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प्रवीण नारायण चौधरी

मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….

हमहुँ आब दिल्लिये रहब….   “अरे! तूँ ततेक बिजी छँ अरविन्दा?”   “कि कहियौ दोस! दिल्ली छियैक न। प्राइवेट नौकरी मे समय पर औफिस, फेर ओतय सँ घर – भोरे उठू त औफिस के तैयारी, औफिस जाय मे घर सँ मेट्रो धरिक लिंक बस मे आधा घंटा…. जाम भेल त १ घंटा…. फेर मेट्रो केर मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….

कि आइ धरि हम मिथिलावासी चाकरी-चापलूसी रवैया सँ ऊपर उठि सकल छी?

बहस   १९५५ ई. मे अपन पोथी ‘द नार्दर्न बोर्डर’ मे महान् विद्वान् तथा राष्ट्रसेवक – भारतीय स्वतंत्रताक अगाध सेनानी डा. लक्ष्मण झा लिखने छथिः   हम सब मिथिला मे सड़ल-गलल लोक थिकहुँ। ई सड़न हमरा सभक अभावक जीवनस्तर तथा दुनू ब्रिटिश या काँग्रेस द्वारा अपनायल गेल शासन नीति (शासक) प्रति हमरा सभक रवैया सँ कि आइ धरि हम मिथिलावासी चाकरी-चापलूसी रवैया सँ ऊपर उठि सकल छी?

नेपालक राजधानी काठमांडू तक पहुँचत रेल सम्पर्क – भारतीय समुद्र धरि जलमार्ग सम्पर्क सेहो

नई दिल्ली, ७ अप्रैल, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! नेपालक प्रधानमंत्री खड्ग प्रसाद ओलीक औपचारिक भारत भ्रमण मे आइ समकक्षी भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संग संयुक्त प्रेस ब्रिफिंग संपन्न भेल अछि । नेपाली प्रधानमंत्री जतय भारत केँ सबसँ महत्वपूर्ण मित्रराष्ट्र मानैत नेपालक वर्तमान केँ ‘समृद्ध नेपाल, सुखी नेपाली’ नारा मे चिर सहयोगीक भूमिका निभेबाक अपेक्षा जतेलनि, ताहि नेपालक राजधानी काठमांडू तक पहुँचत रेल सम्पर्क – भारतीय समुद्र धरि जलमार्ग सम्पर्क सेहो

नारी शक्ति मे मूल आ मौलिकता सँ वितृष्णा मिथिलाक लेल खतरनाक संकेत

जागू मैथिली जागू! मिथिलाक नारी नहि छथि बेचारी!!   मिथिलाक कथित शिक्षित आ सम्भ्रान्त नारी-शक्ति मे आत्मविश्वास कतहु न कतहु एकदम बदतर ढंग सँ प्रभावित भेल देखाएत अछि। पहिने अशिक्षा आ परंपरावादिता हावी भेलाक कारण अलग स्थिति छलैक। घोघ प्रथा छलैक, चौखटिक बाहर ओ सब पैरो नहि राखि सकैत छलीह। धीरे-धीरे शिक्षा आ संस्कृति मे नारी शक्ति मे मूल आ मौलिकता सँ वितृष्णा मिथिलाक लेल खतरनाक संकेत

तनुजाक ‘रोचक संस्मरण’ मे काज कयनिहाइर पिंकी संग मधुबनीक भेंट

कथा-संस्मरण – तनुजा दत्ता साल भरिक बाद सासुर जेबाक मौका भेटल । गेला पर सब किछ बदलल-बदलल बुझाइत रहय । कमेनहाइर सेहो बदलि गेल छलीह । ‎….. ‘भाभी! अहाँ सब बच्चा केँ ल क छत पर जाउ, हम बर्तन माँजि दय छी’ ई हमर ननदि के स्वर छलैन्ह । हम कहलियन्हि ‘कियैक से किरण नहिं तनुजाक ‘रोचक संस्मरण’ मे काज कयनिहाइर पिंकी संग मधुबनीक भेंट

