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प्रवीण नारायण चौधरी

विमलाक विवाहक बेर

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै गरीब जन्म लेनाय अभिशाप नहिं परन्तु गरीब भ क मैर गेनाय बहुत बड़ा अभिशाप होइछ। विमला देखैत बहुत सुंदर छलीह, और सातवीं पास सेहो, पढय के आगु मोन बड होइन परंतु आर्थिक स्थिति बहुत खराब रहैन परिवार के, ताहि कारण पढाई बीचे में छोड़य पड़लैन। पिताजी केर थोड़-बहुत विमलाक विवाहक बेर

अपन गाम सँ दूर ईद उल फित्र पर सभक बरक्कत लेल दुआ – नौमन सिद्दिकी दुबई सँ

नौमन सिद्दिकी, दुबई। ५ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! आइ इस्लाम धर्मक बहुत पैघ पाबनि ‘ईद उल फित्र’ अछि। इस्लामिक महीना केर ९वम् महीना रमदान केर महीना होइत छै। रमदान केर नाम ठाउँ अनुसार रमजान कहिकय सेहो सम्बोधन करैत कयला जाइछ। रमजान विशेषत:  एसिया देश मे सम्बोधित होइत अछि। इस्लाम धर्मक मान्यता अनुसार कुरान केर अवतरण एहि अपन गाम सँ दूर ईद उल फित्र पर सभक बरक्कत लेल दुआ – नौमन सिद्दिकी दुबई सँ

विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

विचार-मंथन  – डा. लीना चौधरी (मूल लेख – हिन्दी मे, अनुवाद – प्रवीण नारायण चौधरी) अहाँ केँ कोन सवाल सब सँ बेसी विचलित केलक कुंती, पहिल संतान केँ नहि अपना पेबाक पीड़ा या द्रौपदी केँ कोनो सामान जेकाँ अपन पाँचो पुत्र केँ सझिया बाँटि देबाक बात? चूँकि अहाँ स्वयं सेहो स्त्री छलहुँ, तखन द्रौपदीक पीड़ा विचार-मंथनः अनुत्तरित प्रश्न?? (एक अवश्य पठनीय लेख)

जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)

कविता – वन्दना चौधरी बैसल छेलौं बहुत प्यासल, व्याकुल एकटा गाछ के तर में जे कखन ओ इनार स बान्हल डोरी जाहि में छै एकटा डोल बान्हल, ओ ऊपर आओत और हम अपन प्यास बुझेब। तखने आओल एक झंझावात के आवाज़, मोन त कुही भके कनेय लागल, किये त आब हम पियासल रैह जेब। ओ जीवनक संघर्ष (मैथिली कविता)

निखंड साड़ी आ काकी संग बरसाइत पाबनिक पूजा

मैथिली लघुकथा – रूबी झा बरसाइत पावैन छल। मीना कहली पति सँ सब आय नव नुवा पहिरै छै, हमरा त अहाँ किनो नै देलौं। पिछलो साल नैहर गेल रही भातिजक उपनयन में भेटल विदाई में नुवा उहे पहिर क’ केलौं। एते बात सुनि बजला विद्या नन्द (मीना के पति), “अगर अहाँ २०टा टका हर महिना निखंड साड़ी आ काकी संग बरसाइत पाबनिक पूजा

गोपाल बाबूक दुइ कवितः ईर्ष्या आ लाटरी

कविता – गोपाल मोहन मिश्र १. ईर्ष्या कियै हम अप्पन दुख सं बेसी, दोसरक सुख सं दुखी होईत छी । कियै ईर्ष्याक आगि में तपि कै, कुंदन तs नहि, मात्र कोइला बनि सुलगैत छी ।   एतेक सुलगलहुं कि अप्पन खुशीक चमक सेहो धुंधला लागय लागल, नहि देखि सकलहुं अप्पन सुख अप्पन आनंद,मात्र कुढ़ति रहलहुं, गोपाल बाबूक दुइ कवितः ईर्ष्या आ लाटरी

मैथिलीक महत्व हृदय सँ मनन करबाक आवश्यकता – सन्दर्भ नव राष्ट्रीय शिक्षा नीति मे भाषा

विशेष सम्पादकीय भारत मे नव राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू कयल जेबाक आवश्यकता अनुभव करैत ओहि ठामक विज्ञ-विशेषज्ञ एहि लेल नया नीति केर सिफारिश कयलनि अछि। एहि मे भाषा सम्बन्धी नव नीति सेहो आनल गेल अछि। त्रिभाषा शिक्षा नीति मे हिन्दी सहित भारतक विभिन्न शास्त्रीय भाषा मे अध्ययनक सिफारिश कयल जेबाक संग-संग भारतक मौलिक शिक्षा पद्धति मैथिलीक महत्व हृदय सँ मनन करबाक आवश्यकता – सन्दर्भ नव राष्ट्रीय शिक्षा नीति मे भाषा

नव ‘सखी-बहिनपा’ समूह बनेबाक स्पष्टीकरण संग आगामी कार्ययोजना पर वाणी भारद्वाज

३ जून २०१९. मैथिली जिन्दाबाद!! हालहि समाचार मे आयल छल जे सामाजिक संजाल सँ धरातल पर सक्रिय मिथिलानी विशेष समूह “सखी-बहिनपा” मे आन्तरिक विभाजन सँ समूह २ ठाम विभाजित भऽ गेल अछि। विदिते अछि जे पहिने श्रीमती आरती झा “सखी-बहिनपा” समूह केर निर्माण फेसबुक सँ कयलीह, प्रथम दिन सँ हुनकर विचार छलन्हि जे एहि ग्रुप नव ‘सखी-बहिनपा’ समूह बनेबाक स्पष्टीकरण संग आगामी कार्ययोजना पर वाणी भारद्वाज

सरला केँ रेडियो कीनबाक सख भले पूरा नहि भेलनि लेकिन वैह सख जीवन बना देलकनि

मैथिली लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै भाग्य स बेसी और समय स पहिने ककरो किछु नै भेटै छै। हमरा जनैत ई बात शत-प्रतिशत सत्य छै। एक टा महिला छलैथि जिनकर नाम सरला छलैन हुनका रेडियो के बहुत ज्यादा सौख रहैन। भाय हुनका ३००टका द क गेलखिन ओ सोचली एकर रेडियो कीनि लेब, लेकिन सरला केँ रेडियो कीनबाक सख भले पूरा नहि भेलनि लेकिन वैह सख जीवन बना देलकनि

दादीक परिस्थिति

मैथिली लघुकथा – डा. लीना चौधरी ओहो केहेन दिन छल जखन घरक कर्ता-धर्ताक सारा पड़हक छाउरो ठंढा नहि भेल छलन्हि आ दोसर दिश घरक लोक सब सम्पत्तिक बँटवारा लेल पंचायत बैसा लेने रहय। दादाजीक जिबैत धरि संयुक्त परिवार रहल, लेकिन आब हुनका चलि गेला सँ हुनकर सहोदर भाइ व हुनका लोकनिक परिवार केँ ई डर दादीक परिस्थिति