इस्लाम धर्म मे अल्लाह प्रति समर्पण आ निज संकल्प थिक ‘नमाज’, आउ अर्थ बुझबाक यत्न करी
नमाज केर भावार्थ अहाँ जखन नमाज पढ़ैत छी त वैह आयत आ सूरत दोहराबैत रहैत छी आ नमाज पूरा भ’ जाइत अछि, लेकिन कि अहाँ केँ बुझल अछि जे ‘नियत’ करय सँ लय केँ ‘सलाम’ फेरय धरि अहाँ अल्लाह सँ कि-कि कहलहुँ, जे किछु पढ़लहुँ तेकर मतलब कि छल, अगर अहाँ जनैत छी त ‘माशा … इस्लाम धर्म मे अल्लाह प्रति समर्पण आ निज संकल्प थिक ‘नमाज’, आउ अर्थ बुझबाक यत्न करी








