नमाज केर भावार्थ
अहाँ जखन नमाज पढ़ैत छी त वैह आयत आ सूरत दोहराबैत रहैत छी आ नमाज पूरा भ’ जाइत अछि, लेकिन कि अहाँ केँ बुझल अछि जे ‘नियत’ करय सँ लय केँ ‘सलाम’ फेरय धरि अहाँ अल्लाह सँ कि-कि कहलहुँ, जे किछु पढ़लहुँ तेकर मतलब कि छल, अगर अहाँ जनैत छी त ‘माशा अल्लाह’, अल्लाह अहाँक इल्म मे बरक्कति देथि ।
लेकिन अगर अहाँ नहि जनैत छी त अहाँ (मुस्लिम धर्मावलम्बी) केँ जनबाक चाही । कियैक तँ नमाज मे अल्लाह ‘बन्दा’ (नमाज अदा करनिहार) सँ बात करैत छथि । लेकिन अगर अहाँ केँ ई नहि पता रहत जे हम कि कहि रहल छी, सही कहि रहल छी या नहि, त अहाँ मात्र अपन ड्यूटी पूरा कय केँ मस्जिद सँ निकलि आयब । लेकिन नमाज सँ जे फायदा भेटयवला छल आ अहाँक ‘जिस्म व रूह’ उपर जे असरि पड़यवला छल ओ नहि भ’ सकल/पायल ।
तेँ अहाँ जखन नमाज पढ़ी त ध्यान अहाँक अल्लाह टा दिश हो, नहि कि दुनियावी चीज (सांसारिक विषय) मे उलझल हो, आर ई तखनहि भ’ सकैत अछि जखन अहाँ केँ नमाज मे पढ़ल जायवला चीज केर मतलब पता होयत आर अहाँ नमाज मे कि कहि रहल छी से पता होयत, तेँ एहि पोस्ट मे नमाज मे पढ़ल जायवाली हर ‘तस्बीह’ (मंत्ररूपी मोती) केर मतलब बतायल जा रहल अछि ।
अल्लाहु अकबर
अल्लाह सब सँ पैघ छथि ।
सनाः
सुब हानकल लाहुम्मा व बिहमदिका व तबा रकस्मुका व तआला जददुका वला इलाहा गैरुकः
“हे अल्लाह ! अहाँक जाति पाक (पवित्र) अछि आर अत्यन्त खूबी वला अछि, अहाँक नाम मुबारक अछि, आर अहाँक शान बड ऊँच अछि, आर अहाँक सिवाय दोसर कियो माबूद (पूज्य – पूजय योग्य) नहि अछि ।”
अऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीमः
“हम अल्लाह केर पनाह (शरण) मे अबैत छी, शैतान मरदूद सँ (त्यागल गेल दुष्ट केँ छोड़िकय अल्लाह केर शरण मे अबैत छी) ।”
बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रहीमः
“शुरू करैत छी हम अल्लाह केर नाम सँ जे कि बड पैघ मेहरबान (दयालू) निहायत रहम (सदिखन दया) करयवला छथि ।”
सूरह फातिहा
१. अल्हम्दु लिल लाहि रब्बिल आलमीन
२.अर रहमा निर रहीम
३. मालिकि यौमिद्दीन
४. इय याका नअ’बुदु व इय्याका नस्तईन
५. इहदिनस् सिरातल मुस्तकीम
६. सिरातल लजीना अन अमता अलय हिम
७. गैरिल मगदूबि अलैहिम् वलद दाललीन
(आमीन)
भावार्थः
१. तमाम तारीफ ओहि अल्लाहक लेल अछि जे तमाम कायनात (ब्रह्माण्डीय सृष्टि) केर
२. जे रहमान (कृपालु) आर रहीम (भगवान) छथि ।
३. जे सजाक दिन केर मालिक छथि ।
४. हम अहीँक इबादत (पूजा-उपासना) करैत छी, आर अहीं सँ मदति चाहैत छी
५. हमरा सीधा रास्ता देखाउ ।
६. ओहेन लोकक रास्ता जेकरा उपर अहाँ इनाम फरमेलहुँ (पुरस्कृत कयलहुँ),
७. ओहेन लोकक रास्ता नहि जेकरा उपर अहाँक गजब नाजिल भेल (भयानक आफद आयल) आर नहिये ओहेन लोकक जे राहे हक सँ भटकल अछि (सत्य या धर्मक मार्ग सँ भटकल – पथभ्रष्ट अछि) ।
