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प्रवीण नारायण चौधरी

प्रवीणक गतिविधि अन्तर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया मे

http://rajbirajdainik.com.np/Home/News/2570 मातृभाषामा पठनपाठन हुन नसकेकोमा चिन्ता व्यक्त Friday, January 13, 2017 दैनिक समाचारदाता राजविराज, २८ पुस ।  “मातृभाषामे शिक्षाः एक डेग” विषयक अन्तरक्रिया कार्यक्रम बिहीबार राजविराज स्थित पब्लिक विन्देश्वरी उच्च माध्यमिक विद्यालयमा सम्पन्न भएको छ ।  मिथिलाक अनुपम डेग नामक संस्थाद्वारा आयोजित कार्यक्रममा मैथिली साहित्य परिषद्का पूर्व अध्यक्ष समेत रहेका देवेन्द्र मिश्रले राज्यले मातृभाषामा पठनपाठन प्रवीणक गतिविधि अन्तर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय मीडिया मे

मैथिली कविता – एक दिन

कविता – ममता झा एक दिन एक दिन सब के जिन्दगी शेष भ जैत ई बात सब कियो जनई या, लेकिन अंतिम दिन तक स्वीकार बहुत लोग नई करै या कियाक त जीबऽ के अभिलाषा बेसी छै। किछु लोग जे जीवन स हैर गेल अपने आप के लाचार बुझइत अइ, हुनका लेल ई दू पंक्ति, मैथिली कविता – एक दिन

विधवा नारी केर विभिन्न अधिकार पर बंधनक औचित्य की?

विचार – डा. लीना चौधरी विधवा ई शब्द अपनेआप मे सब किछ कहि दैत अछि। स्त्रीक स्थिति मात्र सांस लैत शरीर केर रहि जाइत छैक। जीवन सँ रंग, स्वाद, सम्मान सब छीन लैछ ई समाज ओहि बेचारी केर। ओकरा ओहि बात केर सजा देल जाइत छैक जाहि मे ओकर कोनो हाथ नहि होइछ। ई समाज ईहो विधवा नारी केर विभिन्न अधिकार पर बंधनक औचित्य की?

दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा

लघुकथा – रूबी झा कहल गेल छै सैंग (थोड़) लोक अपने संतान स होययै। एकटा छली सुधीरा दाय। अपन घरक ख्याल राखैय स ज्यादा दोसरे के घरक कहानी सुनैय-सुनाबै में मोन लागैय छलैन। अपन बच्चा स ज्यादा दोसरे के बाल-बच्चा पर आँखि गड़ेने रहै छलैथ। पूरा मुहल्ला में ककरा घर में कि भेलैक नै भेलैक दिल्लीक सुधीरा दाय ऊर्फ दीपक चौरसियाक खिस्सा

जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक

लघुकथा – रूबी झा बिलो रिक्सा चालक छलाह। दिन-राति मेहनत क अपन परिवार केर लालन-पालन करैत छलाह। ओ पाँच-प्राणी छलाह – अपने, कनियाँ आ हुनक दुटा बेटी आ एकटा बेटा छलैन। सब गोटे दिल्ली मे रहैत छलैथ। दिन बहुत नीक ढंग सँ बीत रहल छलैन। भगवान के लीला देखू, एक दिन शरीर हुनका धोखा द जुड़य अपना त आदर करय आन – ओकर कहानी जे संघर्ष कय धियापुता केँ ठाढ केलक

आइना सँ प्रश्न – मैथिली कविता

कविता  – ममता झा एतबा बता दे आइना   एतबा बता दे आइना जे हम तोरा देखैत छी या अपना केँ? तोरा देखी तँ हमरा अपन चेहरा देखाइछ तखन तोहर चेहरा केहेन छौक? एतबा बता दे आइना जे तूँ एतेक साफ कोना छँ? हम त अपना केँ तोरा मे देखैत छी, मुदा तूँ अपना केँ आइना सँ प्रश्न – मैथिली कविता

घर-घर केर कथा – एहनो होइत छैक सासु-पुतोहु

कथा – डा. लीना चौधरी गर्मी के छुट्टी छल। आमक मौसम छल। सब बच्चा क लक कनियाँ गांम ऐल छलीह। आंगन पैघ छलैन । चारिटा भइयारी रहइ छला। जखन हिनकर सभक मुखिया नइ रहला तखन सब के सोच छल जै आब ई सब बिखइर जैत । परंच मां और कनिया के सहयोग से बड़का बेटा घर-घर केर कथा – एहनो होइत छैक सासु-पुतोहु

हम तऽ झोंका छी हवा केर उड़ा लऽ जायब – मैथिली गजल

गज़ल   – गोपाल मोहन मिश्र   हम तs झोंका छी हवा केर, उड़ा लs जायब जागैत रहब, हम अहाँके अहीं सं चोरा लs जायब  मूर्ति के कदम पर भै निछावर, फूल कहलक खाक में मिलियो कs हम, अप्पन खुशबू लs जायब  हमरा मिटयबाक, भने भै जाय कोशिश कामयाब  तैयो मिटैत मिटैत हम, मिटबाक मजा हम तऽ झोंका छी हवा केर उड़ा लऽ जायब – मैथिली गजल

बेटो विवाह मे अपने खर्चा करब की – मधु बाबूक बेटाक दहेज मुक्त विवाह

मैथिली लघुकथा – रूबी झा बजलाह मधु बाबू हम शपथ खा बजय छी, अपन बेटा के विवाह में एको टका दहेज नहि लेब। बस हम जे बरियाती ल जायब तकर नीक जकाँ स्वागत क देथि कन्यागत। दू साँझ बरियाती हम सब रहबैनि, ई हकरल जौउ और डकरल आउ से हमरा नहि पसीन अछि। एक साँझ बेटो विवाह मे अपने खर्चा करब की – मधु बाबूक बेटाक दहेज मुक्त विवाह

नीकक संग सँ नीक आ खराबक संग सँ खराबे भेटत

स्वाध्याय – प्रवीण नारायण चौधरी श्रीतुलसीदास रचित रामचरितमानस मे गूढ सँ गूढतम बात बड़ा सहज परिभाषा – सोदाहरण बुझायल गेल अछि। बेसी पांडित्यपूर्ण भाषा मे कोनो तत्त्वक निरूपण जनसामान्य केर रुचि मे नहि आबि पबैत छैक। जनसामान्य सदिखन कमे मे बेसी ग्रहण करबाक लौल मे रहैत अछि। गम्भीरतापूर्वक कोनो गूढ बात केँ बेर-बेर मनन करब, नीकक संग सँ नीक आ खराबक संग सँ खराबे भेटत