आइना सँ प्रश्न – मैथिली कविता

कविता 

– ममता झा

एतबा बता दे आइना
 
एतबा बता दे आइना जे हम
तोरा देखैत छी या अपना केँ?
तोरा देखी तँ हमरा अपन चेहरा देखाइछ
तखन तोहर चेहरा केहेन छौक?
एतबा बता दे आइना जे तूँ
एतेक साफ कोना छँ?
हम त अपना केँ तोरा मे देखैत छी,
मुदा तूँ अपना केँ कोना देखैत छँ?
सुन्दर आ असुन्दर केँ
अपना सँ परिचित कोना करबैत छँ?
केकरा मे लागल अछि दाग,
आर के अछि साफ,
ईहो तोंही बताबैत छँ।
एतबा बता दे आइना जे
तूँ एतेक सच कोना बताबैत छँ?
एतबा बता दे आइना जे
हम तोरा देखैत छी या अपना केँ?
 
आइना कृष्ण छथि आर
राधा ओहि मे अपना-आप केँ देखि
ई कहि रहली अछि जे
एहि संसाररूपी आइना मे जे
अहाँ व्याप्त छी,
एक-एक जीव केर हिसाब
कोना कय लैत छी,
हम तऽ अहाँक बाँसुरीये मे
हेरा जाइत छी।
जा धरि अहाँ बजबैत रहब,
हम ओहि धुन पर थिरकैत रहब,
मचलैत रहब,
ओहि धुन मे एना हेरा जायब जे
अहाँ केँ पतो नहि चलत जे
हम अहाँ मे केना विलीन भऽ गेलहुँ।