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सब माए जीतिया पावनि अपन संतानके दीर्घायु हेबाक कामना सँ व्रत करैत छथि

9 भ्यूज

लेख विचार
प्रेषित:  शेफालिका दत्त “श्रीजा
श्रोत: दहेज मुक्त मिथिला समूह
लेखनी के धार ,बृहस्पतिवार साप्ताहिक गतिविधि
विषय- जितिया पावैन केँ महत्व

अपन सबहक मिथिला मे अपन संतान के लेल जितिया पावैन केँ बहुत पैघ महत्व होइत अछि।
जितिया पावनि के व्रत आशिन कृष्ण पक्ष अष्टमी कऽ हो‌इत अछि। व्रत केनिहारि सप्तमी दिन नहा खाय के अरबा-अरबा‌ईन खा‌ईत छथि। ई व्रत अ‌ईहब आ विधवा सब करैत छथि।अप्पन सन्तानक दीर्घायुक लेल ई व्रत क‌एल जा‌ईत अछि।अष्टमी दिन निराजल-निराहार रहि कs ई व्रत  कैल जाइत अछि। ई पावैन बहुत कठिन होइत अछि, किएक तऽ ई जितिया पावैन बिना पानि चाय के पुर्णतः निर्जला होइत अछि।जाहि बेर रैव आ मंगल के ई पावैन परैत अछि ओई बेर खरजितिया लागैत अछि। जे पहिले बेर ई व्रत शुरू करैत छथि ओ खरजितिया सँ शुरू करैत छथि।
ई जितिया पावैन कोनो बेर दु सांझ कोनो बेर तीन साँझ परैत अछि,अप्पन संतानक दीर्घायु के लेल माय ई कठिन पावैन करैत छैथि। कहल गेल अछि जे माय अपन संतान के दीर्घायु के लेल किछो कs सकैत अछि।केहनो कठिन से कठिन व्रत तपस्या कs सकैत अछि। कोनो बच्चा के कहियो कोनो दुर्घटना होइ छैन्ह आ ओ सही सलामत ठीक रहैत छथि तs लोग सब कहैत छथिन्ह जे अहाँक माय अवश्य खरजितिया केने हेथिन्ह।अही सँ ई जितिया पावैन के बहुत पैघ महत्व होइत अछि।
नहाय खाय दिन मरुआ रोटी,माछ,नोनी के साग,झिमनी,ओलक तरकारी आ तरुआ सब बनबैत छथि।व्रत केनिहारि सब ओहि दिन कोनो नदी या पोखरि मे नहाय लेल जाइत छैथि। व्रत केनिहारि नेहेलाक बाद झिमनिक पात पर ख‌ईर आ सरिसो के तेल चिल्हो-सियार आ जितवाहन महाराज के चढ़वैत छथि।ओकर बाद घर आबि के खीरा,केरा,अँकुरी,अक्षत,पान-सुपारी,मखान,मधूर लs कs नवेद दैत छैथि आ धूप-दीप जरबैत छथि। बहुत गोटे चूड़ा,दही,अमोट,पान, सुपारी चढ़बैत छैथि,जिनका ओतय जेना होइ छनि ओहिना करैत छथि। अप्पन पुत्रक दीर्घायु आ सब मनोरथ पूरा करबाक वरदान माँगैत छथि। ओइ दिन पितर-पितरैन के सेहो चढ़बैत छथि। ओइ के भोरहरवा मे बच्चा सब के उठा कs ओठगन करबैत छैथि।ओठगन के सेहो बड्ड पैघ महत्व होइत अछि।
नवमी दिन फ़ेर ओही तरहें पूजा पाठ कs के जितबाहन महाराज आ चिल्हो-सियारक कथा सुनैत छैथि।ओहु दिन खीरा,अँकुरी,अक्षत,पान-सुपारी नवेद दs धूप-दीप जरा कs पूजा करैत छैथि । फेर दोसर दिन जखन पारण के मुहूर्त रहैत अछि तखन ब्राह्मण भोजन करा कs पारण करैत छथि। जिनका लोकनि कs संतान लग मे रहैत छथि से माय पहिने संतान के जीतबाहनक प्रसाद दs कs तखन अपने पारण करैत छथि। जिनकर संतान परदेश रहैत छथिन्ह या कतौ बाहर पढ़बा-लिखबा लेल गेल रहैत छैथि तs हुनकर माय अपना बच्चा कs लेल जीतवाहनक चढ़ा‌ओल अँकुरी आ सुपारी राखि लैत छैथि तकर बादे पारण करैत छथि।
अप्पन संतान के लेल जितिया पावैन के बहुत पैघ महत्व होइत अछि। जय जीमूतवाहन महाराज सबहक बाल-बच्चा के स्वस्थ आ दीर्घायु राखब।

 

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