परवाहा लोक संस्कृति उत्सव – २०८२: प्रवीण अनुभूति
नव वर्ष २०८३ आरम्भ भेल । सम्पूर्ण सज्जनवृन्द मे शुभकामना । पराम्बा जानकी संग पुरुषोत्तम राम आ गौरी संग शंकर केर कृपा सब पर बनल रहय ।
सन्दर्भ मिथिलाक लोकसंस्कृति आ मूल्यवान् परम्पराक संरक्षण-संवर्धन हेतु विभिन्न प्रयासक अछि । प्रवास क्षेत्र मे मैथिल लोक जाग्रत देखाइते रहल छथि । मुदा ग्रामीण परिवेश मे सेहो जागृतिक अद्भुत दृश्य अभरल नेपालदेशान्तर्गतक मिथिलाक्षेत्रक केन्द्रविन्दु धनुषा जिलाक परवाहा गाम मे ।
परवाहा गामक चर्चा हम बेर-बेर सुनैत रहल छलहुँ, एहि गामक बच्चा-बच्चा मे बौद्धिक बुद्धिमत्ता आ विभिन्न क्षेत्र मे उपलब्धि हासिल करबाक गुण हमरा बहुते प्रभावित करैत छल । एकटा शानदार अभिभावक-मार्गदर्शक रूप मे रमेश रंजन झा भाइजी सब दिन संगे छथि, से प्रत्यक्ष प्रमाण रहबे करथि ।
एहि बेर अनिल मिश्र जी जेहेन नेतृत्वकर्ता जे युवा नाट्यकला परिषद् परवाहाक अध्यक्ष छथि, पत्रकारिता क्षेत्रक चर्चित नाम छथि, संगहि आर-आर कतेको भाइ-बन्धु लोकनि जे परवाहा गाम सँ छथि – हुनका सभक सुन्दर सोच, निजताक रक्षार्थ बेहतर सेवा आ प्रदर्शनक सुन्दर आयोजन ‘परवाहा लोक संस्कृति उत्सव’ मे देखायल ।
ई अद्भुत छल । एकटा मंच पर २०० सँ बेसी लोक कलाकार केँ आनि लेनाय असाधारण बात छल ।
आयोजक संगहि सहयोगी औरही गाउंपालिका आ नेपोभिट टाइल्स प्रति हार्दिक आभार जे मैथिली व मिथिलाक संरक्षण हेतु एहेन उच्चकोटिक आयोजन कयलहुँ ।
विद्वान् वक्ता लोकनि द्वारा भिन्न-भिन्न विषय उपर विमर्शक संग मिथिलाक विभिन्न लोककलाक प्रस्तुति बेजोड़ छल । विद्वत् विमर्श मे लोकक उपस्थिति सेहो बड़ा तकनीक सँ जोड़ल गेनाय खुबे प्रभावित कयलक । सफल संयोजन केर सुन्दर नमूना देखय लेल भेटल ।
स्थानीय लोक केँ मिथिलाक लोक संस्कृति सँ जोड़बाक बेस महत्वपूर्ण कार्य भेल । प्रत्यक्षं किं प्रमाणम् – जे सत्य आँखि सँ देखय लेल भेटय सैह प्रत्यक्ष भेल आ ताहि लेल आर प्रमाणक आवश्यकता नहि ।
गामक विशुद्ध ‘लोक’ – सब धर्मक ‘लोक’, सब लिंगक ‘लोक’, सब जातिक ‘लोक’, सब वर्गक ‘लोक’ – सभक समान आ मिश्रित उपस्थिति मे सम्पन्न भेल दुइ दिवसीय आयोजन । सच पुछी त एहने आयोजन प्रत्येक गाम मे साल मे एक बेर जरूर हेबाक चाही । मिथिला केँ बचेबाक अछि त एहि तर्ज पर काज करय जाउ ।
एक पर एक विषय समेटल गेल छल । एक सँ बढ़िकय एक वक्ता विमर्श मे सहभागी रहथि । आन-आन ठाम कतेक कठपिंगल सब देखय लेल भेटैत रहैत छल, बुझू पहिल बेर कठपिंगलमुक्त विमर्श सुनबाक-देखबाक अवसर भेटल हमरा । हरेक सत्र मे मानस पटल पर बल पड़ैत छल, सोचय लागी जे सच मे हम सब कि रही, कि छी, कि होयब आगू ।
ओतबे शानदार लोक कलाकार सभक सङ्गोर मे अत्यन्त वैज्ञानिक ढंग सँ प्रस्तुति सब देखय लेल भेटल । मुक्तकंठ सँ एहि तरहक आयोजनक प्रशंसा करैत छी । जेकर प्रभाव सीधा लोकमानस पर समुचित आ सारगर्भित ढंग सँ पड़ल से स्पष्ट देखायल ।
