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प्रवीण नारायण चौधरी

विवाह कतेक प्रकारक होइत छैक – मनन योग्य जानकारी

शास्त्रोपदेश – मनुस्मृति सँ संकलित (अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी) विवाह मनुष्य जीवनक अनिवार्य अंग (संस्कार) मानल जाइछ। विवाहक प्रकार केर वर्णन मनुस्मृतिक अध्याय ३ मे कयल गेल अछि। ताहि मे प्रस्तुत श्लोक ‘आसुर विवाह’ केर प्रकार केँ वर्णन कय रहल अछि। एकर समग्र रूप सेहो बुझनाय जरूरी छैक, एहि महत्वपूर्ण मननीय तथ्य केँ आजुक पीढ़ी विवाह कतेक प्रकारक होइत छैक – मनन योग्य जानकारी

रामचरितमानस मोतीः गुरुजीक अपमान एवं शिवजीक शाप केर बात सुनेनाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती गुरुजीक अपमान एवं शिवजीक शाप केर बात सुनेनाय प्रसंग पूर्व अध्याय कलि महिमा वर्णन करैत काकभुशुन्डिजी द्वारा गरुड़जी केँ अपन पूर्व जन्मक कथा आ कोना कौआ बनलाह तेकर वर्णन चलि रहल अछि। अपन एक ब्राह्मण गुरु जे शिवक अनन्य उपासक रहथि, जिनका भुशुन्डिजी उपर सँ मात्र गुरु बुझथि, रामचरितमानस मोतीः गुरुजीक अपमान एवं शिवजीक शाप केर बात सुनेनाय

रामचरितमानस मोतीः काकभुशुण्डि द्वारा अपन पूर्व जन्म कथा आ कलि महिमा वर्णन

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती काकभुशुण्डि द्वारा अपन पूर्व जन्म कथा आ कलि महिमा वर्णन १. हे पक्षीराज गरुड़जी! श्री रघुनाथजीक प्रभुता सुनल जाउ। हम अपना बुद्धिक मुताबिक ओ सोहनगर कथा कहैत छी। हे प्रभो! हमरा जाहि प्रकारें मोह भेल, ओ सबटा कथा अपने केँ सुनबैत छी। हे तात! अहाँ श्री रामजीक कृपा रामचरितमानस मोतीः काकभुशुण्डि द्वारा अपन पूर्व जन्म कथा आ कलि महिमा वर्णन

रामचरितमानस मोतीः शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, गरुड़जी द्वारा काकभुशुण्डि सँ रामकथा आर राम महिमा सुननाय

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, गरुड़जी द्वारा काकभुशुण्डि सँ रामकथा आर राम महिमा सुननाय १. शिवजी कहैत छथि – “हे गिरिजे! सुनू, हम ई उज्ज्वल कथा, जेहेन हमर बुद्धि छल, तेहेन पूरा कहि देलहुँ। श्री रामजीक चरित्र सौ करोड़ (अथवा) अपार अछि। श्रुति आर शारदा सेहो हुनकर वर्णन नहि रामचरितमानस मोतीः शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, गरुड़जी द्वारा काकभुशुण्डि सँ रामकथा आर राम महिमा सुननाय

रामचरितमानस मोतीः नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान १. ताहि अवसर पर नारदमुनि हाथ मे वीणा लेने आबि गेलाह। ओ श्री रामजीक सुन्दर आर नित्य नवीन रहयवला कीर्ति गाबय लगलाह। “कृपापूर्वक देख टा लेला सँ शोक दूर करनिहार कमलनयन! हमरहु पर कृपादृष्टि सँ देखू हे हरि! अपने नीलकमल समान रामचरितमानस मोतीः नारदजीक आयब आ स्तुति कयकेँ ब्रह्मलोक प्रस्थान

