मधुबनीमे नेपाल-भारत सांस्कृतिक आदान-प्रदानः आयोजन एक सन्देश अनेक

विशेष सम्पादकीय

नेपाल-भारत केर सनातनकालीन मित्रता तथा जनस्तरीय सम्बन्ध केँ आरो प्रगाढ करत दुनू देशक संयुक्त भाषा, संस्कृति आ कला – नेपालक एक महान संस्कृतिविद् कला एवं रंगकर्म निर्देशक स्व. चतुर्भुज आशावादीक स्मृति पर आयोजित समारोह केर उद्घाटनक अवसर पर जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक अपन संबोधन मे एहि तरहक भावना रखलन्हि। संगहि, आयोजनकर्ताक तरफ सँ मिथिलांचल उद्योग वाणिज्य संघक अध्यक्ष नवीन जायसवाल द्वारा करायल गेल ध्यानाकर्षण पर संबोधन करैत जिलाधिकारी द्वारा मधुबनी मे कला, रंगकर्म आदिक लेल टाउन हौल उपलब्ध करेबाक संग आकाशवाणी मधुबनी लेल सेहो उचित कार्रबाही आगू बढेबाक भरोस देलनि।
 
जाहि उद्देश्य लेल गैर-मैथिली भाषी नेपाली स्रष्टा स्व. आशावादीक स्मृति समारोह भारतीय मिथिलाक केन्द्रविन्दु मधुबनी मे आयोजित कयल गेल छल तेकर भरपूर प्रशंसा करैत आ आयोजन सँ काफी उत्साहित जिलाधिकारी एहि अवसरपर नेपाल क्षेत्र मे पल्लवित-पुष्पित कला आ रंगकर्म हुनका बहुत बेसी आकर्षित केलक आर ई दुनू कातक मिथिलाक मौलिक संस्कृतिक परिचायक अपनत्व बढबैत अछि ताहि कारण आगामी मिथिला महोत्सव जे बिहार राज्य सरकार द्वारा जिलास्तर पर आयोजित होएत अछि ताहि मे नेपालक कलाकार आ रंगकर्मी संग-संग भाषा-साहित्यक सेवा मे जुड़ल सर्जक लोकनि केँ सेहो आमन्त्रित कयल जेबाक वचन देलनि। संगहि जिलाधिकारी ईहो कहलनि जे दुइ देशक बीच केर आपसी सम्बन्धकेँ मजबूती प्रदान करबाक लेल एक-दोसरक सीमाक सुरक्षा, अबैध मानव व्यापार, लागू औषधिक अबैध व्यापार, सीमाशुल्कक चोरी करैत अबैध आयात-निर्यात, माल-मवेशीक अबैध व्यापार, आपराधिक गतिविधि मे शामिल अपराधीक आबर-जात आदि विभिन्न सरोकारक बात पर दुनू कातक प्रशासनिक अधिकारी आपस मे तालमेल बनाकय रखबाक लेल नियमित बैसार करैत रहैत छथि। खुद मधुबनी जिलाधिकारीक जिम्मा मे नेपालक चारि गोट जिलाक प्रशासन संग सहकार्य करबाक कार्यभार रहैत छन्हि। आगामी बैसार मे ओ एहि दिशा मे नेपाली शासन-प्रशासनक ध्यान सेहो आकृष्ट करता जे आपसी सम्बन्ध केँ आरो बेसी प्रगाढ बनेबाक लेल साहित्य, कला तथा संस्कृति क्षेत्र मे बेसी सँ बेसी आदान-प्रदान कार्यक्रमक आयोजन राखल जाय।
 
