Search

प्रवीण नारायण चौधरी

रहुआ-संग्राम मे शुरू भेल दुइ-दिवसीय लक्ष्मीनाथ गोसाईं महोत्सव २०१८

रहुआ-संग्राम, मधेपुर। अप्रैल १, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! – लक्ष्मीनाथ गोसाईं महान उपदेष्टा छलाह – प्रो. शशीनाथ झा   – विशाल साहित्य, भक्ति दर्शन, समाज एवं देशक स्थिति अपन जीवन मे दर्शौलनि।   -गोसाईं केर सब साधना स्थली आइ धरि ज्ञान प्राप्तिक केन्द्र अछि।   – साधना स्थल पर पीपरक वृक्ष केँ बोधि वृक्ष समान बतौलनि। रहुआ-संग्राम मे शुरू भेल दुइ-दिवसीय लक्ष्मीनाथ गोसाईं महोत्सव २०१८

लक्ष्मीजी केँ सदा दहिन आ संग रखबाक एकमात्र अचल उपाय

आध्यात्म लक्ष्मीजीक स्थिरताक उपाय (मानस-मर्मज्ञ पं. श्रीरामकिंकरजी उपाध्याय केर विचारपर आधारित)   लक्ष्मीजी केर एक नाम चंचला छन्हि। संसार मे कतहु देखब, कोनो घर, कोनो समाज, कोनो जाति या कोनो देश एहेन नहि अछि, जे हर हमेशा धनी बनल रहय, जे निर्धनता कहियो देखनहिये नहि हो। एहेन कोनो व्यक्ति नहि भेटत, जेकरा ओतय लक्ष्मी पीढी-दर-पीढी लक्ष्मीजी केँ सदा दहिन आ संग रखबाक एकमात्र अचल उपाय

मधुबनीमे नेपाल-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदानः आयोजन एक सन्देश अनेक

विशेष सम्पादकीय नेपाल-भारत केर सनातनकालीन मित्रता तथा जनस्तरीय सम्बन्ध केँ आरो प्रगाढ करत दुनू देशक संयुक्त भाषा, संस्कृति आ कला – नेपालक एक महान संस्कृतिविद् कला एवं रंगकर्म निर्देशक स्व. चतुर्भुज आशावादीक स्मृति पर आयोजित समारोह केर उद्घाटनक अवसर पर जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक अपन संबोधन मे एहि तरहक भावना रखलन्हि। संगहि, आयोजनकर्ताक तरफ सँ मधुबनीमे नेपाल-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदानः आयोजन एक सन्देश अनेक

महेश डखरामीक ‘महेश मञ्जरी’ पुरान आ आधुनिक शैलीक संगम आ सन्देशमूलक रचना

पोथी परिचयः महेश मञ्जरी – लेखकः महेश डखरामी   प्रकाशकः साहित्य संचय, मूल्यः १५० टका (भारत तथा नेपाल मे) $4.00 अन्य मुलुक मे।   ई थिक काव्य संग्रह। मैथिलीक ओ छंद आ रसक प्रयोग जे विद्यापतिक पदावली मे भेटैत अछि। विद्यापतिक पदावली बुझबाक लेल शब्दकोश आ भावार्थ कोनो विज्ञजन सँ बुझब आवश्यक होइत अछि आमजन महेश डखरामीक ‘महेश मञ्जरी’ पुरान आ आधुनिक शैलीक संगम आ सन्देशमूलक रचना

मैथिली साहित्यः तीन विधाक तीन महत्वपूर्ण पोथी परिचय

पोथी परिचय हे वीर स्रष्टागण, अहाँक समर्पण आ लगन केँ हमर प्रणाम!!   जी, ई प्रणाम एहि तीन महान् वीर सर्जक ‘मैथिल’ केँ जे अपन कलम सँ निकलल रचना ‘मैथिली पोथी’ केर तीन अलग-अलग विधा मे समर्पित कयलनि अछि।   सर्वप्रथम बात करैत छी साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ पुरस्कृत युवा नाटककार आनन्द कुमार झा केर मैथिली साहित्यः तीन विधाक तीन महत्वपूर्ण पोथी परिचय

