विचार
– प्रवीण नारायण चौधरी
एखन आंशिक धारणा मात्र….
बन्धुगण ! बिहार मे विधानसभा चुनाव २०२५ काल्हि सम्पन्न भ’ गेल । रिकार्ड मतदान सच मे ऐतिहासिक भेल । महिला मतदाता बेसी मुखर भेलीह । पुरुषक संख्या परदेश कमेबाक कारण स्वाभाविक कमे छैक । चुनाव लेल दूरदेश सँ हजारों टका भाड़ा खर्चा कय केँ ओ सब आओत ई कठिनाह छैक । परिवारक भरण-पोषण पर भले ओ पैसा खर्च करत, कारण सरकारक सहयोग या खरात सँ बहुत उपर अछि ई स्वाभिमानी लोक जे घरबार छोड़ि परदेश जाइछ कमाय लेल । लेकिन वोटर टर्नआउट जबर्दस्त कहल जाइछ । लगभग ७०% । ई चमत्कार छियैक बिहारक लोकतंत्र लेल ।
एखन कहब त कनी जल्दी भ’ जायत, मुदा तैयो कहि रहल छी । कारण जमीनी अध्ययन जे अपन मिथिलावासक क्रम मे छठि मे देखल, ताहि आधार पर आ काल्हि साँझहि सँ विभिन्न सर्वे एजेन्सी सभक दावी ओहि बात केँ पुख्ता कय रहल अछि ताहि आधार पर कहय मे दिक्कत नहि तेना बुझा रहल अछि । विन्दुवार कहैत छी –
१. दुर्गापूजा, दिपावली आ छैठ जेहेन महापर्वक कारण गाम मे मतदाता जुटान पूर्व सँ बेहतर भेल, एना लागि रहल अछि ।
२. महिला मतदाता सब ‘सरकारक महत्व’ नीक सँ बुझय लागल छथि । युवातुरक होइथ या प्रौढ़ आ कि वृद्धा – जिनका अपन बालो-बच्चा सँ थोड़-बहुत नगद टका हाथ पर नहि भेटैत छन्हि, तिनको सब केँ एनडीए सरकार द्वारा भत्ता उपलब्ध करेनाय, मुफ्त राशन, गैस कनेक्शन, पढ़यवाली बचिया सब केँ साइकिल, ड्रेस, किताब या फेर खेतिहर सब केँ बिया, खाध, बीमा आ स्वास्थ्य उपचारक लेल केन्द्र सरकारक योजना आयुष्मान भारत आदिक प्रति जे जागरुकता एहि महिला वर्ग मे अछि से अहाँ केँ कमौआ बेटा सभक मोन मे नहि । कारण ओहि बेचार सब केँ कमाय सँ, खटय सँ आ लूटि-आनू-कूटि-खाउ सँ फुर्सते नहि जे एहि सब दिश माथ लगायत । तेँ महिलाक आगू होयब स्वाभाविके तौर पर सही अछि । आ यैह संकेत अछि जे एनडीए सरकारक योगदान सँ कृतज्ञ महिला समाज फेर सँ नीतीश-मोदी केर सरकार मे विश्वास जतौलक, नहि कि एकटा रीलवाली महिला जेकाँ ‘अपने जाति को देंगे न वोट’ जेकाँ निर्णय लेत वा लेलक ।
३. युवा मे बेरोजगारीक मुद्दा विपक्ष द्वारा उठायल गेल, जे कि हवा जेकाँ उड़िया गेल । कहू केना ? आइ जाहि तरहें शहर आ गाम केँ जोड़ि देल गेल अछि, जाहि तरहें बाहरी रेमिटैन्स ग्रामीण भाग मे आबि रहल अछि, जाहि तरहें सड़क ओ चाहे राष्ट्रीय उच्चपथ हो या राज्यक उच्च पथ या फेर साबिक सँ चलन-चलती मे रहल गाम-ठाम के जोड़यवला सड़क, नदी पर पूल-पुलिया – ई अर्थतंत्र केँ कतय सँ कतय पहुँचा देलक जे आब हम सब गाम-गाम मे सीमेन्ट-लोहा व अन्यान्य निर्माण सामग्रीक डिस्ट्रीब्यूटर, बड़का-बड़का होलसेलर आ प्रत्येक गामक चौक-चौराहा पर शहरे जेकाँ लाइन लगाकय व्यापारक प्रवर्धित रूप देखि सकैत छी । जे काजक लोक अछि से एनडीए सरकार केर योगदान सँ ‘कृतज्ञ’ अनुभव करैत अछि ।
४. आर्थिक प्रगति मे आइ चमारक चमड़ाक काज आ कमारक काठक काज, या फेर नौआक नहकेशक काज, या डोम-दुसाधक जातीय श्रम आधारित काज मे केवल ओहि जातिक पहुँच नहि रहि गेल छैक । एतेक तक कि ब्राह्मण पुरहितहु केर काज आब केवल ब्राह्मणक पास नहि रहि गेल छैक । श्रम आधारित जातीय समाजक परिकल्पना हवा मे उड़ि गेल छैक बुझू । हलवाई वला काज, तेली वला काज, कुम्हार वला काज – ई सब काज ‘मशीन’ युग मे आनो-आनो जातीय समाज द्वारा व्यवसायिक स्तर पर परिणति पाबि गेल छैक । तेँ ‘जातिक नामपर हिन्दू केँ विभाजित कयकेँ सत्ता पर पहुँचब, आ लालूक बेटा या घरवाली या बेटी केँ सत्ताक चाभी सौंपब, नेहरूक बेटी इन्दिरा, इन्दिराक बेटा राजीव, राजीवक घरवाली सोनियाँ, या बेटा-बेटी राहुल-प्रियंका’ केँ जनताक ‘राजा’ बनाकय सत्तासीन कय देब – ई सब बात आब आम जनता मे स्पष्ट भ’ गेल छैक ।
