सरला केँ रेडियो कीनबाक सख भले पूरा नहि भेलनि लेकिन वैह सख जीवन बना देलकनि

मैथिली लघुकथा

– रूबी झा

कहल गेल छै भाग्य स बेसी और समय स पहिने ककरो किछु नै भेटै छै। हमरा जनैत ई बात शत-प्रतिशत सत्य छै। एक टा महिला छलैथि जिनकर नाम सरला छलैन हुनका रेडियो के बहुत ज्यादा सौख रहैन। भाय हुनका ३००टका द क गेलखिन ओ सोचली एकर रेडियो कीनि लेब, लेकिन रेडियो के दाम ५00 टका रहै, वापस दोकान पर स आबि गेली। भरि रस्ता मोन में बहुत किछु सोचैत एली। हुनका मोन एकटा विचार एलैन, किया ने एकटा पाठी कीनि ली और ओकरा पोसियाँ लगा ली, और ओकर जखन बच्चा सब हेतैक त ओ बेचिकय रेडियो कीनब। समय बीतल। बकरी के तीन टा बच्चा भेलैक। सरला बहुत खुश भेलीह जे आब रेडियो भ जायत। लेकिन समय केर चाल देखियौ, बकरी संगे बकरी के बच्चा सब सेहो मरि गेलैक। आर हुनकर रेडियोक सपना सपने रहि गेलनि। समय बीतल और बहुत तरहक जीवन मे उतार-चढाव केर सामना करैत बाल-बच्चा केँ पोसली। ओकरा सबकेँ बहुत नीक संस्कार देलीह। बच्चा सब पैघ भेलखिन। आय हुनका घर में माँ लक्ष्मी केर कृपा सँ धन्य-धान केर कुनू कमी नहि छन्हि। आर ओ अपन बच्चा सब केँ कहैत रहैत छथि, नीक कर्म करू – नीक फल भगवान देता। सबेर नहि त अबेर मे देता। आदरणीया सरला आर कियो नहि, ओ हमर सासु माँ छथि।