Search

प्रवीण नारायण चौधरी

बड़का भैयाक पत्र पर छोट भाइक जवाब – प्रसंग टेढ़ी मे बर्बाद होइत मिथिलाक भाइ-भाइ केर कथा

बड़का टेढ़ भाइ केँ छोटका टेढ़ भाइक खुल्ला चिट्ठी नवाबगंज, नई दिल्ली – १ । दिनांकः ०९/०९/२०२४ । आदरणीय बड़का भाइजी, कुशल संग कुशलाभिलाषी! अहाँक पत्र भेटल । सब किछु पढ़ल, खूब हंसी लागल । कतेक टेढ़ी अहाँ मे एखनहुँ बचल अछि, जखन कि उमेर भेल वानप्रस्थ आश्रम प्रवेश केर । तुलनात्मक रूप सँ अपन बड़का भैयाक पत्र पर छोट भाइक जवाब – प्रसंग टेढ़ी मे बर्बाद होइत मिथिलाक भाइ-भाइ केर कथा

पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव – एक समूह सँ तीन समूह मे विभाजनक पाछूक कारण की ?

विराटनगरमे आयोजित तेसर पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सवक सन्दर्भ मोरंगकेर ऐतिहासिक नगरी विराटनगरमे पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव अत्यन्त धुमधामसाथ मनायल जाइछ । एहि वर्षक तेसर पूजनोत्सव एहि भादव २२ गते शनिदिन रानी सिकियाही स्थित मनकामनेश्वर महादेव मन्दिरक प्रांगणमे ‘अप्पन समाज’ विराटनगरक दर्जनौं भक्तलोकनि २१ हजार पार्थिव शिवलिंगक पूजा-अर्चना करैत मनौलनि अछि । एहिमे सहभागी प्रत्येक यजमान विभिन्न जाति-समुदायक पार्थिव शिवलिंग पूजनोत्सव – एक समूह सँ तीन समूह मे विभाजनक पाछूक कारण की ?

सप्तरी विचार उत्सव केर दोसर संस्करण माघ मे आयोजित कयल जायतः बरुण झा

८ सितम्बर २०२४ । मैथिली जिन्दाबाद !! मैथिली जिन्दाबाद सँ विशेष बातचीत करैत सप्तरी विचार उत्सवक दोसर संस्करणक आयोजन माघ २०८१ साल मे कुल ४ दिन धरिक समयान्तराल मे कयल जेबाक शुरुआती जनतब संयोजक बरुण झा करौलनि । बीणा फाउन्डेशन द्वारा सप्तरी विचार उत्सवक पहिल खेप जेठ ३२ गते आ आषाढ़ १ गते – दुइ सप्तरी विचार उत्सव केर दोसर संस्करण माघ मे आयोजित कयल जायतः बरुण झा

मैथिली कथाः मोहनाक जीत

मैथिली कथा – प्रवीण नारायण चौधरी मोहनाक जीत पोखरी महाड़ पर बच्चा सभक भीड़ लागि गेल रहय । शहरक स्कूल मे पढ़य वला एकटा गामहिक काका बेटा गाम आयल रहय । सब ओकरा देखय लेल जुटल छल । ओकर देह-हाथ, मुंह-कान, पहिरल कपड़ा, सब चीज आकर्षक रहय । गामक बच्चा सब देखिकय मुग्ध रहय । मैथिली कथाः मोहनाक जीत

भक्तियोग केर निरूपण – ज्ञान-विज्ञान योग (गीताक सातम् अध्याय)

स्वाध्याय गीता – सातम् अध्याय अध्याय ७ – ज्ञान विज्ञानं योग (विज्ञान सहित तत्व-ज्ञान) श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः। असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु॥ (१) श्री भगवान कहलखिन – हे पृथापुत्र! आब ओ बात सुनू जाहि सँ अहाँ योग केर अभ्यास करिते हमरा मे अनन्य भाव सँ मन केँ स्थिर कय हमर शरण आबि भक्तियोग केर निरूपण – ज्ञान-विज्ञान योग (गीताक सातम् अध्याय)

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड तेसर अध्याय – हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण सुन्दरकाण्ड – तेसर अध्याय हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद ।चौपाइ। सीता शुनथि शुनय नहि आन । शञ्च शञ्च कह तहँ हनुमान ॥१॥ राजा दशरथ काँ सुत चारि । जेठ राम काँ सीता नारि ॥२॥ शिव-धनु तोड़ल मिथिला जाय । जनक देल कन्या से न्याय ॥३॥ मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड तेसर अध्याय – हनुमानजी एवं सीताजीक संवाद

महादेव केर न्याय – रामायणक प्रसंग

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी महादेवक न्याय रामचरितमानस केर उत्तरकाण्ड मे एकटा बहुत महत्वपूर्ण प्रसंग आयल अछि । गरुड़जी श्रीराम केँ नागपाश मे बान्हल देखि श्रीरामक ऐश्वर्य प्रति भ्रमित भ’ जाइत छथि, महादेव सँ जिज्ञासा करैत छथि जे अपने हिनकहि नाम सदिखन जपैत रहैत छी या कोनो दोसर श्रीराम छथि । महादेव विहुँसिकय हुनका बुझबैत महादेव केर न्याय – रामायणक प्रसंग

सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढाइ लेल आतुर गुरुजन

सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढ़ाइ विद्यालय मे मैथिली भाषा-साहित्यक पढाइ बालकक्षा सँ उच्चकक्षा धरि – विभिन्न शोध व उपाधि हासिल करबाक धरि मौजूद अछि । मुदा पढ़निहार मे रुचि विभिन्न कारण सँ कम अछि, दिनानुदिन कम भेल जा रहल अछि । राज्य एहि लेल कोनो चिन्ता नहि करैछ, सामाजिक सरोकार रखनिहार सेहो गुम्मी लदने देखाइछ सोशल मीडिया पर मैथिलीक पढाइ लेल आतुर गुरुजन

मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय – हनुमानजीक लंका पहुँचब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कवि चन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण अथ सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय हनुमानजीक लंका पहुँचब; सुरसा, सिंहिका व लंकिनी सँ सामना ।द्रुतविलम्बित छन्दः। धुतनगेऽम्बरगे परमोत्सवे, चकितभानुगणे जितमन्मथे ॥१॥ जनकजाधिविनाशिमनोगतौ, प्रणतिरस्तु हनूमति मारुतौ ॥२॥ भावार्थः पहाड़ केँ हिलबयवला, आकाश मे उड़यवला, परम उत्साह भरल, सूर्य-चन्द्रादि केँ चकित करयवला, कामदेव केँ जितयवला, जानकी व्यथा मिथिलाभाषा रामायण – सुन्दरकाण्ड पहिल अध्याय – हनुमानजीक लंका पहुँचब

मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड नवम अध्याय – हनुमानजी केँ लंका विदाह करब

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी कविचन्द्र विरचित मिथिला भाषा रामायण किष्किन्धाकाण्ड – नवम अध्याय हनुमानजी केँ लंका विदाह करब ।चौपाइ। सम्पातिक सभ जनमल पाँखि । सभ जन वानर देखल आँखि ॥१॥ ओ खग मुदित गगन – पथ गेल । वानर सभ मन हर्षित भेल ॥२॥ दुर्ग्ग जलधि सन्तरण विचार । अछि अगम्य के जायत पार मिथिलाभाषा रामायण – किष्किन्धाकाण्ड नवम अध्याय – हनुमानजी केँ लंका विदाह करब