रामचरितमानस मोती

स्वाध्याय

– प्रवीण नारायण चौधरी

रामचरितमानस मोती

अपन जीवनक एक अद्भुत अनुभव – तुलसीकृत् रामचरितमानस केँ पढ़ू आ अर्थ मनन करू अपन मातृभाषा मे, एकर अनेकों लाभ मे प्रत्यक्ष लाभ एहि इहलोक मे हर तरहक सुख आ शान्ति प्राप्त करू। जतबे लगन सँ पढ़ब, मनन करब, लोक सभक संग चर्चा करब आ अपन जीवनक केहनो मोड़ पर एकरे शिक्षा उपयोग करैत आगू बढ़बाक प्रयत्न करब त अहाँ सेहो हमरे जेकाँ अद्भुत अनुभव हासिल करब। चूँकि हम अपन जीवन मे एकर लाभ देखलियैक हँ, जेकरा सब केँ कहलियैक करय सेहो सब लाभ प्राप्त कयलक, तेँ रामचरितमानस मोती शीर्षक अन्तर्गत बुन्दावार सारतत्त्व संकलित कयलहुँ अछि। भाषाक त्रुटि भ’ सकैत छैक, भाव निश्चित उच्च आ सर्वकल्याणकारी राखिकय ई लगभग दुइ वर्षक अवधि मे तैयार भेल। २०२२ के मार्च सँ आरम्भ कएने रही। एकर सिलसिलेवार विषय क्रम निम्न रूप मे अछि।

बालकाण्ड

अयोध्याकाण्ड

अरण्यकाण्ड

किष्किन्धाकाण्ड

सुन्दरकाण्ड

लंकाकाण्ड

उत्तरकाण्ड

उपरोक्त समस्त काण्डक विभिन्न शीर्षक अन्तर्गत सम्पूर्ण रामचरितमानस मोतीक लेखन कयल गेल अछि। एहि मे हमरा जेना-जेना महत्वपूर्ण बात सब अभरल ओकरा क्रम संख्या दैत आ कतहु-कतहु बोल्ड सेहो करैत ई रचना तैयार कयल अछि। हमर उद्देश्य अछि जे जीवन मे सब व्यक्ति केँ स्वाध्याय करबाक चाही। आर, आजुक भौतिकतावादी युग मे भौतिक सुख लेल परमातुर मनुष्य केँ पर्यन्त समुचित लाभ दयवला ई जाँचल-परखल स्वाध्यायक वस्तु उपलब्ध कराओल अछि। एहि तरहक चर्चा करब ओना त आध्यात्मिक रूप मे तुच्छ मानल गेल छैक, लेकिन तैयो हम तुच्छे बात आइ-काल्हिक लोक लेल कहबाक हिम्मत कयल अछि। श्री रामजीक जतेक महिमा आ भक्तिक संग ज्ञानादिक बात कहल गेल अछि, छन्द आ श्लोक सभक संग देवता, वेद, आदिक स्तुति केँ सेहो उत्कृष्ट रूप मे जहिना तुलसीदास रखने छथि, तहिना राखल अछि, कारण हमरा ओतेक लुरि नहि अछि जे ओकरो मैथिली मे अनुवाद कय दितहुँ। तखन, एक बेर लेखक रमेश केर सुझाव अनुसार ‘सुन्दरकाण्ड’ मैथिली मे लिखल अछि से निम्न लिंक पर अपने सब पढ़ि सकैत छी। हम बेर-बेर क्षमाप्रार्थना करैत छी अपने सब सँ, कारण भगवान् कहने छथि जे ओ अहीं सभक रूप मे रहता आ जेना-जेना अहाँ (पाठक) सब मनन करब, तेना-तेना हमर लेखन सफलता प्राप्त करत। अस्तु! सभक लेल शुभकामना!!

सुन्दरकाण्ड मैथिली

अपने सभक मनोभावना आ सुझाव हमरा [email protected] पर अथवा +9779801722981 पर व्हाट्सअप कय सकैत छी। धन्यवाद!!

प्रवीण नारायण चौधरी, विराटनगर

हरिः हरः!!