मधुबनीक वर्तमान जिलाधिकारी श्री शीर्षत कपिल अशोक केर नाम एहि ठामक ब्रिटीशकालीन एसडीएम जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन संग तुलना कयल जाएत छन्हि। मैथिली साहित्यक पुरोधा लोकनिक मुंह सँ हिनकर नाम ग्रियर्सनक पुनर्अवतार केर रूप मे सेहो लेल जाइत अछि। मंच संचालनक जिम्मेदारी केँ बखूबी निर्वहन करैत साहित्यकार-संचारकर्मी-प्रकाशक आ बहुप्रतिभासंपन्न अजित आजाद कहैत छथि जे लगभग १०० वर्षक बाद एहेन जिला पदाधिकारी मधुबनी मे एलाह जिनकर ध्यान एहि ठामक मौलिक सभ्यताक संरक्षणक दिशा मे बेसी कार्यरत रहैत छन्हि। पूर्व मे जतेक प्रशासक लोकनि एलाह ओ सब बेसीकाल राज्यप्रदत्त प्रशासनिक कार्य मे मगन रहलाह, परञ्च श्री शीर्षत कपिल अशोक केर कार्यकाल मे ओहने-ओहने महत्वपूर्ण बौद्धिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक आ मौलिक विधा मे कार्य सब कयल जा रहल अछि जे १८८५ सँ १९२८ धरिक जार्ज अब्राहम ग्रियर्सनक भारत मे सेवाकाल मे भेल छल।
 
पेशा सँ व्यापारी आ उद्योगी मुदा बौद्धिकता सँ एकटा महान सामाजिक-साहित्यिक स्रष्टा नवीन जायसवाल भारत आ नेपाल बीच अखन्ड मित्रता केँ संरक्षण-संवर्धन-प्रवर्धन मे काठमांडू-दिल्लीक कूटनीतिक आ राजनयिक संबंध सँ बहुत ऊपर दुनू कातक बौद्धिक आ साहित्यिक नागरिकक संग-संग कलाकार लोकनि केँ जिम्मेवार मानैत छथि। ओ कहैत छथि जे भले दुनू कातक सरकारक बीच मे सम्बन्ध अपन कोनो दिशा मे जाएक, लेकिन जन-जन केर जुड़ाव सँ भारत आ नेपालक मित्रता अपन पूर्वक अखन्ड मित्रता केँ बनाकय रखने रहल अछि, आगुओ यैह बेसी महत्वपूर्ण भूमिका संग एकरा बनाकय राखत। एहि क्रम मे ओ बहुआयामिक विषय केँ समेटैत भारत आ नेपालक कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार, नाटककार, फिल्मकार आदिक वृहत् बैसार दुनू देशक राजधानीक संग-संग सीमावर्ती जिला मुख्यालय सब मे आयोजित करबाक विषय पर जोर दैत जल्दिये मधुबनी जिलाक मुख्यालय मे श्री शीर्षत कपिल अशोक समान मौलिकताक रक्षक जिलाधिकारीक नेतृत्व आ आयोजक रूपें नेतृत्वकर्ताक भूमिका मे एहि तरहक वृहत् आयोजन लेल वचनबद्धता प्रकट केलनि। ओ कहलनि जे विभिन्न दुइ-देशीय जनमानसक विषय पर एकटा वृहत् विमर्श कार्यक्रमक आयोजन कयल जायत।
 