सूरह इखलास
१. कुल हुवल लाहु अहद
२. अल्लाहुस समद
३. लम यलिद वलम यूलद
४. वलम यकुल लहू कुफुवन अहद
१. अहाँ कहि देल जाउ जे अल्लाह एक छथि
२. अल्लाह बेनियाज (निःस्पृह) छथि
३. ओ न केकरो बाप छथि आ न केकरो बेटा छथि
४. आ नहिये कियो हुनकर बराबर अछि
अल्लाहु अकबर
अल्लाह सब सँ पैघ छथि ।
(रुकू मे) सुब हाना रब्बियल अजीम
पाक छथि हमर रब आ अजमत वला (गौरवपूर्ण) छथि ।
(रुकू सँ उठलाक बाद) समिअल लाहु लिमन हमिदह
अल्लाह ओकर सुनि लेलनि जे हुनकर तारीफ कयलकनि ।
रब्बाना लकल हम्द
हे हमर रब, अहींक लेल तमाम तारीफ अछि ।
अल्लाहु अकबर
अल्लाह सब सँ पैघ छथि ।
(सज्दा मे) सुब हाना रब्बियल आला
पाक छथि हमर रब, बड़ी शानवला छथि ।
(दोसर सज्दा सँ उठलाक बाद)
अत तहिय्यात
अततहिय्यातु लिल लालहि वस सलवातु वत
तय यिबातु
अस सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व
रहमतुल लाहि व बरकातुह
अस सलामु अलैना व अला इबदिल लाहिस
सलिहीन
अश हदु अल ला इलाहा इल्लल लाहु व अश
हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह
तमाम इवादत सब मात्र अल्लाह लेल अछि, आर तमाम नमाज एवं नीक बात सब सेहो अल्लाह लेल अछि ।
हमरहु पर सलाम हो आ अल्लाह केर नेक बन्दा सब पर सेहो ।
हम गवाही दैत छी जे अल्लाह केर सिवा कियो माबूद (पूज्य) नहि आर गवाही दैत छी जे मुहम्मद सल्लल लाहू अलैहि वसल्लम अल्लाह केर बन्दा आ हुनक रसूल छथि ।
दुरूद शरीफ
अलहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिव व अला
आलि मुहम्मद
कमा सल लैता अला इब्राहीम व अला आलि
इब्राहिम इन्नका हमीदुम मजीद
अल लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिव व
अला आलि मुहम्मद
कमा बारकता अला इब्राहीम व अला आलि
इब्राहीम इन्नका हमीदुम मजीद
हे अल्लाह ! हजरत मुहम्मद (सल्लल लागु अलैहि वसल्लम) पर, आर हुनकर आल पर रहमत नाजिल फरमाउ, जाहि तरहें हजरत इब्राहीम (अलैहिस सलाम) पर रहमत नाजिल फरमेलहुँ (कृपाक बरसात कयलहुँ), यकीनन अहाँ तारीफ केर लायक आ बड़-बुजुर्गी एवं अजमत वला छी ।
दुआए मासूरा
अल लाहुम्मा इन्नी जलम्तु नफ्सी जुलमन
कसीरा
वला यग फिरूज जुनूबा इल्ला अन्ता फग
फिरली
मग फिरातम मिन इन्दिका
वर हम्नी इन्नका अंतल गफूरुर रहीम
हे अल्लाह ! बेशक हम अपना जान पर बहुत जुल्म कयलहुँ आर अहाँक सिवाय कियो भी गुनाह सब केँ माफ नहि कय सकैत अछि, बस अपन खास इनायत सँ हमरा बखैश दिय आ हमरा पर रहम फरमाउ, बेशक अहीं टा बख्शय वला आ बेहद रहम वला छी ।
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल लाह
सलामती हो अहाँ पर, आर अल्लाह केर रहमत व हुनकर बरक्कैत हो ।
नमाज मुकम्मल भेल !
साभारः दीनी बातें, अनुवादः प्रवीण नारायण चौधरी
हरिः हरः!!
