मिथिला लेल ‘अच्छे दिन’ आ ‘बुरे दिन’
पूर्णिया हवाई अड्डा सेहो किछुए दिन मे आम यात्री लेल हवाई सेवा आरम्भ करय जा रहल अछि । रेलवे लाइन आ सड़क संजाल केर विकासक बात त विगत २-३ दशक सँ निरन्तरता मे अछि, परञ्च कतेको रास नया फोर लेन आ रेलवे लाइन विस्तार कयल गेल अछि । कोसी नहर परियोजना लेल सेहो बजट आबंटन आ लाखों हेक्टर जमीन लेल सिंचाई सुविधा कृषि प्रधान मिथिला लेल वरदान सिद्ध होयत । नव-नव औद्योगिक क्षेत्रक घोषणा आ उद्योग संचालन सँ क्षेत्रक लोक केँ स्वदेशहि मे रोजगारक उपलब्धता बिहार सरकारक नव काज मे मिथिला लेल विशेष पहल कहि सकैत छी ।
जानकी जन्मभूमि – पुनौराधाम (सीतामढ़ी) मे ‘राम जन्मभूमि पर राम मन्दिर’ प्रारूप मे लगभग १ हजार करोड़ टकाक योजना आ शिलान्यास सेहो भ’ गेल । चरणबद्ध आ अत्यन्त शानदार योजना अनुरूप जानकी मन्दिरक निर्माण होमय जा रहल अछि । राजा जनकक राजधानी जनकपुर सँ जगजननी जानकीक प्राकट्यभूमि, फुलबारी (फुलहर), अहिल्यास्थान, धनुषाधाम, मिथिला परिक्रमा क्षेत्रक अन्यान्य छोट-पैघ ऐतिहासिक मन्दिर सभक विकास आ कनेक्टिविटी संग रेल, सड़क आ हवाई मार्ग सँ जोड़बाक योजना – विश्व भरिक लोक मे श्री रामचन्द्रक भार्या मिथिलापुत्री ‘मैथिली’ केर जन्मभूमि सँ धार्मिक पर्यटन लेल जोड़बाक योजना – ई सब वर्तमान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबन्धन सरकार – केन्द्र आ राज्य केर ‘डबल इंजिन सरकार’ केर विशेष योगदान अनुरूप भ’ रहल अछि । हमरा समान मिथिलावादी लेल ई हर्षक बात थिक ।
किछेक समय पूर्व दरभंगा मे ऐतिहासिक-पौराणिक अभिलेख केर संग्रह, शोध व अध्ययन केन्द्रक स्थापना सम्बन्ध मे सेहो योजना पारित कयल गेल । महाकवि विद्यापतिक जन्मस्थल ‘विस्फी’ मे राष्ट्रीय स्मारक आ शोध केन्द्रक प्रस्तावित ‘ग्लोबल मैथिल’ केर खाकाक मूल आधार मे आर स्तरोन्नति कय केँ राज्य सरकार द्वारा योजना पारित कय बजट आबंटित कयल गेल ।
अटल बिहारी वाजपेयी जीक युग-युगान्तर धरि स्मरण राखल जायवला इतिहास अर्थात् ‘मैथिली’ केँ भारतीय संविधानक अष्टम् अनुसूची मे देल गेल स्थान केँ विशेष स्मरण करैत काल्हि हुनक स्मारक स्थल पर भैरवि वन्दनाक अति-विशिष्ट प्रस्तुति देखि-सुनि केकर हृदय मे महाकविक काव्यरसक अमृत गमन नहि कएने होयत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व समस्त श्रेष्ठ व्यक्तित्व लोकनि मंत्रमुग्ध भ’ गायिकाद्वय सुपुत्री सब संग स्वयं साक्षात्कार कयलनि – निश्चय ई सब प्रकरण हम ‘मैथिल’ पहिचानधारी लेल अति-अति-विशिष्ट भेल – हमरा लगैछ । निश्चय, कतेको अधक्की आ अपरिपक्व आलोचक सब केँ एहि सँ पेट नहि भरलनि, ई हुनकर आजीवन समस्या थिकन्हि – अपन छविक छनक-छमक त’र पड़बाक जोखिम केकरा नहि होइत छैक; लेकिन समग्र मे वर्तमान केन्द्र ओ राज्य सरकारक दहिन दृष्टि सँ मिथिलावाद जिन्दाबाद भेल अछि, एहि मे कनिको सन्देह नहि ।
भौतिक पूर्वाधारक विकास संग मैथिल पहिचान आ मिथिला राष्ट्रवादक समावेश सँ भारतवर्षीय राष्ट्रवाद ‘अखण्ड भारत’ केर परिकल्पना मे अतिशय सहयोग कय रहल अछि, आगुओ करत । विश्वस्त रहू । कहैत रही न – वगैर मिथिला राज्य भारतीय गणराज्यक संघीयता अधूरा अछि । मगर, बिहार राज्यान्तर्गतक व्यवस्थापन मे पर्यन्त मिथिला क्षेत्रक ऐतिहासिकता-पौराणिकता प्रति सजग सेवा-योगदानक महत्व सेहो कम नहि अछि । धन्यवाद नमो !