नवारम्भ ओना त एकटा प्रकाशक केर वैधानिक भूमिका मे ठाढ अछि, परन्तु २०१५ सँ लगातार मधुबनी जिला मुख्यालय सँ लैत विभिन्न अनुमंडल मे पर्यन्त सक्रिय सहभागिताक संग साहित्यिक-सांस्कृतिक चेतना केँ जनस्तर पर प्रचारित-प्रसारित करबाक काज करैत आबि रहल अछि। अजित आजाद पटना सँ मधुबनी एला उपरान्त मानू अपन पूर्ण जीवन मैथिली-मिथिला केँ एहि तरहें सृजनशीलताक सिद्धान्त पर सौंपि चुकल छथि। पहिनहुँ सँ मधुबनी एतेक उर्वर भूमि रहल जतय मिथिला चित्रकला, मैथिली साहित्य, मैथिल पांडित्य परम्परा, विभिन्न कालखंड मे मिथिलाक राजधानीक संचालन, एक सँ बढिकय एक ऋषि-मणीषीक जन्मस्थल, पुरातात्विक महत्व केर अनेकों भूखण्ड, प्राचीन सभ्यता केँ स्थापित करैत अनेकानेक धरोहर आदि सँ परिपूर्ण रहल अछि; यैह सामर्थ्यक आधारपर आइ समस्त भारतक कला राजधानी (Art Capital) तक बनबाक दावी प्रस्तुत कय चुकल अछि। परञ्च हमरा लोकनिक नजरि मे नवारम्भ आ अजित आजाद एकटा टर्निंग प्वाइन्ट केर रूप मे अभरैत छथि। तैँ पूर्वहि सँ सक्रिय अनेकों उपक्रम केँ हमरा लोकनि कम कय केँ मूल्यांकन नहि कय सकैत छी। सभक योगदान पूर्ववत् मधुबनी केँ समस्त विश्व मे अलग सम्मान स्थापित कय रहल अछि। बकौल अजित आजाद, एतेक काज विश्व केर आन कोनो ठाम नहि भऽ रहल अछि जतेक मधुबनी आ एकर सब अनुमंडल मे। एहि लेल दिलीप कुमार झा, अमल वत्स, मलयनाथ मिश्र मंडन, मैथिल प्रशांत, अक्षय आनन्द सन्नी, कमलेश प्रेमेन्द्र, विकास वत्सनाभ, आनन्द मोहन झा, नारायण झा, आदि साहित्य आ संस्कृति मे रुचि रखनिहार केर नामक स्मरण त करिते छथि, ठाढी गाम मे वाचस्पति भामती उद्यानक स्थापना, मूर्ति अनावरण, सालाना साहित्यिक एवं समसामयिक गोष्ठी आदि लेल रत्नेश्वर झा एवं समस्त कार्यसमितिक विशेष रूप सँ नाम लेल जाइत अछि।
 
स्व. आशावादी केर ई सपना छलन्हि जे सप्तम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली नाटक प्रतियोगिता समारोह १९९१ उपरान्त अष्टम् अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली नाटक प्रतियोगिता समारोह काठमांडू मे कराबी। हुनक धर्मपत्नी श्रीमती माया पौड़ेल तथा सुपुत्र प्रचन्ड पौड़ेल एहि लेल जी-तोड़ मेहनति कय रहल छथि। हम, हिनकर एहि सपना केँ साकार करबाक लेल मधुबनीक आयोजन मे समस्त मिथिलावासी जे दुनू कात छथि तिनका सँ अपील कयलहुँ…. कठिनाई छैक, बजेट लम्बा छैक, लगभग २ करोड़ भारतीय रुपया…. परञ्च ई काज करब असंभव नहि छैक। स्वयं श्रीमती माया पौड़ेल सेहो अपना केँ मिथिला नैहरा आयल समान कहली। ओ कहली जे अपन नैहरा मे साड़ी भेटल, खोंइछ सेहो भेटत। मिथिलाक परम्परा अनुरूप बेटी जखन-जखन नैहरा अबैत अछि त ओकरा नैहरा मे दाय-माय-भाइ-बहिन सब खोंइछ भैर दैत छैक। से स्व. आशावादीक सपना केँ पूरा करब खोंइछ भरय समान होयत। आर, फेर कलाकारक रूप मे मंच पर गीत गेनाय आ कि कननाय आ कि नचनाय, ई सब कोनो पैघ बात नहि छैक। लेकिन अपन मूल्यवान् परम्परा केँ बचेनाय आ चुनौतीपूर्ण कार्य केँ पूरा केनाय ई बड पैघ बात होएत छैक। सब कियो भाव-विह्वल भऽ गेल हुनक एहि भावुक आह्वान पर। स्वयं नवारम्भ संचालक अजित आजाद एहि लेल घोषणा कय देलन्हि जे जल्दिये अहाँक ई सपना मधुबनीक धरातल पर एहि वर्ष ओ पूरा करताह, जाहि मे नवीन जायसवालजी, जिलाधिकारी एवं समस्त सर्जक-सामाजिक व्यक्तित्व सभक योगदान आवश्य अछि।
 
मैथिलीक झंडा बहुत ऊँच-ऊँच धरि फहराइत रहय, एहि नारा केँ ‘मैथिली जिन्दाबाद’ कहल जाएछ।
 
हरिः हरः!!