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प्रवीण नारायण चौधरी

चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

संकलनः साभार डी एन झा जी केर फेसबुक पोस्ट सँ चौठचन्द्र पूजनोत्सव के सभगोटे के मंगलमय हार्दिक शुभकामना… । पूजा के संक्षिप्त विधि ।। चतुर्थी चन्द्र पुजनः-।। स्नानोपरान्त आशन पर वैसक स्वस्ति वाचनोपरान्त गंगाजल जल मे राखि जल लकः- ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा । यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ।। पुण्डरीकाक्षः चौरचन पाबनिक संछिप्त पूजन विधान (वैकल्पिक)

चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

मिथिला कर्मकांड – लोकपाबनि चौरचनक वैदिक पूजा विधान – डा. सुधानन्द झा (ज्योतिषीजी), ग्रामः राढ़ी, जिलाः दरभंगा केर हस्तलेख पर आधारित (संकलन – श्री शंकर सिंह ठाकुर, सचिव, अप्पन ब्राह्मण समाज, विराटनगर, नेपाल) पुनर्लेखनः प्रवीण नारायण चौधरी  चौरचन लोकपाबनि थिकैक। एहि मे मंत्रक प्रधानता सँ बेसी भावक प्रधानता छैक। मिथिलाक विशिष्ट पाबनि थिकैक चौरचन, जतय चौरचन पाबनिक वैदिक पूजा विधान

भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान

कविता – भारती झा दहेज प्रथा बिका गेल माय बापक घर तेँ बेटी के घर बसल, केहन अभागल प्रथा अछि ई, दहेजप्रथा जे कतेको घर केँ निगलि चुकल।   यदि बेटी किछु नै कय पायल तेँ बेटा घर बचा लितय जखन ओकर बोली लगैत रहै तखन अपन शिक्षा के महत्व देखा दितय।   ख़ालिये हाथ भारती झा केर दुइ गोट रचना – दहेज प्रथा आ कतय गेल मिथिलाक दलान

सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार केर चयनित कथा “हमर मधुश्रावणी”

सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार प्रतियोगिता लेल तेसर चयनित कथा हमर मधुश्रावणी – प्रियम्वदा कुमारी बात आय से पाँच बरख पहिने, 2015 के अछि। बियाहक बाद हम्मर पहिल सावन छल। मधुश्रावणी पूजय लेल हम अप्पन नैहर आयल रही। घर मे मामी, मौसी, दीदी सभक उपस्थिति सँ खूब चहल-पहल छल। हमरा सावनक संस्मरण – दहेज मुक्त मिथिला पर आयोजित लेखनीक धार केर चयनित कथा “हमर मधुश्रावणी”

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिताक दोसर चयनित लेख “पहिल सासुर यात्रा’

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता, दहेज मुक्त मिथिला लेल चयनित संस्मरण आलेख पहिल सासूर यात्रा – किरण लता झा विवाह के बाद पहिल सावन छल। हम सासुर आयल रही अपना जाऊत के मुड़न में। हमरा सासुर में सावन के बुद्ध दिन केँ मात्र भगवती केर वार्षिक पूजा करबाक दिन आर ताहि अवसर टा मुड़न सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिताक दोसर चयनित लेख “पहिल सासुर यात्रा’

सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता मे प्रथम चयनित लेख ‘आत्मसंतुष्टि’

#संस्मरण #दहेज_मुक्त_मिथिला #सावनक_संस्मरण – अंजू झा   अपन संस्मरण साझा करै स पहिने हम अहाँ सबसँ माफी चाहब जे एहि पोस्ट सँ हम किनको धार्मिक भावना केँ चोट नै पहुँचाबय चाहैत छी। ई हमर अपन निजी अनुभव आ विचार थिक तेँ पुनः क्षमा माँगैत हम अपन संस्मरण साझा कय रहल छी।   आत्मसंतुष्टि   बात सावनक संस्मरण – लेखनीक धार प्रतियोगिता मे प्रथम चयनित लेख ‘आत्मसंतुष्टि’

फोकब्रेन आ ब्रेनकोठी संग मैथिली-भोजपुरी अकादमी मे महत्वपूर्ण भूमिका कयनिहार डा. के. के. केर योगदान

सामाजिक संजाल मे कयल योगदानक एक छोट समीक्षा – प्रवीण नारायण चौधरी डा. के. के. मात्र कहला सँ बहुत लोक नहि चिन्हि सकबनि, लेकिन ‘कैलाश कुमार मिश्र’ केर नाम सँ बेसी लोक चिन्हैत होयब। एक चर्चित विद्वान् – एन्थ्रोपोलोजी केर अध्ययन सँ स्वयं केँ मानवीय पक्ष प्रति साकांक्ष कयनिहार डा. कैलाश कुमार मिश्र द्वारा मैथिली-मिथिला फोकब्रेन आ ब्रेनकोठी संग मैथिली-भोजपुरी अकादमी मे महत्वपूर्ण भूमिका कयनिहार डा. के. के. केर योगदान

ओ नीक छलाह या अहाँ नीक छी – मंथन योग्य विषय

परम्पराक अगबे दोख देनाय कतेक उचित?   कखनहुँ-कखनहुँ हमरा दिमाग मे ईहो बात अबैत अछि जे अपन पुरुखाजनक परम्परा केँ हम सब सीधे गलत कहि बैेसैत छी से हमरे सभक गलती छी। युग (देश, काल आ परिस्थिति) अनुसारे कोनो सामाजिक नियम केँ बनब या जियब शास्त्रीय पद्धति कहल गेल अछि। पुरुखाजनक समय मे जाहि तरहक ओ नीक छलाह या अहाँ नीक छी – मंथन योग्य विषय

कोना के सुधरत मिथिलाक दिन (अभियान गीत)

कोना सुधरतै मिथिलाक दिन   (तुकबन्दी – प्रवीण नारायण चौधरी, १८.०८.२०२०, विराटनगर, नेपाल)   बड़-बड़ गप बादहु मे देबय, यौ सरकार!   पहिने अपनहि टा सुधरू, से अछि आवश्यक दरकार!!   पूरे मिथिला दहेज मुक्त बनत से विश्वस्त रहू!   परिवर्तन अपनहि टा सँ से पहिने आश्वस्त करू!!   जा धरि स्वाबलम्बी नहि बनय आब कोना के सुधरत मिथिलाक दिन (अभियान गीत)

मिथिला संस्कृति आर परम्परा सत्संग सम्पन्न

काठमाडौँ, १ भाद्र । मैथिली जिन्दाबाद!!   सहृदयता समाज नेपालक आयोजनामे मिथिला संस्कृति आर परम्परा विषयक सत्संग सम्पन्न भेल अछि । मिथिला संस्कृति आर परम्पराक मौलिक दर्शन तथा चिन्तन-धाराक लौकिक अभ्यास कयल जेबाक बात उजागर करैत सहभागी लोकनि एकर संरक्षण आर प्रवर्धन करबाक विन्दु पर जोर देने रहथि ।   कार्यक्रमक प्रमुख वक्ता मिथिला साहित्य मिथिला संस्कृति आर परम्परा सत्संग सम्पन्न