सामान्य बुद्धिक विरुद्ध भ’ सकैछ । हमरा सभक आधुनिक वैज्ञानिक मन कोनो ऐतिहासिक घटनाक स्रोत, कारण आ तिथिक खोज मे रहैछ । आर वेद जेहेन जटिल रचनाक सेहो निश्चित रूप सँ कोनो आरम्भ रहल होयत । अनन्तकाल, अनादि, असीमता जेहेन अवधारणा सब कोनो वैज्ञानिक अध्ययन लेल वर्जित वेद – भूमिका

वर्तमान डबल इंजिन सरकारक मिथिला पर दहिन दृष्टि

मिथिला लेल ‘अच्छे दिन’ आ ‘बुरे दिन’ पूर्णिया हवाई अड्डा सेहो किछुए दिन मे आम यात्री लेल हवाई सेवा आरम्भ करय जा रहल अछि । रेलवे लाइन आ सड़क संजाल केर विकासक बात त विगत २-३ दशक सँ निरन्तरता मे अछि, परञ्च कतेको रास नया फोर लेन आ रेलवे लाइन विस्तार कयल गेल अछि । वर्तमान डबल इंजिन सरकारक मिथिला पर दहिन दृष्टि