जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)
कविता – वन्दना चौधरी बैसल छेलौं बहुत प्यासल, व्याकुल एकटा गाछ के तर में जे कखन ओ इनार स बान्हल डोरी जाहि में छै एकटा डोल बान्हल, ओ ऊपर आओत और हम अपन प्यास बुझेब। तखने आओल एक झंझावात के आवाज़, मोन त कुही भके कनेय लागल, किये त आब हम पियासल रैह जेब। ओ … जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)