दुःख आ सुख संग-संग चलैत छैक । दुःखक बात एखनहुँ अछिः
– बिहार द्वारा ‘मैथिली’ केँ ‘दोसर राजभाषा’ रूप मे मान्यता प्रदान नहि कय सकब
– क्लासिकल लैंग्वेज केर मान्यता मैथिली जेहेन प्राचीन भाषा केँ ग्रान्ट करय मे देरी
– मैथिली शिक्षक केर नियुक्ति मे देरी
– संवैधानिक अधिकार ‘प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा माध्यम सँ’ अनुरूप मैथिली मे शिक्षा उपलब्ध करेबाक नगण्यता – अल्पसाक्षरताक समाधानक मुख्य उपाय पर मौनता आ कुत्सित-कुटिल जातिवादी राजनीति केर जामा पहिरा आमजन केँ लिल्लोह रखबाक दुराबस्था
– त्रिभाषा शिक्षा पद्धति – एनईपी-२०२० अनुसार हाल धरि मैथिली मे पढ़ाइ लागू नहि कयल जेबाक कमजोरी; कम सँ कम एनडीए लेड स्टेट मे नव शिक्षा पद्धति परिकल्पना अनुसार लागू नहि कयल जा सकब, ई विडम्बनापूर्ण लागि रहल अछि
त, दुःखक बात पर सेहो समुचित ध्यानाकर्षण होयत आ दीर्घकालिक निदान निकलत, से आशा करैत छी ।
आत्मालोचना एहि लेल सेहो करैत छी जे भारत मे मैथिली-मिथिलाक हजारों संस्था एक्टिव रहितो ‘रजनी-सजनी आ छमकछल्लो चाइल’ सँ इतर ‘बौद्धिक स्तरक मांग’ तक राखयवला कियो मुखर नहि अछि – एहि सँ पैघ विडम्बना दोसर कि हेतैक ।
गाम-गाम मे मूल संस्कारक परित्याग कय – ग्रामीण नाट्यमंच ओ मौलिक कला प्रति उपेक्षा आ ‘आर्केस्ट्रा एवं डीजे’ पर पारिवारिक संस्कार सब केँ, सामाजिक संस्कार सब केँ ताख पर राखि ‘रिमोट सँ लहंगा उठबयवला विदेशिया नाच’ प्रति आकर्षित भेल छी; एहि लेल नीतीश कुमार या नरेन्द्र भाई दामोदरदास मोदी किछु नहि कय पेता, आ न संजय झा उर्फ ललितनारायण या नीतीश मिश्रा जेहेन दृष्टिसम्पन्न नेता – एहि सब लेल ग्रामीण अभिभावक सब केँ फाँर्ह बान्हिकय भिड़इये टा पड़त । बचाउ मिथिलाक सनातनी गाछ केँ, जैड़ मे दीमक-दीवार जुनि लगबियौक ।
तखन त ‘अच्छे दिन’ आ ‘बुरे दिन’ केर सनातन सिद्धान्त पर चलैत रहबाक अछि । आगू चुनाव सेहो आबि गेल । रंग-बिरंगक ‘नैरेटिव’ आ ‘नारा’ मे लोक केँ ओझरेबाक आ ‘जंगलराजक कतेको जंगली शेर अमर-रहे-अमर-रहे’ करयवला फलम्माक बेटा चिलम्मा नेता सब हुवाँ-हुवाँ कय रहल अछि – निराशा नक्षत्र मे पैदाइश गोटेक विद्वान् कहेनिहार मनोजबा सब सेहो चिल्ल-पों-फुल्ल-फों करैत लोकक माथा भटका रहल अछि – सावधान मिथिलावासी ! संवैधानिक निकाय द्वारा प्रक्रियागत ढंग सँ काज करय मे कनिकबो दिक्कत हो त रिपोर्ट करू, शिकायत करू । बाकी सब शुभे-हे-शुभे !!
हरिः हरः!!

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Bahut sundar aa satik baat kahaliyai Bhai. Sangeet bala baat t gajbe chhai ekhan maithil sabhak soch m. Kehan soch bichar ganda bho gelai se dekh suin mon byathit bho rahal aichh😢. Baba Baidyanath san kamna karait chhi je Mithilabashi k je soch bichar je ganda bho rahal chhai. O sahi rasta par aabi jay 🙏