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प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानसः लंकाकाण्ड – षष्ठ सोपान – मंगलाचरण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती लंकाकाण्डः षष्ठ सोपान- मंगलाचरण श्लोक : रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहं योगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्‌। मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवं वन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम्‌॥१॥ कामदेव केर शत्रु शिवजीक सेव्य, भव (जन्म-मृत्यु) केर भय केँ हरय वला, काल रूपी मतवाला हाथीक लेल सिंह केर समान, योगी सभक स्वामी (योगीश्वर), ज्ञान द्वारा रामचरितमानसः लंकाकाण्ड – षष्ठ सोपान – मंगलाचरण

रामचरितमानस मोतीः समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध तथा समुद्रक विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध तथा समुद्रक विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा १. एम्हर तीन दिन बित गेल, लेकिन जड़ समुद्र विनय नहि मानलक। तखन श्री रामजी क्रोध सँ बजलाह – बिना भय के प्रीति नहि होइछ! हे लक्ष्मण! धनुष-बाण लाउ, हम अग्निबाण सँ समुद्र केँ सोखिये रामचरितमानस मोतीः समुद्र पर श्री रामजीक क्रोध तथा समुद्रक विनती, श्री राम गुणगान केर महिमा

रामचरितमानस मोतीः दूत द्वारा रावण केँ बुझेनाय आ लक्ष्मणजीक पत्र सौंपनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती दूत द्वारा रावण केँ बुझेनाय आ लक्ष्मणजीक पत्र सौंपनाय १. रावण दूत सँ कि सब खबरि अनलक से पुछि रहल अछि। पूर्वक अध्याय मे तपस्वी (श्री राम व लखनजी) बारे पुछलक आ ताहि सँ आगू पुछैत अछि – हुनका सब सँ तोरा भेटो भेलौक आ कि ओ सब रामचरितमानस मोतीः दूत द्वारा रावण केँ बुझेनाय आ लक्ष्मणजीक पत्र सौंपनाय

मैथिली धारावाहिकः हम आबि रहल छी भाग २३ सँ २७ धरि

मैथिली धारावाहिकः हम आबि रहल छी उपन्यास पर आधारित धारावाहिक कथा – रबीन्द्र नारायण मिश्र 23 गंगा सपरिवार दिल्ली अपन घर पहुँचल । ओकर घरक सभटा ताला टुटल छलैक । जे ताला नहि टुटि सकलैक तकर कब्जा उखारि देल गेल रहैक । सभटा केबार, खिड़की तेना ने सटल रहैक जे बाहरसँ ककरो पता नहि लागि मैथिली धारावाहिकः हम आबि रहल छी भाग २३ सँ २७ धरि

रामचरितमानस मोतीः समुद्र पार करबाक लेल विचार, रावणदूत शुक केर आयब आ लक्ष्मणजीक पत्र लयकय वापस जायब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती समुद्र पार करबाक लेल विचार, रावणदूत शुक केर आयब आ लक्ष्मणजीक पत्र लयकय वापस जायब १. हे वीर वानरराज सुग्रीव आ लंकापति विभीषण! सुनू, एहि गहींर समुद्र केँ कोन तरहें पार कयल जाय? अनेक जातिक मगरमच्छ, साँप आ मछरी सब सँ भरल ई अत्यन्त अथाह समुद्र पार करय रामचरितमानस मोतीः समुद्र पार करबाक लेल विचार, रावणदूत शुक केर आयब आ लक्ष्मणजीक पत्र लयकय वापस जायब

३० करोड़ के लागत सँ आरम्भ भेल मखान उत्पाद केर उत्पादन यूनिट अरेर मधुबनी मे

२८ अगस्त २०२३ । मैथिली जिन्दाबाद!! मिथिला नैचुरल्स – मिथिला मखान केर उत्पादन यूनिट के उद्घाटन मधुबनी जिलाक अरेर गाम मे खुजल मखान केर परिकार उत्पादनक उद्योग मनीष आनन्द – एक अनुभवी आ विज्ञ उद्योगी मिथिला मे खोललनि कारखाना लगभग ३० करोड़ के लागत सँ मखान प्रोसेसिंग यूनिट के भेल स्थापना काल्हि २७ अगस्त २०२३ ३० करोड़ के लागत सँ आरम्भ भेल मखान उत्पाद केर उत्पादन यूनिट अरेर मधुबनी मे

डायन नजरि सँ शापित मिथिला बनि गेल अछि शिथिला

सन्दर्भः डायन के? मिथिलाक अस्तित्व बर्बाद होइ मे अर्धज्ञानी पंडित आ बनौआ-खौआ विद्वानक हाथ होयब स्पष्ट अछि। जनसामान्य आ अल्पज्ञानी केँ कोनो दोष देनाय उचित नहि होयत, परञ्च बुद्धि सँ व्याधिग्रस्त मनुष्य, योग्यता कम मुदा दावी बेसी वला लोक… ई सब मिथिलाक शिथिला बनेनिहार लोक थिकाह। जहिना शिक्षा पद्धति मे परिवर्तन आयल ब्रिटिशकालीन व्यवस्था सँ, डायन नजरि सँ शापित मिथिला बनि गेल अछि शिथिला

चन्द्रयान, चरौदा आ भरत कुमार

प्रेरणादायक कथा अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी “चंद्रयान, चरौदा आ भरत कुमार”   (एक लेख जे सब बच्चा केँ पढ़बाक चाही)   स्रोतः दैनिक सर्कल   आइ साँझ 6.04 बजे चंद्रयान 3 के लैंडर (विक्रम) आर रोवर (प्रज्ञान) वला एलएम चंद्रमाक दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र लग उतरत। चाँद मे एहि जगह उतरयवला भारत पहिल देश बनत। ई चन्द्रयान, चरौदा आ भरत कुमार

रामचरितमानस मोतीः विभीषण केर भगवान्‌ श्री रामजीक शरण लेल प्रस्थान तथा शरण प्राप्ति

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती विभीषण केर भगवान्‌ श्री रामजीक शरण लेल प्रस्थान तथा शरण प्राप्ति १. श्री रामजी सत्य संकल्प एवं (सर्वसमर्थ) प्रभु छथि आर (हे रावण) अहाँक सभा काल केर वश अछि। तेँ हम आब श्री रघुवीर केर शरण मे जाइत छी, आगू हमरा दोष नहि देब। – एना कहिकय विभीषणजी रामचरितमानस मोतीः विभीषण केर भगवान्‌ श्री रामजीक शरण लेल प्रस्थान तथा शरण प्राप्ति

रामचरितमानस मोतीः रावण केँ विभीषणक बुझेनाय आर विभीषणक अपमान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती रावण केँ विभीषणक बुझेनाय आर विभीषणक अपमान सचिव बैद गुर तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास॥३७॥ १. मंत्री, वैद्य आर गुरु – ई तीन जँ अप्रसन्नताक भय या लाभ केर आशा सँ हितक बात नहि कहि मात्र प्रिय बात बजैत रामचरितमानस मोतीः रावण केँ विभीषणक बुझेनाय आर विभीषणक अपमान