५. भाजपा सेहो मात्र हिन्दू-मुसलमान मे लागि जाय, देशक शासन व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त नहि राखय, कांग्रेसहि जेकाँ हिन्दू तुष्टिकरण या धार्मिक उन्माद प्रसार कय-कय केँ ‘जय श्री राम’ आदिक नारा टा मे ओझराकय रहि जइतैक त ओकरो हश्र जनता वैह करतैक जे आइ मुसलमान समुदाय केँ वोट बेर मे जमाय बनबयवला पार्टी कांग्रेसक आ तथाकथित ‘माई समीकरण’ पर १५ वर्ष जंगलराज चलबयवला ‘राजद’ केर कय देलकैक ।
६. आर्थिक युग मे आर्थिक प्रगति सर्वप्रथम जरूरी छैक । प्राथमिकता शान्ति व सुशासनक छैक । जनताक हित सर्वोपरि – सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास आदिक सूत्र जाहि पर ‘एनडीए’ शासन आइ १० प्लस वर्ष मे संघ मे आ बहुल राज्य मे डबल इंजिन केर सरकार चलि रहल छैक, ताहि सँ सब अपन हित बुझैत अछि ।
७. मुस्लिम मतदाता मे पुरुषक सोच आ महिलाक सोच मे वैचारिक अन्तर सेहो स्पष्ट भ’ गेल छैक । आब मुस्लिम पुरुष भले एखनहुँ स्वयं केँ बन्धुआ कांग्रेसी मतदाता बुझैत हो, अथवा ‘माई’ समीकरण केर हिस्सा बनिकय कहियो एहि झोरा मे त कहियो ओहि झोरा मे फाँगैत हो…. लेकिन महिला सुशासन, विकास, सुख-शान्ति आ ‘तीन बेर तलाक-तलाक कहिकय उपेक्षित जीवन जिबयलेल बाध्य करयवला पुरुष मुस्लिम समाज केँ’ ठोकल जवाब रूप मे ‘एनडीए’ केर पक्ष मे मतदान करैत छैक से स्पष्ट भ’ गेल अछि ।
८. राहुल गांधी उर्फ एलओपी जे कि ‘पप्पू’ रूप मे ख्यात भ’ गेल अछि, ओकरा द्वारा नहि त सदन मे कहियो अनुकूल काज कयल भ’ रहल छैक, नहिये सड़क पर कहियो सही मुद्दा लय केँ अबैत अछि । ओ ख्वाब देखि रहल अछि जे ‘जेन-जेड’ केँ कोहुना भड़का देत, ओकरा पते नहि छैक जे आइ ‘जेन-जेड’ केर झुकाव ‘सुशासन, विकास, सुशिक्षा, स्वरोजगार, स्वत्वक विकास’ केर समर्थक एनडीए दिश छैक, नहि कि अगबे जाति, धर्म, आदिक नाम लय-लय केँ देश केँ पाछू राखयवला गठबन्धन ओकर पसिन छैक । हँ, किछु उन्मादी जे सब ई गीत पसिन करैछ ‘यादवजी को सैयाँ बना लीजिये’ त ‘सिक्सर के छह गोली उतार देब सीना मे’ आदिक दीवाना सब अछि, ओ सब यैह पप्पू-ढप्पू-कप्पू सब केँ पसिन करैछ । बाकी जेन-जी केँ उकसेला पर सुशासन-विकासक दीवाना जेन-जी सब चूत्तड़ सेकिकय सही स्थान पर राखि सकैत छैक, से समाज छैक एतय ।
९. भ्रष्टाचारक झूठ आरोप लगा-लगा, अथवा सब कुछ बर्बाद हो गया अहर्निश विलाप करयवला इंडी गठबन्धन, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण आ ओकर लोकतंत्रक मूल्य केर हनन आदिक अरण्यरोदन करयवला सूत्र पर भारतीय राजनीति नहि बढ़ैछ एखन एक दशक लगभग सँ । ओना त अटलजीक समय सँ सुशासन व विकासक धारा बहल, यूपीए मुदा बीच मे ठीक-ठीक शासन चलबितो आखिरकार अनेकों भ्रष्टाचार मे लिप्त भ’ ‘नमो-नमो’ केर शासन आनि देलक भारत मे । आब केवल नमो-नमो होइत छैक ।
१०. आखिरी विन्दु एहि लेख लेल ई कहय चाहब जे विदेश नीति मे भारत पहिनुका स्थिति सँ ऊपर अमेरिका तक सँ नहि डरायवला, पाकिस्तान केँ ठोकल जवाब दयवला, रूस-अमेरिका सुपर पावर सँ बैलेन्स्ड राजनीतिक सम्बन्ध राखयवला, वैश्विक परिदृश्य मे आर्थिक विकासक परिकल्पना लेल अनेकों लगानी-मैत्री परिबन्ध सँ समझौता कय देशक चहुँदिश विकास करयवला सोच पर एनडीए चलि रहल छैक । देशक जनता आब मीडियाक सर्वसुलभ भ’ जेबाक कारण एहि सब बात सँ सुपरिचित छैक । तखन ओ एनडीए केँ बहुमत नहि देतैक त झूठक गुब्बारा उड़ेनिहार विपक्ष केँ जंगलराज आनय लेल से विचार आब छोड़ि देल जाउ ।
बाकी दोसर मे….
हरिः हरः!!
