नारी शक्ति मे मूल आ मौलिकता सँ वितृष्णा मिथिलाक लेल खतरनाक संकेत

राफियात रशीद मिथिला - बांग्लादेशक लोकप्रिय मोडेल, गायिका व नायिका संग महिला अधिकारकर्मी
जागू मैथिली जागू! मिथिलाक नारी नहि छथि बेचारी!!
 
Photo: Bangladeshi Model, Singer & Actress – Rafiath Rashid Mithila She is most popularly known by her nickname Mithila! A photo for encouragements of modern Maithilis.

मिथिलाक कथित शिक्षित आ सम्भ्रान्त नारी-शक्ति मे आत्मविश्वास कतहु न कतहु एकदम बदतर ढंग सँ प्रभावित भेल देखाएत अछि। पहिने अशिक्षा आ परंपरावादिता हावी भेलाक कारण अलग स्थिति छलैक। घोघ प्रथा छलैक, चौखटिक बाहर ओ सब पैरो नहि राखि सकैत छलीह। धीरे-धीरे शिक्षा आ संस्कृति मे यथास्थितिवादीक बात आ विचार केँ कात कय महिला समाज आगू बढलीह। सुशिक्षित होइ मे पुरषवर्ग सँ महिला बड बेसी पाछू नहि छथि। हालाँकि बड पैघ वर्ग जेकरा पिछड़ा आ अनुसूचित जाति-जनजाति आदिक संग-संग दलित-महादलित आदिक वर्गीकरण राज्य द्वारा कयल जाएत छैक, ताहि वर्म मे एखनहुँ महिला साक्षरता पर बड पैघ सवाल ठाढ छैक, ओकर अवस्था यथार्थतः आइयो दयनीय छैक। लेकिन एहि वर्गक महिला मे जे घरैया लुरि आ परंपरावादी स्वरोजगारक हुनर छैक तेकर सराहना शिक्षित-सुसंस्कृत महिला सँ कइएको गुना अधिक कहय मे हर्ज नहि। ओकरा सभक योगदान सँ परिवारक भरण-पोषण, धिया-पुताक शिक्षा आ रोजगारसम्पन्नता मे उल्लेख्य सुधार होएत देखि रहल छी। संगहि मिथिलाक मौलिकताक रक्षा सेहो यैह वर्ग बेसी कय रहल अछि, अपन बच्चा सँ एखनहुँ अपन मातृभाषाक प्रयोग, अपन घर-परिवारक रीत-रेबाज प्रति श्रद्धाक भावना उत्पन्न करय सँ लैत गाछी-खेत आ माल-जाल सँ घर-गृहस्थीक सम्पूर्ण कार्य अदौकाल सँ चलैत आबि रहल कर्मठ शैली मे पूरा करबाक समस्त हुनर सिखेबाक बड पैघ महत्वपूर्ण काज भऽ रहल अछि। यैह वर्गक महिला समाज आइयो अपन मूल भूमि (मिथिला) केँ सुन्दर ढंग सँ सींचन करैत फूलबारी सजौने छथि। एकर बिपरीत कनेक पढल-लिखल आ अपना केँ होसियाइर बुझनिहाइर महिला मिथिलाक समस्त मौलिकता सँ जानि-बुझि कटिकय परधर्म केँ अपनाबय मे वीरता बुझि रहली अछि, जे हुनका भीतर अपन मौलिक संस्कार प्रति निष्ठुरता आ वितृष्णा देखा रहल अछि से यैह संकेत करैत अछि जे निजता सँ आत्मगौरवक बदला हीनताईबोध बेसी भेटैत छन्हि आर ओ मिथिला सँ इतर दोसराक संस्कार मे आत्मसन्तोष ताकि रहल छथि – जे सिर्फ मृगमरीचिका जेकाँ सफलता मुदा वास्तविकता मे घोर असफलताक मुंह देखा रहलनि अछि।

 
कियैक अछि एना?
 
Mithila Palkar – Bollywood Actress & Singer If a name can give the fame to others, why not to Maithils!

