बहुल्य समाज लेल सेहो भाषिक चिन्तन अनिवार्यः से लुटेरा एनजीओ सँ सम्भव नहि
निरीह जनता आ लुटेरा अभियान भाषाक नाम पर सेहो निरीह जनता दुहल जा रहल अछि। मैथिलीभाषाक संरक्षण, संवर्धन आ प्रवर्धनक वास्ते वांछित सृजनधर्मक अलावे आर कोनो विकल्प नहि, लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था आ सौदाबाजी सँ आक्रान्त अछि हमरा सभक वर्तमान। वर्तमान वैश्विक गाम (ग्लोबल विलेज) केर नव मानवीय संसार मे कतेको रास भाषाक अस्तित्व समाप्त भेल … बहुल्य समाज लेल सेहो भाषिक चिन्तन अनिवार्यः से लुटेरा एनजीओ सँ सम्भव नहि






