मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….
हमहुँ आब दिल्लिये रहब…. “अरे! तूँ ततेक बिजी छँ अरविन्दा?” “कि कहियौ दोस! दिल्ली छियैक न। प्राइवेट नौकरी मे समय पर औफिस, फेर ओतय सँ घर – भोरे उठू त औफिस के तैयारी, औफिस जाय मे घर सँ मेट्रो धरिक लिंक बस मे आधा घंटा…. जाम भेल त १ घंटा…. फेर मेट्रो केर … मैथिल कथा – हमहुँ आब दिल्लिये रहब….