महिला अधिकार, मिथिलाक समग्र स्वरूप, अपन युग मे आ वर्तमान युग मे आबि रहल व्यवहारिक परिवर्तन, शिक्षाक व्यवस्था, राजनीतिक सोच आ परिवर्तन, पंचायती शासन व्यवस्था मे महिला आरक्षणक प्रभाव… इत्यादि अनेक विषय छैक जाहि पर निरन्तर मिथिलाक बेटी बनिकय चिन्तन करती त आत्मसंतुष्टि सेहो भेटतनि, संगहि अपन जीवनक उद्देश्य सफल बनेबाक संग समाज लेल सेहो नीक योगदान कय सकती। निजी परिचय केँ एतेक उच्च बनबथि जाहि सँ मिथिलाक कण-कण मे लोक ई जानय जे आइयो ई पवित्र भूमि ‘भारती-भामती-गार्गी-मैत्रेयी-सीता-अहिल्या’ समान महानतम् नारी सँ भरल अछि। लेकिन, यथार्थतः मिथिलाक ई पढल-लिखल महिलावर्ग आइ बेसी अपरिचित आ निज घर-आंगन सँ बहुत दूर पलायन-प्रवासस्थल मे दिन काटय मे रुचि देखा रहली अछि। आब ई रोग कमो पढल-लिखल आ एतेक तक कि असाक्षर पिछड़ा आ दलित वर्गक परिवारक महिला मे सेहो शनैः-शनैः प्रवेश कय रहल छैक जे पति संग परदेशहि मे जीवन बेसी नीक छैक। कि कारण भऽ सकैत छैक कोनो सभ्यताक मूल अवलम्ब नारी शक्ति मे अपन मूल भूमि आ मौलिक संस्कार सँ वितृष्णाक? ई बड गंभीर सवाल ठाढ अछि।

 
A model displaying a shawl with Mithila Chitrakala – anything can happen if display is success.

आइ एकटा बहुत सुन्दर लेखिका सँ परिचित भेलहुँ। ओ बेसीकाल हिन्दी मे अपन रचना सब देशक पैघ-पैघ अखबार मे प्रकाशित करबैत छथि। पता नहि, ओहि अखबार सब सँ हुनकर नाम राष्ट्र भरि मे कतेक दूर धरि लोक चिन्हलक नहि चिन्हलक, लेकिन हुनकर पहिल मैथिली रचना पढिते हमरा सन-सन कतेको रास मैथिली प्रेमी हुनकर लेखनशैली सँ प्रभावित भऽ तुरन्त अपन मिथिलाक पटल पर एकटा परिचय प्रकाशित करबाक दृढसंकल्प लेलक आ बहुत रास विन्दु (खास कय ऊपर कहल गेल चिन्तनीय विन्दु आदि) पर हुनकर चिन्तन-लेखन लेल अनुरोध केलहुँ। आर प्रारंभिक परिचय मे ओ अपन लेख सब हिन्दी अखबारक दुनिया मे पहिनहि सँ प्रकाशित होएत रहल अछि से कियैक नहि कहलहुँ – ताहि पर ओ कहैत छथि जे एकटा अन्जान संकोचक कारण। ओहो-हो-हो!! यैह संकोच जे अपन मिथिलाक लोक हमर परिचिति केँ कोना स्वीकार करत, कि सोचत, कहीं हमर विचार केकरो नीक लगतैक कि नहि, आदि अनेकों आशंकाक कारण संभवतः हमरा लोकनिक महिला समाजक नीक-नीक व्यक्तित्व लोकनिक मोन मे घून जेकाँ लागल छन्हि। हम स्पष्ट कहलियैन जे यैह संकोच त खा गेल मिथिलाक महिला सभक सब ओज केँ…. आइ यैह संकोचक कारण महिला अपनहि सँ अपन बच्चा केँ आन भाषाक शिक्षा दैत छथि मुदा मैथिली नहि सिखबैत छथि….! बात बुझू मैडम! हम सब अपन पहिचान केँ नष्ट अपनहि बेसी कय रहल छी। ताहि हेतु, हम अहाँक अनुज रहितो ई आदेश करब जे कदापि कहियो कोनो बात मे आ काज मे संकोच नहि, बल्कि निर्भीकताक अवलम्बन रहय। यथार्थ सँ परिचय करा ई सन्देश देनाय बहुत जरूरी छैक जे हम मिथिलाक महिला देश स्तर पर आइयो बहुत आगू छी। आर से एहि द्वारे छी जे हमरा सब केँ पैतृक-मातृक संस्कार काफी उत्कृष्ट भेटल अछि। एहि मे कतहु सँ आन कोनो बातक योगदान पहिने नहि अछि। पहिने हमर मौलिक संस्कार उच्च आ उत्कृष्ट होयबाक संग पवित्र सेहो अछि। आर यैह लेल हम सब केकरो सँ कनिको पाछू नहि छी।

