वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम – कर जोड़ि करू ओहि माँटि केँ प्रणाम

गीत
– विमलजी मिश्र
वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम
कर जोड़ि करु ओही माँटि केँ प्रणाम!!
पावन पुनीत सिया जानकी के गाम
ऋषि मुनि देवतो बसै यऽ ओहि ठाम!!
 
जतय जनक महान, जतय गौतम के ज्ञान
जतय गुरुजी के संगे-संगे अयला श्री राम
जतय जन्मै लऽ देवतो केँ तरसै य प्राण….
कर जोड़ि करू ओही माँटि केँ प्रणाम!!
 
जतय विद्यापति के गान, जतय वाचस्पति विद्वान
जतय सागे पाते पर केलथि अयाची गुमान
जतय गार्गी मंडन लिख देल शास्त्र पुराण……
कर जोड़ि करु ओही माँटि केँ प्रणाम!!
 
जतय लोरिक के स्थान, जतय सलहेस के शान
जतय दीनाभद्री कुसुमा केँ जानय यऽ जहान
जतय दुलरा दयाल केर करय यऽ यशगान……
कर जोड़ि करू ओही माँटि केँ प्रणाम!!
 
जतय पोखरि मखान, जतय लुधकल बगान
जतय बरी तिलकोर खाजा मधुर मिष्ठान
जतय धोती कुर्ता गंजी दोपटा पागे परिधान……
कर जोड़ि करू ओही माँटि केँ प्रणाम!!
जतय मुख शोभय पान, जतय ठोरे मुस्कान
जतय कल-कल बहय कोसी कमला बलान
जतय पगड़ी मे दुलकल चलै यै किसान…
कर जोड़ि करू ओही माँटि केँ प्रणाम!!
जतय डाला दुबि धान, जतय डीहवार थान
जतय साँझ पराती ब्रहम गोसाउनी के गान
जतय अतिथि केँ घरे-घरे मानय भगवान….
कर जोड़ि करू ओहि माँटि केँ प्रणाम!
वैदेही चरण सँ जे बनि गेल धाम…..
कर जोड़ि करू ओहि माँटि केँ प्रणाम!!