प्रेमकथाः जबानी दीवानी

कथा – प्रवीण नारायण चौधरी जबानी दीवानी सही छय जे जबानी सब दिन एक रंगक नहि रहय छय आ मन कहियो बूढ़ नहि होइ छय। मन आत्माक हाथ बुझू! बुद्धि सेहो आत्माक हाथे समान होइछ। लेकिन ई साधना सँ बदलैत रहैछ आ अन्य मित्र यथा प्राण, ज्ञान व कर्म केँ तदनुकूल प्रभावित करैत जीवन जियैत प्रेमकथाः जबानी दीवानी

रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वशिष्ठ संवाद, श्री रामजीक भाइ सभक संग आमगाछी भ्रमण

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री राम-वशिष्ठ संवाद, श्री रामजीक भाइ सभक संग आमगाछी भ्रमण १. एक बेर मुनि वशिष्ठजी ओहिठाम अयलाह जेतय सुन्दर सुखक धाम श्री रामजी रहथि। श्री रघुनाथजी हुनकर बहुते आदर-सत्कार कयलखिन आ हुनकर चरण धोकय चरणामृत सेहो लेलनि। ताहिपर मुनि हाथ जोड़िकय कहय लगलखिन – “हे कृपासागर श्री रामजी! रामचरितमानस मोतीः श्री राम-वशिष्ठ संवाद, श्री रामजीक भाइ सभक संग आमगाछी भ्रमण

मधुमेह रोग: भारत मे मधुमेह रोगीक बढ़ैत संख्या पर डा. ए. कुमार केर महत्वपूर्ण आलेख

आलेख भारत मे मधुमेह : एकटा बढ़ैत चिन्ता – डॉ ए कुमार (एमबीबीएस, एमडी, एमपीएच) भारत मे मधुमेह रोग (डायबिटीज मेलिटस) बड पैघ स्वास्थ्य चुनौतीक रूप मे विकसित भ’ गेल अछि, एतय १३० करोड़ सँ बेसी लोक एहि रुग्ण अवस्थाक (chronic condition) बोझ सँ बोझिल भेल अछि । अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ (आईडीएफ) मुताबिक २०१९ मे मधुमेह रोग: भारत मे मधुमेह रोगीक बढ़ैत संख्या पर डा. ए. कुमार केर महत्वपूर्ण आलेख

रामचरितमानस मोतीः श्री रामजी द्वारा प्रजा केँ उपदेश (श्री रामगीता), पुरवासी लोकनिक कृतज्ञता

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती श्री रामजी द्वारा प्रजा केँ उपदेश (श्री रामगीता), पुरवासी लोकनिक कृतज्ञता एक बेर श्री रघुनाथजीक बोलाहट पर गुरु वशिष्ठजी, ब्राह्मण आर अन्य समस्त नगर निवासी लोकनिक एक विशेष सभा मे अयलाह। गुरुजी, मुनि, ब्राह्मण आ आन सब सज्जन लोकनि यथायोग्य आसन ग्रहण कय लेलनि तखन भक्त लोकनिक जन्म-मरणक रामचरितमानस मोतीः श्री रामजी द्वारा प्रजा केँ उपदेश (श्री रामगीता), पुरवासी लोकनिक कृतज्ञता

रामचरितमानस मोतीः हनुमान्‌जी द्वारा भरतजीक प्रश्न पुछलापर श्री रामजीक सुन्दरतम् उपदेश

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी रामचरितमानस मोती हनुमान्‌जी द्वारा भरतजीक प्रश्न पुछलापर श्री रामजीक सुन्दरतम् उपदेश १. भरतजी प्रभुक श्रीमुखक वाणी सुनय चाहैत छथि, जे सुनि सबटा भ्रम केर नाश भ’ जाइछ। अंतरयामी प्रभु सब जानि गेलाह आ पुछय लगलाह – “कहू हनुमान्‌! कि बात छैक?” तखन हनुमान्‌जी हाथ जोड़िकय कहलखिन – “हे दीनदयालु भगवान्‌! रामचरितमानस मोतीः हनुमान्‌जी द्वारा भरतजीक प्रश्न पुछलापर श्री रामजीक सुन्दरतम् उपदेश