 
मैडम गछितो-गछितो अपन बात मे फेरो झिझक देखा देलीह – कहलखिन “जी, सही कहलियैक ….हमरा सँ मैथिली बहुत नीक लिखल नहिं जाइया .. तखन कोशिश जरूर करब अहाँ सब के अपेक्षा पर खरा उतरू …गलती लय माफी चाहब।” हम फेरो कहलियैन, एकदम नीक लिखाइयऽ…. शैली नीक रहला सऽ लेखनीक प्रशंसा होएत छैक मैडम। कतेक आकर्षण अछि अहाँक लेख मे…. तखन न सभक सराहना भेटि रहल अछि। आर जीवनक सफलता एकरे कहल जाइत अछि जे हमर किछु बात बहुतो केँ नीक लागि रहल छैक, ताहि लेल हम ओहि क्षेत्र मे आरो नीक स नीक योगदान देबैक। हम गारंटीक संग कहि सकैत छी जे अपने चाहब त एक सालक भीतर एकटा पोथी मैथिली साहित्य केँ दय अपन नाम केँ अमरता प्रदान करब। आ से करबाको चाही। जीवन भेटल कथी लेल? चुल्हा फूकय लेल आ कि पति – परिवार टा मे सिमैटकय रहि जाय लेल…. किछु अपनहु नाम केँ आगू करय लेल – भामती-भारती-सीता-अनसूया-अहल्या बनय लेल। – माने जे ई दृष्टान्त रखैत हम समस्त महिला समाज सँ निवेदन करब जे अपन सामर्थ्य सँ अपन मूल मिथिला लेल आगू अबियौक। दुनियाक समुद्र मे कतहु गुमनाम जीवन बिता लेला सऽ आ कि दुनियाक पटल पर बड आगू छी मुदा घर मे कियो जनबे नहि केलक ताहू सँ केकरो कोनो लाभ नहि भेटि रहल अछि।
 
एकटा आरो प्रसंग याद करब। हालहि संपन्न मैथिली लिटरेचर फेस्टिवल केर एक महत्वपूर्ण सत्र मे प्रश्न पूछबाक समय दर्शक दीर्घा सँ एकटा महिला बहुत बेर हाथ उठबथि, धरि मंच पर मौजूद विमर्शकार-संचालक लोकनिक ध्यान दोसर दिशि चलि जाएक। ओ महिला फेरो हाथ उठेलीह, पाछाँ बैसल हमरा नहि रहल गेल त कनी ऊँच स्वर मे बजैत संचालक महोदय सँ कहलियैन जे हुनकर प्रश्न सेहो लेल जाय, बेचारी बहुत काल सँ हाथ उठा रहली अछि। ई सुनिते एक दोसर महिला केँ हमर बात बड खराब लागि गेलनि जे हम ‘बेचारी’ शब्दक प्रयोग कियैक केलहुँ। ओ लपैक कय हमरा दिशि ताकि टोक दय देलीह, “बेचारी नहि कहियौन। ओ बेचारी नहि छथिन।” हम सकपका गेलहुँ। बेचारी हमर मुंह मे छल…. निकैल गेल। भाव तेहेन नहि रहय जे किनको ‘बेचारी’ कहि हम हुनकर निकृष्टता या दरिद्रता या कमजोरी पर दया कय रहल छलहुँ…. बस हाथ बेर-बेर उठबथिन आ से हमरा नहि देखल गेल त सामान्य तौरपर बाजल जायवला शब्द जेकाँ मुंह सँ निकैल गेल। टोक देनिहाइर त जे-से, बाद मे स्वयं ओ सम्भ्रान्त-कुलीन महिला आबि कहली जे अहीं न कहने रही ‘बेचारी’…. हमरा बेजा नहि लागल, हम जनैत छी जे पुरुष सभक मानसिकता नारी प्रति एहने रहैत छैक। मोन अपरतीब सनक भेल, दोषभाव सेहो आयल। बेकार बजलहुँ तेना लागल। मुदा फेर हृदय सँ आवाज आयल जे आइ-काल्हि परदेश मे महिला शक्ति अपन पहिचान प्रति जागरुक भऽ रहली अछि, ओहो सब अहाँ संग डेग-मे-डेग बढाबय लेल तत्पर छथि। तैँ, एहि टिप्पणी केँ सहजता सँ स्वीकार करू आ सीखू जे आइन्दा ‘बेचारी’ शब्दक प्रयोग सोचि-सम्हैरकय करब। अस्तु! हम पुनः अहाँ समस्त नारी शक्ति केँ प्रणाम कय एतबे कहब, एक-दोसरक गलती ताकय मे समय नष्ट नहि कय मिथिला-मैथिलीक पृष्ठपोषण हेतु अपन सामर्थ्य सँ उत्कृष्ट योगदान दी हमरा लोकनि। अपन जीवनक सही अर्थ बुझी हमरा लोकनि। बस!
 
हरिः हरः!!