द्वादश ज्योतिर्लिंगः मल्लिकार्जुन – दक्षिणक कैलाश केर पौराणिक आ लौकिक स्वरूप

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग – पौराणिक आ लौकिक स्वरूप आन्ध्र प्रदेश केर कृष्णा ज़िला मे कृष्णा नदी केर तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान छथि। एकरा लोक दक्षिणक कैलाश कहैत छैक। अनेकों धर्मग्रन्थ सभमे एहि स्थानक महिमा कहल गेल अछि। महाभारतक अनुसार श्रीशैल पर्वत पर भगवान शिव केर पूजन कयला सँ अश्वमेध यज्ञ करबाक फल प्राप्त द्वादश ज्योतिर्लिंगः मल्लिकार्जुन – दक्षिणक कैलाश केर पौराणिक आ लौकिक स्वरूप

दरभंगाक बलिगांव मे जमीन खुदाई केर क्रम मे भेटल पुरातात्विक महत्वक दुर्गा प्रतिमा

समाचार साभारः मुरारी कुमार झा द्वारा फेसबुक पर अपडेट कयल जनतब अनुरूप मुरारी कुमार झा फेसबुक मार्फत जानकारी देलनि अछि जे दरभंगा जिलाक बहेरी प्रखंड अन्तर्गत बलिगाँव मे अप्रैल ४ तारीख ग्रामीण हरेराम यादवक जमीन मे भवन निर्माणकार्य लेल खुदाई केर क्रम मे पुरातात्विक महत्वक एक दुर्गा प्रतिमा प्राप्त भेल, संगहि पुरातात्विक सर्वेक्षण सँ जुड़ल दरभंगाक बलिगांव मे जमीन खुदाई केर क्रम मे भेटल पुरातात्विक महत्वक दुर्गा प्रतिमा

द्वादश ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन तथा महाकालेश्वरक वर्णन तथा महिमा

आध्यात्म – प्रवीण नारायण चौधरी द्वादश ज्योतिर्लिंगः मल्लिकार्जुन व महाकाल नामक ज्योतिर्लिंग केर आविर्भावक कथा तथा हुनक महिमा (शिव-पुराण मे वर्णित)   सूतजी कहैत छथि – महर्षिगण! आब हम मल्लिकार्जुनक प्रादुर्भावक प्रसङ्ग सुनबैत छी, जे सुनिकय बुद्धिमान् पुरुष सब पाप सँ मुक्त भऽ जाइत अछि। जखन महाबली तारकाशत्रु शिवापुत्र कुमार कार्तिकेय समूचा पृथ्वीक परिक्रमा कय द्वादश ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन तथा महाकालेश्वरक वर्णन तथा महिमा

मिथिला राज्य पुनर्गठन लेल आन्दोलन होयत तेजः डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू, दरभंगा मे काल्हि धरना

आशीष कुमार चौधरी, दरभंगा। अप्रैल ५, २०१८. मैथिली जिन्दाबाद!! अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति द्वारा दरभंगा मे आयोजित एक प्रेस कान्फ्रेन्स मे केन्द्र तथा राज्यक ध्यान मिथिला क्षेत्रक उपेक्षा पर आकृष्ट करैत राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’ द्वारा पुनः मिथिला राज्य पुनर्गठन केर मांग कयल गेल अछि। डा. बैजू प्रेस प्रतिनिधि सँ बात मिथिला राज्य पुनर्गठन लेल आन्दोलन होयत तेजः डा. बैद्यनाथ चौधरी बैजू, दरभंगा मे काल्हि धरना

जबरदस्ती मैथिलीकरण सँ नीक सृजनकार्य सँ मैथिलीक सब बोलीक मानवर्धन आवश्यक अछि

हमरा हिसाबे…. (सन्दर्भः मैथिलीक बोली बज्जिका, अंगिका आदि केँ भाषा मानबाक मादे)   भाषा मैथिली आ संस्कृति मिथिला – से हमर थिक। हमरा पड़ोस मे रहनिहार कतेको लोक केँ दाँत खिसोरिकय मंच आदि पर खुलेआम बजैत देखैत छी जे मैथिली बाजय मे दिक्कत होएत अछि, बाजय नहि अबैत अछि, ओकर भाषा मैथिलेतर थिक…. कियो ठेंठी, जबरदस्ती मैथिलीकरण सँ नीक सृजनकार्य सँ मैथिलीक सब बोलीक मानवर्धन आवश्यक अछि