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प्रवीण नारायण चौधरी

विद्यापति गीतः जाइत देखलि पथ नागरि सजनि गे

विद्यापति गीत (नखशिख) जाइत देखलि पथ नागरि सजनि गे आगरि सुबुधि सेयानि ॥१॥ कनक-लता सनि सुन्दरि सजनि गे बिहि, निरमाओल आनि ॥२॥ हस्ति-गमन जकाँ चलइत सजनि गे देखइत राज-कुमारि ॥३॥ जिनकर एहनि सोहागिनि सजनि गे पाओल पदारथ चारि ॥४॥ नील बसन तन घेरल सजनि गे सिर लेल चिकुर सँभारि ॥५॥ तापर भमरा पिबए रस सजनि विद्यापति गीतः जाइत देखलि पथ नागरि सजनि गे

कोशलीपट्टी सुपौल के महेश्वर बाबू नहि रहलाह

समाचार साभार: राम बहादुर रेणू केर फेसबुक पोस्ट कोशी इलाकाक विद्वान गणित शिक्षक, श्री कृष्ण नाट्य कला परिषद्, कोशलीपट्टी (जिला सुपौल, बिहार) केर मजगुत स्तंभ कोशलीपट्टी निवासी हमर सभक महेश्वरी भाइजीक १७ अप्रैल २०२६ भोरे अवसान (देहांत) भ गेलनि । महेश्वरी प्रसाद यादव विद्या विहार स्कूल, गम्हरिया ( मधेपुरा जिला) केर स्थापना कय सैकड़ों गरीब कोशलीपट्टी सुपौल के महेश्वर बाबू नहि रहलाह

सुधामुखि के बिहि निरमिल बाला – विद्यापति गीत भावार्थ सहित

विद्यापति गीत (नखशिख) सुधामुखि के बिहि निरमिल बाला ॥१॥ अपरुब रूप मनोभवमंगल त्रिभुवन विजयी माला ॥२॥ सुधामुखि….. सुन्दर बदन चारु अरु लोचन काजर-रंजित भेला ॥३॥ कनक-कमल माझ काल-भुजंगिनि स्त्रीयुत खंजन खेला ॥४॥ सुधामुखि…. नाभि-बिवर सयं लोम-लतावलि भुजगि निसास-पियासा ॥५॥ नासा खगपति-चंचु भरम-मय कुच-गिरि-संधि निवासा ॥६॥ सुधामुखि…. तिन बान मदन तेजल तिन भुवने अबधि रहल दओ सुधामुखि के बिहि निरमिल बाला – विद्यापति गीत भावार्थ सहित

मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल एक क्रान्तिकारी डेगः प्रत्यक्ष प्रमाण मुम्बइ साहित्यिक बैसार

प्रत्यक्षं किं प्रमाणम् – एमएलएफ सँ मुम्बइ-मैथिल-क्रान्ति प्रत्यक्षहि जँ आँखिक सोझें मे सत्य देखब त प्रमाणक कोनो आवश्यकता नहि रहत । कतेक लोक भगवानक माया देखि पबैत छथि, कतेक लोक अबूझ रहि भगवान हेबाक नहि हेबाक भ्रम मे रहैत छथि । मिथिला मे बहुते एहेन मीमांसक सब भेलाह जे अप्रत्यक्ष भगवान् केँ प्रत्यक्ष विश्वास करबाक मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल एक क्रान्तिकारी डेगः प्रत्यक्ष प्रमाण मुम्बइ साहित्यिक बैसार

मैथिलीभाषी मे मातृभाषा प्रति अनुराग मे कमी या शासकीय पद्धति आ उपेक्षाक शिकार मैथिली ?

मैथिल मे मातृभाषा प्रति अनुराग मे कमी डा. देवशंकर नवीन केर एक महत्वपूर्ण उक्ति पर ध्यान दीः मैथिलों में मातृभाषा के प्रति अनुराग में कमी । ये कमी किस कारण है – इसका पहला कारण है कि मैथिली रोजगार और बाजार की भाषा अभी तक नहीं बन पाई है । एक प्रोफेसरी की नौकरी मिलती मैथिलीभाषी मे मातृभाषा प्रति अनुराग मे कमी या शासकीय पद्धति आ उपेक्षाक शिकार मैथिली ?