नेपाल आ भारत मे मैथिली रंगकर्मक इतिहास बनेनिहार चतुर्भुज आशावादी केर समृति मधुबनी मे

मधुबनी, मार्च २५, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! भारतक मधुबनी मे चतुर्भुज आशावादी केर विशेष स्मृति समारोह   मधुबनीक वाटिका होटल सभागार मे २७ मार्च केँ अपराह्न १ बजे सँ संध्याकाल ६ बजे धरिक समय मे मैथिली भाषाक नेपाल-भारतक बीच सेतुक कार्य कयनिहार महान् संस्कृतिविद् (सांस्कृतिक राजदूत) चतुर्भुज आशावादीक स्मृति मे कवि गोष्ठी, नेपाली सिनेमा “कैली मैना” नेपाल आ भारत मे मैथिली रंगकर्मक इतिहास बनेनिहार चतुर्भुज आशावादी केर समृति मधुबनी मे

प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ – एक सहज आ सुन्दर दर्शन

स्वाध्याय – श्रीरामसुखदासजी महाराज लिखित ‘जीनव का सत्य’ पुस्तक केर दोसर अध्याय “प्रभुकी प्राप्ति साधनासे नहीं, केवल मान्यतासे’ केर अनुवाद – अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ हमरा लोकनिक अनुभव यैह अछि जे हम वैह छी जे बाल्यकाल मे रही, मुदा ई शरीर आर संसार प्रतिक्षण बदैल रहल अछि। प्रभुक प्राप्ति साधना सँ नहि, सिर्फ मान्यता सँ – एक सहज आ सुन्दर दर्शन

रामनवमी विशेष प्रसादः सीताक विरह आ रामक सन्देश

सीताक विरह आ रामक सन्देश (तुलसीदासकृत् रामचरितमानस पर आधारित) – भाव अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी   विदिते अछि जे रावण सीताक अपहरण कय हुनका अशोक वाटिका मे राक्षसी सभक कड़ा पहरा मे राखि देने छल। जखन हनुमानजी सीताजीक खोज करैत लंका पहुँचि गेलाह अछि आर विभीषण सँ सब युक्ति जानिकय अशोक वाटिका मे सीताजीक दर्शन रामनवमी विशेष प्रसादः सीताक विरह आ रामक सन्देश

परम शान्तिक उपाय – स्वामी रामसुखदासजी महाराज केर सर्वोत्तम सनेश

स्वाध्याय – स्वामी रामसुखदासजी महाराज लिखित ‘जीवनक सत्य’ नामक पोथीक अनुवादित अध्याय “परम शान्तिक उपाय” (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) मनुष्य केवल अपन अनुभवक आदर करय तँ ओकर सब काज सफलता पायत। अनुभव कि थिक? अपना पास जे सब चीज भेटल अछि, ओ सब अपन नहि थिक। ई खास बात छी। जे भेटल वस्तु होएत छैक परम शान्तिक उपाय – स्वामी रामसुखदासजी महाराज केर सर्वोत्तम सनेश

वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम – कर जोड़ि करू ओहि माँटि केँ प्रणाम

गीत – विमलजी मिश्र वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम कर जोड़ि करु ओही माँटि केँ प्रणाम!! पावन पुनीत सिया जानकी के गाम ऋषि मुनि देवतो बसै यऽ ओहि ठाम!!   जतय जनक महान, जतय गौतम के ज्ञान जतय गुरुजी के संगे-संगे अयला श्री राम जतय जन्मै लऽ देवतो केँ तरसै य प्राण…. कर वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम – कर जोड़ि करू ओहि माँटि केँ प्रणाम