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प्रवीण नारायण चौधरी

मिथिला मे केक काटिकय बर्थडे मनेबाक परम्परा नहि मुदा……….

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी केक काटि बर्थडे मनेनाय मिथिलाक परम्परा नहि मुदा…..   हम-अहाँ सब बात अपनहि मोनक हिसाब सँ करब त दुनियाक लोक केँ ई बात हमेशा पसिन नहि पड़त। दुनिया कहला सऽ फेर अहाँ सँ अन्जान आ संगत सँ दूर केर बात हम नहि कहब, या फेर जे बाद मे अहाँक सम्बन्ध मिथिला मे केक काटिकय बर्थडे मनेबाक परम्परा नहि मुदा……….

हमर आदर्श व्यक्तित्व – कथा-संस्मरण

लेख – प्रवीण नारायण चौधरी हमर आदर्श व्यक्तित्व   दहेज मुक्त मिथिला समूह मे एतेक रास क्रिएटिव विचारधाराक संगम एक संग अछि जेकर परावार नहि। समूहक एक अत्यन्त सक्रिय बहिन सुश्री राधिका झा (सीतामढ़ी) एक महत्वपूर्ण विषय रखलीह अछि – ‘हमर आदर्श व्यक्तित्व’ केर फोटो संग किछु अनुकरणीय संस्मरण लिखू। संगहि हमरा विशेष रूप सँ हमर आदर्श व्यक्तित्व – कथा-संस्मरण

नेपालक मैथिली भाषाभाषी समाज मे शिक्षाक वर्तमान अवस्था पर कौशल गोपालवंशीक लेख

लेख – कौशल गोपालवंशी मैथिली भाषाभाषी समाजमे शिक्षाके बर्तमान अबस्था महान मिथिलादेश, जे अङ्ग्रेजके पालामे बिभाजित भ के मिथिलाके सिर (राजधानी जनकपुर सहित) नेपालमे और धर भारतमे बिलिन भ गेल। बिलिन भेलाके बादो मिथिलावासी सब अपना-आपके मैथिली नै कहाबेमे मन पड़बैत अछि। एक समयमे समृद्ध राष्ट्र रहल मिथिला बर्तमान अवस्थामे नेपाल और भारत दुनू देशमे नेपालक मैथिली भाषाभाषी समाज मे शिक्षाक वर्तमान अवस्था पर कौशल गोपालवंशीक लेख

नेपाल मे मगही के जनम आ विकास ऊपर दुइ टप्पी

विचार – प्रवीण नारायण चौधरी सब कोइ पढय, सब कोइ बढय   हमर एक मित्र-भाइ संतोष कुमार साह (रौतहट) आइ अपन एक संवाद से ध्यानाकर्षण कयलाह। ओ लिखने रहथि निम्न पोस्ट केर बारे मे जे ई एक नौटंकी थिक – सन्दर्भ पोस्ट जहिनाक तहिना लिखि रहल छीः   “नाम :- दिपेन्द्र कुमार कापरी ठेगाना :- नेपाल मे मगही के जनम आ विकास ऊपर दुइ टप्पी

मैथिली भाषा केँ सहज बनेबाक विमर्श – कारण आ उपाय

कतेक सहज छैक कोनो भाषाक क्लीष्टता केँ दूर करब – प्रवीण नारायण चौधरी, संपादक, मैथिली जिन्दाबाद   संसार मे एहेन कतेको भाषा भेलैक जेकर क्लीष्टताक कारण जनसामान्य ओकर शुद्ध आ प्रचलित मानक पर आधारित लिखित वा मौखिक स्वरूप केँ नहि अपना सकल अछि। लेकिन कोनो भाषा केँ नहि अपनेबाक कारण केवल क्लीष्टता केँ नहि देल मैथिली भाषा केँ सहज बनेबाक विमर्श – कारण आ उपाय

मैथिली लेल नवारम्भ प्रकाशनक अभूतपूर्व क्रान्ति – आब पोथी सदेह के बदला विदेह रूप मे सेहो कीनि सकैत छी

२४ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! आब मैथिलीक पोथी आनलाइन कीनि आ पढि सकैत छी – नवारम्भ प्रकाशनक नया उपाय   मैथिली भाषा-साहित्य केँ नव प्राणदान देबाक काज नवारम्भ प्रकाशन मधुबनी कय रहल अछि। काल्हि कुमार पद्मनाभ केर रचित उपन्यास ‘पपुआ ढपुआ सनपटुआ’ पर आयोजित एक वेबिनार समीक्षा मे लाखों दर्शकक यैह प्रतिक्रिया छल। गुन्जन मैथिली लेल नवारम्भ प्रकाशनक अभूतपूर्व क्रान्ति – आब पोथी सदेह के बदला विदेह रूप मे सेहो कीनि सकैत छी

मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

कि मधुबनी जिला सर्वाधिक ‘दहेज मुक्त मिथिला’ अछि? (सर्वे और बहस) काल्हि ‘दहेज मुक्त मिथिला सर्वे-२०२०’ केर पहिल तथ्यांक जारी कयल, जाहि मे दहेज प्रथाक विरूद्ध सब सँ अधिक जागरुकता ‘मधुबनी’ जिलाक लोक मे देखल गेल कहि सकैत छी। तथ्यांक सँ स्पष्ट अछि जे सब सँ अधिक लोक मधुबनी सँ सक्रियता देखौलनि। ईहो स्पष्ट अछि मधुबनी जिला विशेष – सर्वाधिक दहेज मुक्त मिथिला एहि जिला मे

आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि २२ अगस्त २०२० दहेज मुक्त मिथिला फेसबुक समूह पर एकटा सर्वेक्षण कयल गेल। एहि सर्वेक्षण मे मिथिलाक गाम आ जिलाक लोकक बीच एकटा समन्वय स्थापित करबाक मुख्य अभिप्राय अछि। ओना आजुक समय मे मिथिला सांस्कृतिक-भाषिक तौर पर दुइ देशक सीमा मे पंजाब, बंगाल आ तमिल जेकाँ विभाजित अछि। आइ मिथिला कतय धरि जिबैत अछि – दहेज मुक्त मिथिला सर्वे २०२०

चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

२३ अगस्त २०२०। मैथिली जिन्दाबाद!! चौरचन २०२० बीतल। भाद्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि केँ आर कतहु चन्द्रमाक दर्शन वर्ज्य अछि, लेकिन मिथिला मे ई अदौकाल सँ चानक विशेष दर्शन लेल जानल जाइत अछि। एकरे चौरचन कहल गेल छैक। एकरा लोकपाबनि सेहो कहल गेल छैक। एहि सन्दर्भ मे लोकसाहित्यक विशिष्ट मर्मज्ञ-साहित्यकार डा. महेन्द्र नारायण राम सँ चौरचन मिथिलाक महत्वपूर्ण लोकपर्व थिकः डा. महेन्द्र नारायण राम

चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद

२३ अगस्त २०२० । मैथिली जिन्दाबाद!! काल्हि मिथिलाक लोक-पाबनि चौरचन सम्पन्न भेल। एहि अवसर पर सामाजिक संजाल केर विभिन्न स्रोत सँ संकलित चौरचन विशेष साहित्यिक प्रसाद एतय राखि रहल छी। लेखकक नाम जाहि मे नहि पता चलि सकल अछि, ताहि लेल नहि लिखि रहल छी। बाकी जे कियो असल लेखक होइथ, हुनका नमन करैत हुनका चौरचन केर साहित्यिक प्रसाद