मिथिला आ विद्वान – व्यंग्य प्रसंगक एक प्रासंगिक पत्र
आदरणीय विद्वान् जी! ई पत्र जरूरत मे लिखि रहल छी। एकर उत्तर अपनेक व्यवहार मे आबयवला दिन मे देखायत से अपेक्षा राखि पत्र लिखि रहल छी। महोदय! अपन मिथिलाक माटि, पानि, हवा, आइग आ आकाश – ई सबटा दिव्य छैक। दिव्यताक प्रभाव हर सन्तान पर, खेत-पथार पर, आवोहवा पर, प्रत्येक निर्माण आ सृजन पर – … मिथिला आ विद्वान – व्यंग्य प्रसंगक एक प्रासंगिक पत्र







