दुलरा दयाल आ बहुरा गोरहिन के कथा
लेखक: निशिकांत ठाकुर, जाले संकलन: अनिल झा बिसरैत लोकगाथा ************** नृत्य चलि रहल छल। किशोरवय राजकुमार पूर्णतया नृत्य में मग्न। नर्तक आ नृत्य दू नहि छलै एकाकार भ गेल रहै। अंग संचालनक गति देख दर्शक मंत्रमुग्ध आ विस्मित छलाह। हवा – बसात, लता-गुल्म, गाछ-बिरिछ सब संग द रहल छलै। चिड़ै-चुनमुन्नी सेहो निमग्न भ कलरव बिसरि … दुलरा दयाल आ बहुरा गोरहिन के कथा