हमरा संग गेल एक सारथि सेहो घुरय काल भरि रस्ता विमर्शहि सब मे प्रस्तुत विद्वान् आ कलाकार सभक चर्चा करैत आयल । गामक लोक सब केँ महिला सब केँ जे ओ शान्त, सुशील आ हिन्दू-मुस्लिम संगहि सब जातिक लोक एकठाम बैसल देखलक से एतेक नीक लगलैक ओकरा जे बेर-बेर कहय – मिथिलाक लोक एतेक महान अछि जे हृदय केँ छू देलक ।
स्वत्व सँ दूर जा रहल मैथिल समाज केँ सिद्ध कय देलक जे आत्महन्ता बनिकय डीजे आ अश्लील भोजपुरी गीत व फिल्मी संस्कृति अनुसारक अमैथिल जीवन पद्धति अपनेला सँ मिथिला समाज लहूलुहान भेल अछि, एकरा मिलिजुलिकय सब कियो बचाउ ।
दाँत बिदोरिकय ‘हेँ-हेँ-हेँ हमरा मैथिली त बाजय नै अबैत अछि’ आ अपने सँ अपन धियापुता केँ मिथिला संस्कार सँ दूर करनिहार लोक, चट् हिन्दी-अंग्रेजी कि नेपाली झाड़ब आरम्भ करय मे दिय’मान मानययवला प्रजातिक विद्वेषी लोकक संख्या बढ़ि गेल दुरुह-अकलबेरा मे परवाहा गाम एकटा अद्भुत आ शानदार उदाहरण ठाढ़ कयलक अछि ।
हमरा त मुस्लिम समुदायक ग्रामीण महिला लोकनिक साड़ी पहिरन तथा मैथिल परम्पराक घोघ व लाज-लेहाजक पारम्परिक सीमा मे रहिकय “झरनी” प्रस्तुति एतेक नीक लागल जे पुछू नहि ।
तहिना कारिख झुम्मैर केर प्रस्तुति देनिहाइर रीता यादव व हुनकर टीम मे सहयोगी गायन-वादन करनिहारक प्रस्तुति, मो. तैय्यब नट्ट केर ‘आल्हा-रूदल’ केर वीर-गाथाक गान, साटन राम केर सारंगी व मृदंग पर दीना-भदरीक प्रस्तुति, तहिना लोरिकायन प्रस्तुति करयवला टीम आ नटुआक प्रस्तुति, पमरिया नाच केर टीम द्वारा ओ खुजल कंठ सँ गायन आ नाच – एक-एक टा प्रस्तुतिक जतेक प्रशंसा करू कम होयत ।
हम स्वयं कतेको आयोजनक संयोजन करैत छी, आर परवाहाक आयोजन देखैत बेर-बेर आयोजकक संयोजन सामर्थ्य आ कार्यक्रमक साहित्य-सिद्धान्तक विलक्षणता पर छगुनता सँ भरिकय सोचैत रहलहुँ ।
हम सब सहृदयतापूर्वक कहि सकैत छी जे मिथिलाक लोक आ एहिठामक लोकसंस्कृति ‘आनन्द’ प्राप्तिक संग भोग आ मोक्षक परिकल्पना केँ साकार कएने अछि । बस, आजुक समय लोक बेसी हताश-निराश आ अपन निजता प्रति घोर उदास भ’ जेबाक कारण बहुत रास बात मटियामेट (लोप) होबय लागल अछि ।
लेकिन युवा नाट्यकला परिषद् परवाहा जेहेन मौलिक मूल्य-मान्यता वला सम्पूर्ण लोक-संस्कृति केँ संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्द्धन संगहि पुस्तान्तरण (नया पीढ़ी मे हस्तान्तरण करैत जिम्मेदारीक बोध) करबाक पुनीत कार्य कयलक – ई अद्भुत सेहो लागल आ एखनहुँ मिथिलाक अनेकों मूल्यवान परम्परा लोक मे जिवित अछि से विश्वास बढ़ल ।
आयोजक प्रति नतमस्तक छी । एहि तरहक आयोजन पहिल बेर देखि पेलहुँ । नयन सेहो जुड़ायल आ मन मे असीम शान्ति भेटल । मैथिली जिन्दाबाद !! धन्यवाद आयोजक लोकनि !
हरिः हरः!!