भारतक आर्थिक विकास दर पर आइएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिनाक प्रशंसा

भारतक आर्थिक विकास दर केर आइएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा मुक्तकंठ प्रशंसा आजुक ई प्रमुख खबर सभक ध्यानाकर्षण योग्य अछि । भारत मे नरेन्द्र मोदी नेतृत्वक एनडीए सरकार जाहि तरहें देशक आर्थिक विकास दर केँ निरन्तर आगू बढ़ेलक तेकर प्रशंसा विश्वमंच पर होयब स्वाभाविक सत्य बुझू । आइएमएफ बॉस क्रिस्टालिना जॉर्जीवा भारतक प्रशंसा आर्थिक विकास भारतक आर्थिक विकास दर पर आइएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिनाक प्रशंसा

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन २०२५ः सम्पूर्ण प्रतिवेदन

अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन २०२५ (सम्पूर्ण प्रतिवेदन) त्रिमूर्तिधाम (त्रिमूर्ति चौक) कोचाखाल-विराटनगर अवस्थित महाकवि विद्यापति, भाषाशास्त्री महानन्द सापकोटा एवं आदिकवि भानुभक्त आचार्य सहितक स्मारक स्थल व त्रिमूर्ति पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन सँ अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन-२०२५ केर शुभारम्भ भेल । एहि अवसर पर प्रमुख अतिथि माननीय सदानन्द मंडल, पर्यटन, वन तथा वातावरण मंत्री, कोशी प्रदेश तथा विशिष्ट अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन २०२५ः सम्पूर्ण प्रतिवेदन

मनुष्य मे टेढ़पनीक मुख्य कारण कि होइत छैक – मैथिल सब एतेक टेढ़ कियैक होइत अछि

टेढ़ प्रवीणक सोझ मीमांसा (केवल फिलौसोफिकल चिन्तक लेल) एक दिन हम अत्यन्त गहन चिन्तन करैत अपना केँ चिन्हबाक चेष्टा कय रहल छलहुँ । हम मनुष्य छी । हम फल्लाँ जातिक छी । हमरा माता-पिता, हमर सर-समाज, कर-कुटुम्ब आदि-आदि; एहि सब विन्दु पर सोचि रहल छलहुँ । अन्त मे ई सेहो अबैत छल जे हम मिथिलाक मनुष्य मे टेढ़पनीक मुख्य कारण कि होइत छैक – मैथिल सब एतेक टेढ़ कियैक होइत अछि

जुड़िशीतल पर दरभंगा मे हास्य कवि सम्मेलन

समाचार साभारः हरिश्चन्द्र हरित, दरभंगा । १६ अप्रैल २०२६, मैथिली जिन्दाबाद !! विद्यापति सेवा संस्थान, दरभंगाक तत्त्वावधान मे ‘जुड़िशीतलक दिन कविगणक अधीन’ शीर्षक अन्तर्गत हास्य कवि सम्मेलनक आयोजन कयल गेल । एहि सन्दर्भ मे कवि हरिश्चन्द्र हरित सामाजिक संजाल फेसबुक पोस्ट मार्फत निम्न सूचना प्रवाह कएने छथि – शब्द नहि अछि हमरा लग जे. ……. जुड़िशीतल पर दरभंगा मे हास्य कवि सम्मेलन

परवाहा लोक संस्कृति उत्सव – प्रवीणक संस्मरण

परवाहा लोक संस्कृति उत्सव – २०८२: प्रवीण अनुभूति नव वर्ष २०८३ आरम्भ भेल । सम्पूर्ण सज्जनवृन्द मे शुभकामना । पराम्बा जानकी संग पुरुषोत्तम राम आ गौरी संग शंकर केर कृपा सब पर बनल रहय । सन्दर्भ मिथिलाक लोकसंस्कृति आ मूल्यवान् परम्पराक संरक्षण-संवर्धन हेतु विभिन्न प्रयासक अछि । प्रवास क्षेत्र मे मैथिल लोक जाग्रत देखाइते रहल परवाहा लोक संस्कृति उत्सव – प्रवीणक संस्मरण