बेटो विवाह मे अपने खर्चा करब की – मधु बाबूक बेटाक दहेज मुक्त विवाह

मैथिली लघुकथा

– रूबी झा

बजलाह मधु बाबू हम शपथ खा बजय छी, अपन बेटा के विवाह में एको टका दहेज नहि लेब। बस हम जे बरियाती ल जायब तकर नीक जकाँ स्वागत क देथि कन्यागत। दू साँझ बरियाती हम सब रहबैनि, ई हकरल जौउ और डकरल आउ से हमरा नहि पसीन अछि। एक साँझ माछ और दोसरा साँझ मांसु के व्यवस्था करै पड़तैन। विदाई में बरियाती के धोती देबै पड़तैन, हम अपना तरफ स सोहाग में खरचा नहि करब।कियेक त हम कोनो दहेज लेबनि? बिना धोती के बरियाती केहेन लागत? कहइ छलखिन्ह चंचल काका बरियाती और कठियारी में किछु त अंतर लागै। आय-कैल्ह पते नहि चलैयै जे बरियाती स लौट रहल अछि कि कठियारी स लोक सब। हमर मांग त किछु नहि अछि, मुदा अपना बेटी-जमाय केँ देबाक जे होयन से अपन दिहथिन्ह। आय-कैल्ह फटफटिया त सब दैय छैय हमरो साईकिल देने रहे सासूर में। घड़ी, औंठी आ सीकड़ी के त रिवाजे आबि गेलैयै। मुदा हमर मांग किछु नहि अछि। मोन होइन त बेटी के पलंग, अलमारी आ पेटार द दिहथिन्ह। पलंग नहि देथिन त बेटी सुतथिन्ह कथी पर,अलमारी नहि देथिन्ह त बेटी नुआ-फटा कथी में रखथिन्ह, मुदा हमर मांग किछु नहि अछि। जे टका लैयै से ने गहना-जेवड़ ल क जाइ यऽ, हम कत स ल जेबैन। बेटो विवाह में हम अपने खरचा करब की? मोन होइन त बेटी के किछु जेवड़ द दिहथिन्ह, मुदा हमर मांग किछु नहि अछि। आब हम पाठक सभ पर छोड़ि रहल छी जे ई विवाह बिनु दहेज के अछि की? वर के बाप जे शपथ खेलाह से सच छनि की सोलहनी झूठ?